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Saturday, April 17, 2021
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स्थगन भी सदन में कांग्रेस की धमक नहीं बना पाया

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वहीं स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत ने तथ्यों तर्को और दुर्घटना के मानवीय पक्षों को इतने प्रभावी ढंग से रखा की की आखिर में विपक्षी सदस्यों को बाय काट औपचारिकता करके अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ी। दरअसल, जब भी कभी सदन में किसी बड़ी घटना में स्थगन प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकृति मिलती है तब विपक्षी दल पूरे सत्र की कसर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से निकाल लेता है।

जहां सत्ताधारी दल को पसीने छूटने लगते दोनों ही दल इसके लिए दिन रात तैयारियां करते हैं लेकिन सोमवार को सीधी बस दुर्घटना कि मामले में लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी दल भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और विभागीय मंत्री गोविंद राजपूत और भाजपा विधायक जहां पूरी तैयारी के साथ सदन में आए थे वही विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से ना तो नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ सदन में थे और ना ही वे विधायक सदन में उपस्थित थे जिन्हें इस मुद्दे पर अपनी बात रखनी थी।

बहरहाल, कांग्रेस विधायक कमलेश्वर पटेल एवं अन्य कांग्रेसी विधायकों द्वारा सीधी बस दुर्घटना के मामले में आए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के लिए विपक्षी दल कांग्रेस ने वैसे रुचि नहीं दिखाई जैसी 54 व्यक्तियों की मौत के बाद दिखानी थी। इस दौरान चर्चा के लिए कांग्रेस विधायकों के नाम पुकारे जा रहे थे उनमें से अधिकांश कांग्रेश विधायक सदन में अनुपस्थित थे। नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ राजधानी से बाहर होने के कारण सदन में उपस्थित नहीं हो सके। शायद यही कारण था कि कांग्रेस विधायकों में तालमेल का अभाव था और विपक्षी तेवर पार्टी के देखने को नहीं मिले वातावरण हल्का फुल्का देखकर काम रोको प्रस्ताव पर लंच का ब्रेक भी किया गया और संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी चुटकी लेते रहे और जब जवाब देने की बारी आई तो परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत ने भी एक-एक करके विपक्षी सदस्यों के ना केवल जवाब दिए वरण अपने तथ्यों और तर्कों के आधार पर सदन में सड़क हादसे बस दुर्घटना के बारे में तमाम प्रकार के पक्षों को रखा चर्चा में विपक्ष की ओर से कमलेश्वर पटेल, डॉक्टर गोविंद सिंह, नर्मदा प्रजापति, कुणाल चौधरी, संजय यादव, विजय लक्ष्मी साधो, वहीं सत्तापक्ष की ओर से नहीं शतेन्दु तिवारी, शैलेंद्र जैन, यशपाल सिसोदिया, बहादुर सिंह स्थगन प्रस्ताव पर हुई चर्चा में भाग लिया।

कुल मिलाकर बहुत ही गंभीर विषयों पर सदन में स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की जाती है। अन्यथा विपक्षी दल की मांग पर सत्ता पक्ष और अध्यक्ष आसानी से तैयार नहीं होते लेकिन सीधी बस दुर्घटना में कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव तो ले आए लेकिन सदन के अंदर कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति से कांग्रेश कमजोर स्थिति उजागर हो गई।

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