बिगड़े बोलो की वजह तनाव में राजनीतिज्ञ

दरअसल, जो लोग दूर से विधायक को मंत्रियों और मुख्यमंत्री के जलवे देखते होंगे वे सोचते होंगे इन लोगों के जीवन में कितनी सुख शांति है लेकिन कभी इन लोगों के करीब जाकर देखेंगे तो सब कुछ मिलेगा शांति कहीं नहीं मिलेगी क्योंकि जिसको जो प्राप्त है उससे और अधिक प्राप्ति की कामना उसे अशांत किए रहती है।

सोचो कितने राजनीतिक कार्यकर्ता दोनों दलों में होंगे जिन्होंने जिंदगी भर पार्टी के लिए मेहनत की होगी लेकिन कभी पार्षद का भी टिकट नहीं पा पाए होंगे लेकिन जिनको टिकट मिल रहे हैं विधायक बन रहे हैं उनमें असंतोष है कि उन्हें मंत्री क्यों नहीं बनाया जा रहा है और जो मंत्री बन गए हैं उनमें असंतोष है कि उन्हें महत्वपूर्ण विभाग क्यों नहीं दिए जा रहे हैं और स्वयं चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाले शिवराज सिंह चौहान भी परेशान है कि वे मनमाफिक मंत्रिमंडल बना पा रहे हैं और ना ही मनमाफिक मंत्रियों को विभाग दे पा रहे हैं।

बहरहाल, मंत्रियों को विभाग वितरण का कार्य फिर से टल गया है जिसके कारण आज सुबह 10:30 बजे होने वाली कैबिनेट की बैठक शाम 5:00 बजे तक के लिए टल गई है और संभावना यही है कि आज शाम तक मंत्रियों को विभाग बांट दिए जाएंगे। महत्वपूर्ण विभागों को लेकर चल रही रस्साकशी एक बार फिर दिल्ली दरबार पहुंच गई है और जहां से स्वीकृति मिलने के बाद जारी कर दी जाएगी। पहले मंत्रिमंडल विस्तार और अब मंत्रियों को विभागों को लेकर जिस तरह से खींचतान चली है उससे पार्टी का अनुशासन का संदेश तो बिगड़ा ही है। विपक्षी दल कांग्रेस को भी आरोप लगाने के भरपूर मौके मिले हैं। नेताओं के बिगड़े बोलो का सिलसिला थम नहीं रहा है। कुछ नहीं था सीधे तौर पर बोल रहे हैं तो कुछ इशारों-इशारों में बातें कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे सत्ता कहीं विष पीने को विवश कर रही है तो कोई कड़वा घूंट पी रहा है।

सबसे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मंथन में जो विष निकलेगा वह शिव पिएंगे। वहीं बुधवार को वर्चुअल रैली के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राजनीति में कई बार ऐसे अवसर आते हैं जब कड़वा घूंट पीकर भी सेवा का कार्य करना पड़ता है। यहां बताते चलें कि हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उनके समर्थक रमेश मेंदोला को शामिल नहीं किया गया है। इसके बावजूद वह पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे ही अजय विश्नोई का कष्ट भी रह रह कर प्रस्फुटित हो रहा है। वहीं कुछ विधायकों के समर्थकों ने प्रदर्शन करके अपने कष्ट जाहिर किए हैं राजनीति में जब से योग्यता, दक्षता, क्षमता और वरिष्ठता को दरकिनार करके फैसले होने लगे हैं तब से नेताओं के बीच न केवल तनाव बढ़ा है, वरन बगावत की घटनाएं भी बढ़ गईं। कांग्रेस सरकार का गिरना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

जहां आम चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपेक्षा हुई और अभी अपने समर्थक 22 विधायकों के साथ भाजपा में आ गए और उसके बाद प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक लोगों के बीच तनाव बढ़ता रहा कांग्रेस सरकार के दौरान जो भी मंत्री थे बे तब से ही परेशान हैं और अब तो उनकी परेशानी इस बात को लेकर भी है कि बंगला खाली करना है और जिन विधायकों ने पाला बदलकर सरकार पलटी उनको अभी उपचुनाव का तनाव है और जो लोग सरकार में हैं वह भी अभी तनाव में हैं क्योंकि पहले पांच मंत्री बनाए गए।

2 महीने तक वरिष्ठ विधायकों ने अपनी बारी का इंतजार किया और अब जबकि मंत्रिमंडल का विस्तार हो चुका है तो जो विधायक मंत्री नहीं बन पाए उनका तनाव कब तक चलेगा कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन जो मंत्री पद की शपथ ले चुके अपने-अपने विभाग को लेकर परेशान हैं। बहुत कम ऐसे नेता हैं जो राजनीति में इस तरह के तनाव नहीं पाते लेकिन उनके समर्थक तनाव में रहते हैं।

कुल मिलाकर माना यही जाता है कि सत्ता और उसके इर्द-गिर्द रहने वाले लोग सुख-शांति का जीवन व्यतीत कर रहे हैं लेकिन राजनीतिज्ञों के करीब 2 लोग रहते हैं जिनके पास सुबह से लेकर देर रात तक काम करवाने वालों की भीड़ रहती है, फोन आते हैं और जो स्वयं अपनी स्थिति किसी से कह भी नहीं पाते। ऐसे तनावपूर्ण जीवन जीते हैं और जब सब्र का बांध टूटता है तब फिर बिगड़े बोल निकलते हैं। राजनीति में तनाव तभी खत्म होगा जब योग्यता के आधार पर निर्णय होने लगे ना कि तेरे मेरे को उपकृत करने वाले निर्णय होती रहे।

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