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माफिया पर गर्माया सदन का माहौल

अवैध रेत और खनन माफिया पर दागे सवालों से सदन का माहौल गुरुवार को गरमाया रहा। नौबत यहां तक आई कि अध्यक्ष को कहना पड़ा ऐसे शब्द ना बोलें जिसे विलोपित करना पड़े। दरअसल विधायक पाचीलाल मेड ने सरकार पर नर्मदा को छलनी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि रॉयल्टी से नहीं बल्कि टोकन से रेत का कारोबार चल रहा है। नर्मदा को छलनी किया जा रहा है।

जेसीबी मशीन लगाकर नर्मदा से रेत निकाली जा रही है। इस पर खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप ने कहा कि इस तरह की कोई शिकायत नहीं। राज्य सरकार कांग्रेस शासन में बनाई गई रेत नीति के आधार पर ही खनन की अनुमति दे रही है।

विधायक ने प्रश्नोत्तर काल के दौरान कहा कि धार जिले के धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र में नर्मदा नदी से अवैध रेत खनन किया जा रहा है। सैकड़ों डंफर और जेसीबी से निकाली जा रही है। इसके लिए एक कमेटी बनाकर जांच कराई जाए। इस पर मंत्री ने कहा कि जो भी रेत निकाली जा रही है वह स्वीकृत खदानों से निकाली जा रही है। विधायक जो आरोप लगा रहे हैं वैसा कुछ नहीं हो रहा है। इस जवाब से असंतुष्ट विधायक विजयलक्ष्मी साधो ने कहा कि नर्मदा में डंफर पर काम कर रहे हैं तो कौन सी गाड़ियां निकाली जा रही हैं रॉयल्टी नहीं काटी जा रही है। टोकन से गाड़ियां निकाली जा रही है।

रॉयल्टी नहीं काटी जा रही है। इसकी शिकायत भी कलेक्टर से कर चुकी हैं और कलेक्टर खरगोन ने माना है कि कुछ चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि डंफर 1 दिन में सिवनी और छिंदवाड़ा एक दिन में आ जा रहे हैं। कैसे संभव सकता है इस पर भी मंत्री ने कहा कि वे इस मामले में कलेक्टर से बात करेंगे। इस दौरान विधायक पीसी शर्मा ने नर्मदा में जेसीबी मशीन से खनन का मामला उठाते हुए कहा कि सरकार की रेत नीति के आधार पर काम हो रहा है। कुल मिलाकर इस मुद्दे पर जब गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और पूर्व मंत्री लाखन सिंह के बीच अमर्यादित टीका टिप्पणी होने लगी तब विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने न केवल कार्रवाई से विलोपित कराया बल्कि अन्य सभी सदस्यों को भी उन्होंने सचेत किया। सदन के अंदर ऐसे शब्दों का कोई प्रयोग ना करें कि उन्हें विलोपित करना पड़े।

गुरुवार को ग्वालियर में अवैध रेत खनन का मामला भी उठा साथ ही विदिशा में 4000 टन गेहूं पानी में भीगा खरीदने पर भी विधायक शशांक भार्गव ने मामला उठाया। चौकाने वाली बात रही सरकार कि लॉकडाउन के दौरान जो कमाई शराब से हुई वह पेट्रोल डीजल से नहीं हुई। जाहिर है ऐसा कोई सत्र नहीं रहता जिसमें अवेध उत्खनन का मामला उठाया जाता हो बस अंतर इतना रहता है कि कभी भाजपा उठाती है और कभी कांग्रेस जो भी दल विपक्ष में रहता है उसके लिए यह मामला सरकार को घेरने के लिए हथियार के रूप में उपयोग होता है।

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