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‘गलाकाट’ प्रचलन: साम्प्रदायिक व धार्मिक उन्माद के पीछे कौन…?

भोपाल। भारत में पिछले कुछ महिनों से हर कहीं से धार्मिक व साम्प्रदायिक उन्माद की खबरें आ रही है और यह उन्माद ‘गलाकाट’ की सीमा तक पहुंच गया है, आखिर देश में ऐसा आत्मघाती माहौल क्यों बन रहा है और इस उन्माद के पीछे कौन सी विघटनकारी ताकतें है? आज देश का हर शांतिप्रिय नागरिक यह जानने को बैचेन है और केन्द्र तथा राज्यों की सरकार न अब तक न इन्हें रोकने की कोशिशें की और न ही इस माहौल के दोषियों को खाजकर उन्हें दण्डित करने का प्रयास ही किया? इन घटनाओं को लेकर पूरे देश में दहशत का माहौल है, हर शख्स अपने आपको असुरक्षित समझने लगा है, इस हिंसक साम्प्रदायिक माहौल के लिए कतिपय देशद्रोही तत्वों का हाथ है, जो ऐसा माहौल पैदा कर अपनी स्वार्थ सिद्धी चाहते है।

यह उन्माद देश के हिन्दू तथा मुसलमान दोनों ही तबकों के दिल-दिमाग में एक अजीब भय व बदले की भावना पैदा कर रहा है और इसके लिए कभी भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को दोषी ठहराया जाता है तो कभी कनाड़ा के आगाखान संग्रहालय में प्रदर्शित हिन्दूओं की आराध्या माँ काली के उस पोस्टर को जिसमें माँ काली को माँस खाते हुए दिखाया गया है, इसी पोस्टर के आधार पर पश्चिम बंगाल की तृणमूल सांसद महुआ मोईया ने आपत्तीजनक बयान दिया, जिससे पूरे देश में खलबली मच गई, यद्यपि कनाड़ा के उक्त आगाखान संग्रहालय ने उक्त विवादित पोस्टर हटाकर भारत के हिन्दू वर्ग से माफी मांग ली, किंतु कनाड़ा की फिल्म निर्माता लीना मिणामेकलाई का क्या, जिसने इसी पोस्टर को प्रमुखता के साथ अपनी फिल्म ‘काली’ में दिखाया है।

अब देश में अनेक स्थानों पर तृणमूल सांसद महुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है, जिसमें भोपाल भी शामिल है, किंतु इतना सब होने के बाद भी महुआ जी न तो खेद व्यक्त करने को तैयार है और न अपना बयान वयान वापस लेने को, वे अपने बयान पर अभी भी कायम है।

यह तो हुआ ताजा मामले का जिक्र। इसके पहले भी नूपुर शर्मा के मोहम्मद पैगम्बर साहब के खिलाफ दिए गए बयान ने पूरे देश में जबरदस्त साम्प्रदायिक माहौल पैदा किया, जिसके फलस्वरूप उदयपुर (राजस्थान) तथा अन्य स्थानों पर ‘गलाकाट’ घटनाएं हुई, स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने भी नूपुर शर्मा के खिलाफ काफी सख्त टिप्पणियां की, जिसकी देश के 15 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों तथा 77 नौकरशाहों ने तीखी आलोचना कर सर्वोच्च न्यायालय को आरोपों के कटघरें में खड़े करने का प्रयास किया सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा को देश में साम्प्रदायिक माहौल खराब करने का दोषी ठकराया था।

….और अब सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि देश में भयावह साम्प्रदायिक माहौल तैयार करने के प्रयासों में दोनों वर्गों के कुछ लोग जुटै है और हिन्दू देवी देवताओं को इसका माध्यम बनाया जा रहा है। इस डरावने माहौल में सबसे अधिक भय व चिंता की बात यह है कि जिस केन्द्र व राज्यों की सरकारों पर इस माहौल पर नियंत्रण लगाने का दायित्व है, उन्होंने चुप्पी साध रखी है, वे न दोषियों को दण्डित करने का प्रयास कर रही है और न इस माहौल को रोकने की।

शायद इन सरकारों का इसके पीछे उद्देश्य यह है कि पूरा देश इस माहौल से जूझता रहे और सरकारों की कमियों, भ्रष्टाचारों या अन्य राजनीतिक कृत्यों की ओर ध्यान देने की आम जनता को फुरसत न मिले? किंतु इस माहौल से देश की शांति व सुरक्षा के लिए कितना खतरा पैदा हो रहा है, इसकी चिंता न सरकारों को है और न ही देश के राजनीतिक कर्णधारों को? ऐसे में इस देश का भविष्य क्या होगा? नई युवा पीढ़ी कौन सा पाठ पढ़ेगी? इसकी चिंता देशवासियों को छोड़ किसी को भी नहीं है?

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