ऐसे बड़े देश की छोटी घटनाएं- जो पूरा सच नहीं बता पाती

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शीर्षक का आशय यह हैं की चुनाव में नेताओ के भाषण के अलावा भी बहुत कुछ होता हैं। खबरिया चैनल से शुरू होने वाली घटनाए 24 घंटे वे सुर्खियों से उतार जाती हैं। इसके अनेक कारणों में एक कारण हैं की उस खबर में जितना सनसनी का रस होता हैं वह एक बार में ही निकाल लिया जाता हैं, चूसे हुए गन्ने की भाति सड़क पर कूड़ा बन जाता हैं।

परंतु प्रकाशित होने वाले छोटे से भी मीडिया के भाग को तो जितनी महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी जानकारी हो उसे पाठकों तक पंहुचना हैं। टीवी चैनलों की तरह दर्शकों को कुछ मिनट तक सनसनी में डाल कर टीआरपी बड़ाने का इरादा तो समाचार पत्रों का हो ही नहीं सकता !

कुछ दिन पूर्व ही देश के धन कुबेर और रिलायंस ग्रुप के मालिक मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ें एक कार से बरामद हुई। गनीमत हैं की “ज़ेड”श्रेणी की सुरक्षा इस परिवार को मिली हुई है। 48 घंटे तक दिल्ली के आई.बी. से लेकर एनएसए और मुंबई पुलिस उस अभियुक्त को खोजने में लगे रहे। करीब दो दिन तक ही सरकारी कारवाई का प्रसारण टीवी पर होता रहा। अगर सूत्रों की माने तो जैस -उल हिन्द नामक आतंकवादी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी ली हैं। ऐसा उनके द्वारा भेजे गए संदेश में कहा गया हैं। ऐसा भी सुना जाता हैं की उन्होने पैसो की मांग भी रखी हैं और मांग पूरी नहीं होने पर उनके पुत्र पर हमला करने की धमकी भी दी हैं। अब यह तफसील दैनिक समाचार पत्रो में सिंगल कालम या डबल कालम में एक इंच ही जगह पा सका। जबकि सभी को मालूम हैं कि देश के काफी टीवी चैनल उनके आधिपत्य में हैं। फोन और टीवी की दुनिया के बादशाह हैं।

परंतु जिस प्रकार इस घटना का पटाक्षेप हुआ हैं – वह कई शंकाओं को जनम देता हैं ! की कहीं पर्दे के पीछे कुछ और तो नहीं चल रहा..! वैसे अभी तक आतंकवादी संगठन सरकारी स्थानों और लोगों को ही निशाना बनाते रहे हैं। यह पहली बार होगा की डाकुओं की तरह देश के जाने -माने रईस से फिरौती मांगी गयी हो…? एयर इंडिया के हवाई जहाज को अगवा कर पेशावर ले जाने की घटना में भी गुपचुप फिरौती दी गयी थी। अब सच के बाहर आने तक हम इंतज़ार ही कर सकते हैं…!

2. वैसे तो सीबीआई का नाम सुनते ही अच्छे – अच्छे लोगों के होश उड़ जाते हैं , क्योंकि इनके हाथ पुलिस से भी बड़े होते हैं। फिर भी जीतने मामलो में ये हाथ डालते हैं, उनमें से मात्र दस से पंद्रह प्रतिशत मामलों में ही अदालत में ये अभियुक्त को सज़ा दिला पाते हैं। लेकिन प्रदेश की भिंड जिले में न्यायिक मजिस्ट्रेट शरद जायसवाल ने 2005 के एक मामले में सीबीआई के संयुक्त सचिव पंकज श्रीवास्तव और प्रदेश के नगरिय प्रशासन के प्रमुख सचिव और मेट्रो कार्पोरेशन के मानेजिंग डाइरेक्टोर मनीष सिंह को एक प्रैस फोटोग्राफर को बूथ केप्चरिंग का फोटो खिचने के कारण इन लोगो मुकेश जैन को आपराधिक षड्यंत्र करके एन एस ए में केस दर्ज करने का आदेश थाना अध्यक्ष को दिया। उस समय दोनों अधिकारी भिंड में पदस्थ थे। मनीष सिंह कलेकटर और पंकज श्रीवास्तव एस पी थे। इस मुकदमे को लड़ने के लिए मुकेश जैन ने कानून की अध्ययन किया। फिलहाल इन तीनों अधिकारियों को 15 जैन को अदालत में पेश होने का आदेश दिया हैं। ऐसा पहली बार हुआ हैं कि सबको भयभीत करने वाली संस्था खुद अपराधी बन गयी कम से कम आरोप तो लगा।

पुनश्च : केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की एक याचिका को नागपुर उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया हैं। जिस याचिका को खारिज करने के लिए गडकरी प्रयासरत थे। वह 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके द्वारा हलफनामे में गलत जानकारी दिये जाने के संबंध में थी।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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