nayaindia Signs Traditions of Shri Ram विश्व भर में श्री राम के चिन्ह और परंपराएं
गेस्ट कॉलम | लाइफ स्टाइल | धर्म कर्म| नया इंडिया| Signs Traditions of Shri Ram विश्व भर में श्री राम के चिन्ह और परंपराएं

विश्व भर में श्री राम के चिन्ह और परंपराएं

Up assembly election Ayodhya

राम जी का चरित्र ही ऐसा है कि इसे किसी धर्म और किसी क्षेत्र में बांध नहीं सकते। भारत ही क्या पूरे विश्व के बहुत सारे देश हैं, जहां आज भी राम जी का गुणगान होता है तथा राम के चरित्र का बखान होता है, कई ऐसे देश हैं जहां आज भी श्री राम का मंदिर हैं। हम नेपाल और श्रीलंका के बारे में जानते हैं कि इन दोनों देशों का रामायण में कई बार जिक्र है।

श्रीरामनवमी पर विशेष आलेख

श्रीराम, जयश्रीराम, श्री सीताराम या सिर्फ राम कुछ भी कहा जाए मगर इन शब्दों की विराटता इतनी बड़ी है, जिसके दायरे में न जाने कितने ब्रह्मांड समा जाएं, कितने लोक समा जाएं, कितने काल खंड समा जाएं फिर भी इसकी गहराई की थाह लगा पाना संभव नहीं है। सनातन परंपरा में श्री रामनवमी अर्थात भगवान श्री राम का जन्मदिन, जन्मोत्सव हमारे सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। राम, रामायण, रामनवमी, अयोध्या ,वाल्मीकि और तुलसी की दिव्यता से लोक और परलोक दोनों आलोकित हैं। राम के आलोक से संपूर्ण जगत प्रकाशमान है। राम के इतने परिप्रेक्ष्य और आयाम हैं कि उन्हें कुछ शब्दों में संजोना या व्यक्त करना असंभव है। इस रामनवमी पर जो कुछ विशेष इसलिए है कि वर्षों से लंबित, बाधित और हजारों आंदोलनों का साक्षी श्री राम जन्मभूमि जन्मस्थान मंदिर सभी बाधाओं को पारकर भव्य स्वरूप लेने जा रहा है, ऐसे में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के बारे में नई पीढ़ियों को बताते रहने की जरूरत है।

आज इस रामनवमी उत्सव पर हम चर्चा कर रहे हैं कि न सिर्फ भारत में, बल्कि विश्व के अनेक देशों में श्री राम का जीवन, पूजन, संस्कृति व्यापक रूप से विस्तृत है। अभी देश में हर जगह अयोध्या में राम मंदिर निर्माण एवं राम जी के चरित्र की चर्चा होती दिख रही है। राम जी का चरित्र ही ऐसा है कि इसे किसी धर्म और किसी क्षेत्र में बांध नहीं सकते। भारत ही क्या पूरे विश्व के बहुत सारे देश हैं, जहां आज भी राम जी का गुणगान होता है तथा राम के चरित्र का बखान होता है, कई ऐसे देश हैं जहां आज भी श्री राम का मंदिर हैं। हम नेपाल और श्रीलंका के बारे में जानते हैं कि इन दोनों देशों का रामायण में कई बार जिक्र है। नेपाल जहां राम जी का विवाह हुआ था यानी सीता माता के पिता का घर है। वहीं श्रीलंका रावण के घर के रूप में हम सभी पहले से ही जानते है। परंतु आज हम वैसे देशों के बारे में जानने जा रहे हैं, जहां आज के समय में भी राम का अस्तित्व है तथा आदर्श के साथ उनके नाम लिए जाते हैं। हमारे भारत देश के लिए तो वो मर्यादा पुरूषोतम हैं ही।

