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उत्प्रेरक ब्रह्म समाज ही उत्प्रेरित हुआ

सदियों से ब्राह्मण समाज उत्प्रेरक का कार्य करता रहा है खासकर सभी को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा सभी के सुख दुख में भागीदार बनना सबको साथ लेकर चलना बदले में ब्राह्मण भिक्षा भी मिली और सम्मान भी मिला लेकिन धीरे धीरे राजनीति समाज में प्रवेश की और समाजों में जातीय शक्ति प्रदर्शन त्योहारों पर और महापुरुषों की जयंती पर होने लगे और इसी आधार पर राजनैतिक मूल्यांकन भी होने लगा लगातार उपेक्षा से दुखी और अन्य समाजों से प्रदर्शन की प्रेरणा लेकर अब ब्राह्मण समाज भी अपने अस्तित्व का भान कराने बेताब है। सदियों से ब्राह्मण समाज उत्प्रेरक का कार्य करता रहा है खासकर सभी को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा सभी के सुख दुख में भागीदार बनना सबको साथ लेकर चलना बदले में ब्राह्मण समाज को भिक्षा भी मिली और सम्मान भी मिला लेकिन धीरे धीरे राजनीति समाज में प्रवेश की और समाजों में जातीय शक्ति प्रदर्शन त्योहारों पर और महापुरुषों की जयंती पर होने लगे और इसी आधार पर राजनैतिक मूल्यांकन भी होने लगा लगातार उपेक्षा से दुखी और अन्य समाजों से प्रदर्शन की प्रेरणा लेकर अब ब्राह्मण समाज भी अपने अस्तित्व का भान कराने बेताब है।

दरअसल मानव जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक खासकर हिंदू समाज में जो भी परंपरा में संस्कार है उनको करने के लिए ब्राह्मण हमेशा साथ रहा और आज भी उसी शिद्दत के साथ सर्व शुभ का भाव समाज के लिए लिए हुए हैं लेकिन जिस तरह से विभिन्न समाजों ने शक्ति प्रदर्शन का चलन प्रारंभ किया और उसके आधार पर राजनीतिक सौदेबाजी शुरू की उसके कारण अब शायद ही कोई समाज बचाओ जो शक्ति प्रदर्शन का कोई अवसर छोड़ता हो और शक्ति के आधार पर राजनैतिक सौदेबाजी ना करता हो राजनीतिक दल भी टिकट वितरण के समय विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में समाज की गिनती करते हैं और उसी के आधार पर निर्णय लेते हैं इसी का कारण था कि कभी देश में अधिकांश महत्वपूर्ण पदों पर ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि हुआ करते थे आज यह संख्या धीरे-धीरे सिमटती जा रही है। इसके लिए जितनी राजनीति दोषी है उतना ही समाज के वे लोग भी दोषी है जो परंपरा और संस्कारों को भूलकर उसी धारा में बह गए जिसको ठीक करने के लिए अब तक समाज तप और साधना करता रहा है।

बहरहाल आज परशुराम जयंती पर पूरे देश में ब्राह्मण समाज कार्यक्रम आयोजित कर रहा है इसके लिए जगह-जगह पिछले कुछ दिनों से तैयारियां चल रही हैं राजधानी भोपाल में भगवान परशुराम की मूर्ति का अनावरण भी किया जाएगा और जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी विशेष रूप से शामिल हो रहे हैं इसी तरह प्रदेश के बीच विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम जिसमें रैली शोभायात्रा जैसे कार्यक्रम होने जा रहे जिसमें सर्व ब्राह्मण समाज शामिल हो रहा हैंI

भले ही अन्य समाजों की तरह ब्राह्मण समाज भी परशुराम जयंती के बहाने अपनी एकता और उत्साह दिखाने जा रहा हो लेकिन समाज को यह बात अच्छी तरह से गांठ बांध लेनी चाहिए कि ब्राह्मण समाज की ताकत इस तरह से प्रदर्शनों में नहीं बल्कि परंपरागत रूप से तप और साधना संस्कारों में ही निहित है और समाज की प्रतिष्ठा सर्व समाज को दिशा देने सर्व शुभ का भाव रखने और सहिष्णुता बनाए रखने में है भले ही राजनीतिक रूप से दक्षता और क्षमता के अनुसार समाज के लोगों को अवसर ना मिला हो लेकिन सभी दल और राजनीतिज्ञ समाज की ताकत से परिचित हैं।

कुल मिलाकर राजनीति भले ही धर्म और जातियों के आधार पर मूल्यांकन करें लेकिन ब्राह्मण समाज को सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की भावना को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना चाहिए और एक बार फिर सर्व समाज को प्रेरित करने का कार्य करें जिससे समाज राष्ट्र मजबूत हो सके।

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