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स्नेहभोज के बहाने, प्यार से पहरेदारी

आखिरकार लंबे इतंज़ार के बाद राज्यसभा की तीन सीटों पर 19 तारीख को मतदान होना तय हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लगभग सभी विधायक भोपाल में डेरा डाल चुके हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता क्रॉस वोटिंग न हो इसलिए अपने अपने दलों के सदस्यों से स्नेह भोजन पानी के बहाने मेल मिलाप कर उन्हें समझाइश देने में जुट गए हैं।

दोनों प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने बुधवार को एकत्र कर जहां एकमत होने के संकेत दिया तो विधायकों को समझाइश भी.इस सब बुलाने,मिलने,सीख और नसीहत के बीच उनकी प्यार से पहरेदारी की भी व्यवस्था कर दी गई.दोनों दलों ने कुछ ऐसी व्यवस्था की है जिससे उनके सभी विधायक अपना शक्ति प्रदर्शन करते हुए सामूहिक तौर पर लक्सरी बसों से वोटिंग करने विधानसभा पहुंचेंगे।

राज्यसभा की वोटिंग होने से ठीक पहले भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के दूसरे नंबर के उम्मीदवार फूलसिंह बरैया को बलि का बकरा बोलने लगे तो कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता ने फट से पलटवार कर 22 बागी विधायकों को बलि का बकरा बता दिया. इस बात को लेकर अब भाजपा और कांग्रेस दोनों आमने सामने हैं.भाजपा और कांग्रेस दोनों की नज़र राज्यसभा सीट के साथ 24 विधानसभा सीटों पर है.भाजपा नेता दो सीटों पर जीत सुनिश्चित मानकर अति उत्साह में कांग्रेस के दूसरे नंबर के प्रत्याशी फूलसिंह बरैया की आड़ में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को सामंती बताकर कांग्रेस पर बहुजन वर्ग को अपमानित करने का मामला उठा दिया तो इस मामले में कांग्रेस बैकफुट पर दिखी. हालांकि लगातार भाजपा में हो रहे पोस्टर वार में सिंधिया की फ़ोटो छपने का मामला कांग्रेस ने लपक भाजपा और सिंधिया समर्थक 22 बागियों को घेरे में ले लिया.अब बलि का बकरा कौन ये सवाल बड़ा है।

कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह के पक्ष में 54 जिन विधायकों को सूचीबद्ध किया गया और बचे 38 और कांग्रेस की माने तो जिन दो निर्दलीय विधायकों को जिस दूसरे उम्मीदवार फूलसिंह बरैया को मतदान करना है उनके लिए वाहन की व्यवस्था पार्टी से करवाई जाएगी और इसी व्यवस्था से सभी विधायक अपने निजी वाहन के स्थान पर बसों से वोट करने पहुंचेंगे.एक बार ओवर कॉन्फिडेन्स में धोखा खाकर 22 विधायक खो चुकी कांग्रेस अब हर विधायक को साधने का काम कर रही है.आज कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक,पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति, सुरेश पचौरी, रामनिवास रावत, अजय सिंह, डॉ गोविन्द सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में दो तीन विधायकों को छोड़कर लगभग सभी विधायक मौजूद रहे।

कुणाल चौधरी कोरोना संक्रमण के चलते नहीं पहुंच सके.कांग्रेस विधायकों का बुधवार को मॉकपोल भी हुआ.जानकारी के अनुसार इधर भाजपा के आज स्नेह भोज के बाद विधायक दल की एक मीटिंग दिल्ली से नियुक्त हुए पर्यवेक्षक प्रकाश जावड़ेकर,पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीजे पांडा और प्रदेश प्रभारी विनय सहत्रबुद्धे के निर्देशन में 18 जून की शाम को पार्टी कार्यालय में विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक होगी और यहाँ राज्यसभा चुनाव को लेकर विधायकों को जहाँ समझाइश दी जायेगी वहीँ मॉकपोल भी होगा. भाजपा ने सभी सीनियर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे अपने क्षेत्र के विधायकों के सतत संपर्क में रहें.वर्तमान में भाजपा के पास 107 विधायक हैं.इसके अलावा 4 निर्दलीय,2 बसपा और एक सपा विधायक हैं.भाजपा के उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह हैं.भाजपा के पास दोनों सीटों के लिए पूर्ण बहुमत है इसलिए भाजपा चुनाव को लेकर निश्चिन्त है बस चिंता सिर्फ इस बात की है कि क्रॉस वोटिंग न हो इसलिए कसावट की जा रही है।

बसपा विधायक बोले जहां दम वहां हम..
दिनभर चले भोजन और मॉकपोल के दौर के बाद शाम को बसपा विधायक रमाबाई भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ नज़र आईं और सार्वजनिक बयान दिया कि जहां दम वहां हम.जानकारी के मुताबिक कांग्रेस अपनी बैठक और भोज में शामिल होने बसपा,सपा और निर्दलीय विधायकों को आमंत्रण दिया था पर वो नहीं पहुंचे और देर शाम भाजपा के खेमे में नज़र आए.हालांकि कांग्रेस इसको लेकर ज्यादा चिंतित नहीँ है क्योंकि निर्दलीय सहित 7 विधायकों के वोटों के बाद भी कांग्रेस एक ही सीट पर काबिज हो पाएगी.राज्यसभा चुनाव के लिए अभी कल का समय बाकी और भाजपा जहां कांग्रेस के खेमे पर निगाहें गड़ाए है तो वहीं कांग्रेस भाजपा के अंदरखाने चल रही सुगबुगाहटों पर ध्यान केंद्रित किए है.राज्यसभा का रिजल्ट तो लगभग सभी को मालूम है पर भाजपा के गणित इस बहाने कांग्रेस को और कमजोर करने का है तभी तो भाजपा के नेता कांग्रेसी विधायकों से संपर्क साधकर येन केन तरीके से कांग्रेस में विस्फोट कराने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

19 तरीख को परिदृश्य क्या होगा ये तो वोटिंग होने पर ही पता चलेगा पर दोनों दलों के विधायक भी बहुत सोच विचार कर अपने कांग्रेसी या भजपाई मित्रों से बातचीत कर रहे हैं तो उनके वरिष्ठ नेता उनकी प्यार से पहरेदारी. निर्दलीय विधायक भी समय के साथ अपना पाला बदलने लगे हैं क्योंकि कांग्रेस से ज्यादा उन्हें अपने निज हित भाजपा में नज़र आ रहे हैं.जिन दो निर्दलीय विधायकों के वोट का दावा कांग्रेस कर रही है उनमें से एक बुधवार को ही भाजपा के स्नेह भोज आयोजन का हिस्सा बने थे.बात कुछ भी पर भाजपा का पास राज्यसभा के लिए पूरा मेंडेट है और भाजपा के वरिष्ठ सिर्फ आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी लाइन और बढ़ाकर कांग्रेस की लाइन कट करने की रणनीति बनाने में लगे हैं.अब उनका राज्यसभा की आड़ में विधानसभा का मिशन कितना सफल होता है ये 19 जून को ही पता चलेगा।

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