तो चलिए देखते हैं कि भारत को छोड़ और ऐसे कौन से देश हैं, जहां भगवान श्री राम की पूजा की जाती है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि बर्मा एक ऐसा देश है, जहां राम का अस्तित्व आज भी जीवित है। वहां के लोकगीतों में राम के चरित्र का वर्णन मिलता है। वहां होने वाले उत्सव में रामलीला नाटक किया जाता है। आज भी वहां के व्यक्ति अपने बच्चों के नाम राम के नाम पर रखते हैं। आज भी वहां रामवती नगर राम नाम पर ही स्थापित है। आज भी वहां की अमरपुरा में सीताराम लक्ष्मण और हनुमान के चिन्ह अंकित मंदिर हैं।

मलेशिया में हिंदू धर्म मानने वालों की संख्या काफी ज्यादा है, जिसके कारण राम कथा का प्रचार वहां अभी तक है। सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि वहां के मुस्लिम भी अपने नाम के साथ हमेशा राम, लक्ष्मण और सीता का नाम जोड़ते हैं। रामायण को धार्मिक ग्रंथ की मान्यता यहां प्राप्त है तथा इसका नाम सेतिराम है। वहीं थाईलैंड वाले अपने को राम वंशी मानते हैं तथा वहां के राजवाड़े में भारत की भक्ति राम की पादुका को लेकर राज करने की परंपरा आज भी प्रचलित है। थाईलैंड में कई शहरों का नाम रामायण के चरित्र के अनुसार जैसे अजुधिया, लवपूरी और जनकपुरी रखा गया है। वहां आज भी रामकथा का आयोजन बड़े धूमधाम से होता है और मंदिरों में भी राम कथा का प्रसंग अंकित मिलता है।

इसके अलावा कंबोडिया में भी हिंदू सभ्यता के साथ-साथ रामायण एवं राम के अस्तित्व का प्रचलन अभी भी है। जिसका प्रमाण छठी शताब्दी के एक शिलालेख से मिलता है। इस शिलालेख में दर्शाया गया है कि कई जगहों में रामायण और महाभारत का पाठ किया जाता है। इसी प्रकार इंडोनेशिया में भी राम और रामायण का प्रचलन है उस देश में भारत के जैसा ही रामायण वहां के जनजीवन में बसा हुआ है। इंडोनेशिया के मुसलमान भी अच्छे इंसान बनने के लिए रामायण पढ़ा करते है। जो अपने आप में अद्भुत है। यहां तक की रामायण को शिक्षा का हिस्सा भी बनाया गया है। आज भी उनके जीवन में राम के चरित्र का गहरा प्रभाव है। इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप को बाल्मीकि रामायण में स्वर्ण भूमि के नाम से जाना जाता था। इंडोनेशिया एक ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी है।

जावा विश्व का एक ऐसा देश है जहां रामचंद्र को राष्ट्रीय पुरुषोत्तम के रूप में सम्मानित किया गया है। वहां की सबसे बड़ी नदी का नाम सरयू है तथा वहां आज भी कठपुतलियों का नाच रामायण के प्रसंग से होता है। इस प्रकार दुनिया के विभिन्न देशों में भगवान राम की महिमा, मंदिर, संस्कृति, का विस्तार न सिर्फ भारत के लिए गौरवपूर्ण है, बल्कि सनातन संस्कृति के संवाहक चरित्र के रूप में पूरी दुनिया को अपने आलोक से प्रकाशित कर रहे हैं। मूल रूप से श्री राम का चरित्र एक विशिष्ठ चरित्र, एक मर्यादित चरित्र के साथ भारत के लोक चरित्र के स्वरूप में परिवर्तित हो जाते हैं। (लेखक साहित्य अकादमी के सदस्य हैं और मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली के पूर्व उपाध्यक्ष हैं।)

Tags :

Leave a comment

Your email address will not be published.

one × 2 =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
मुफ्त राशन योजना तीन महीने बढ़ी
मुफ्त राशन योजना तीन महीने बढ़ी