मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर माथापच्ची चरम पर

दरअसल प्रदेश में चौथी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद शिवराज सिंह चौहान को चौतरफा से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ जहां कोरोना महामारी पूरे प्रदेश में पैर पसार रही है और सत्ता गंवाने के बाद प्रतिशोध की ज्वाला में जल रही कांग्रेस आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

ऐसे में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव भी शिवराज सिंह चौहान के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। यही कारण है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर वे फूंक-फूंक पर कदम रख रहे हैं। पहले दौर में जहां अधिकांश अपने समर्थकों को मंत्रिमंडल में शामिल न करके असंतुष्ट विधायकों को शपथ दिलाना चाह रहे थे

लेकिन उनके अपने समर्थक इस बात के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने चौतरफा से मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए दबाव बनाना शुरू किया। इसी कारण मंत्रिमंडल का विस्तार लगातार टाला जाता रहा है। बहरहाल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय नेताओं से चर्चा करके मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। रविवार को उन्होंने भाजपा कार्यालय पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत से एकांत में चर्चा की। इस दौरान नए सिरे से मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले विधायकों के नामों पर विचार किया गया जिसमें वर्तमान परिस्थितियों और 24 विधानसभा सीटों पर होने जा रहे हैं।

उप चुनाव को लेकर ऐसे नामों पर सहमति बनाई जा रही है जो चुनाव जिताऊ क्षमता रखते हो, अनुभवी हो और जिनकी दमखम का लोहा विपक्षी दल कांग्रेस भी मानती हो। मंत्रिमंडल विस्तार में संगठन और संघ की पसंद को वरीयता दिए जाने का अनुमान है। जिन नामों पर मुख्यमंत्री और संगठन के बीच सहमति बनी है उन नामों पर केंद्रीय नेतृत्व की मोहर लगवाने के लिए मुख्यमंत्री चौहान या तो दिल्ली जाएंगे या फिर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सहमति प्राप्त करेंगे।

चौहान 4 दिन पहले राज्यपाल से मिलकर इस संबंध में चर्चा कर ही चुके हैं क्योंकि ग्वालियर-चंबल इलाके की लगभग 17 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इस कारण केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की राय मंत्रिमंडल विस्तार में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सिंधिया समर्थक दो मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट पहले ही शामिल किए जा चुके हैं और अभी लगभग 8 समर्थकों के और मंत्री बनाए जाने की संभावना है।

कुल मिलाकर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कवायद तेज हो गई है मुख्यमंत्री चौहान भाजपा नेताओं से चर्चा करके ऐसा मंत्रिमंडल गठन करने के प्रयास में है जिसके बाद असंतोष ना भड़के क्योंकि विपक्षी दल कांग्रेस भाजपा की तर्ज पर ही सरकार गिराने की धमकी दे रही है। सोशल मीडिया पर कमलनाथ समर्थक 15 अगस्त को मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ के झंडा फहराने की चर्चा कर रहे हैं और भाजपा के वरिष्ठ विधायक पहली बार खुलकर मंत्री बनने की बात कर रहे हैं। पिछले दिनों भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला ने मुख्यमंत्री चौहान से मुलाकात करने के बाद स्पष्ट रूप से कहा कि वे 100% मंत्री बनने जा रहे हैं। भाजपा में इसके पहले यही कहा जाता था कि मुख्यमंत्री और संगठन जो भी तय करेगा वह हमें स्वीकार होगा लेकिन प्रदेश में बदली हुई राजनीतिक भाजपा विधायक स्वर भी बदले हुए हैं और किसी भी कीमत पर मंत्री बनने होड़ भी चल रही है।

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