भाजपा के लिए बड़ी चुनौती कौन ‘कांग्रेस या कोरोना’

शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलों के साथ राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियां भी तेज होने का मतलब उपचुनाव पर फोकस बन चुका है ..लॉक डाउन के चौथे चरण के खत्म होने का इंतजार ना करते हुए।

जिस तरह आम आदमी को नए सिरे से सुविधाएं दी जा रही.. संदेश साफ कोरोना से डरो नहीं सतर्क रहकर उसके संग जिंदगी जियो ..यानी माहौल सामान्य करने की कोशिश जिससे धीरे-धीरे ही सही सब काम पर लौटे ..इन कोशिशों के बीच सियासी गतिविधियां भी परवान चढ़ने लगी है ..राजनीतिक अस्थिरता खत्म हो इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जल्द मंत्रिमंडल के संकेत एक बार फिर दिए। तो दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव का भी माहौल बनने लगा है ..तो सवाल क्या 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए जब भाजपा और कांग्रेस ने कमर कस ली… तो क्या यह चुनाव इस बदलते माहौल में समय पर होंगे… वह भी तब जब कोरोना तेजी से पैर पसार रहा।

आंकड़े चिंता बढ़ाते हो यह बताते समस्या आने वाले दिनों में और विकराल हो सकती है ..ऐसे में जब शिवराज और उनकी सरकार के लिए कोरोना की चुनौती बढ़ती जा रही है.. आखिर भाजपा के लिए विधानसभा के उपचुनाव कितने मुफीद होंगे ..जिस भाजपा और शिवराज को कांग्रेस और कमलनाथ के मुकाबले ज्यादा मजबूत और भारी माना जा रहा.. कहीं कोरोना और उसके साइड इफेक्ट भाजपा के अरमानों पर पानी तो नहीं फेर देंगे.. जिस कांग्रेस के पास चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों का टोटा… पर जिसकी नजर भाजपा के नाराज दल बदलू पर बागी नेता और कार्यकर्ता पर है… उस कांग्रेस के पास भले ही कोई बड़ा मुद्दा ना हो जिससे वह चुनाव जीत पाए… ऐसे में कोरोना से यदि माहौल बिगड़ा तो फिर इसका फायदा कांग्रेस जरूर उठाना चाहेगी।

भाजपा के लिए चुनौती कोरोनावायरस के मरीज और संक्रमण का विस्तार ही नहीं है.. बल्कि उसकी परेशानी प्रवासी मजदूर बढ़ा चुके हैं.. लॉक डाउन के दौरान इन मजदूरों का दर्द और गुस्सा जिस तरह देखने को मिला.. उसने दूसरों को भी सोचने को मजबूर किया कि आखिर यह स्थिति क्यों निर्मित हुई कहां किससे. कितनी और क्यों चूक हुई .. आने वाले समय में यदि गांव से लेकर शहर में माहौल बिगड़ा तो उसे सत्तापक्ष से जुड़े होने के नाते चाहे फिर वह मोदी सरकार हो या फिर शिवराज सरकार दोनों के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता ..वह बात और है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते शिवराज ने समय रहते एक साथ कई बड़े फैसले लेकर इन मजदूरों का भरोसा जीतने की कोशिश की है।

तो दूसरी और मध्य प्रदेश के मजदूर और किसानों को भी भरोसे में लेने की कोशिश की.. फिलहाल उपचुनाव अभी दूर की कौड़ी लेकिन कोरोना के लगातार पैर पसारने से भाजपा की समस्या खत्म होती नजर नहीं आ रही.. यह सच है कि कांग्रेस ना मैदान में है और ना ही उसने सरकार में रहते कोरोना नियंत्रण को गंभीरता से लिया.. वह अपनी सरकार बचाने में जुटी रही.. लेकिन यह भी कड़वा सच है कि शिवराज सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद कोरोना भले ही अभी तक आउट ऑफ कंट्रोल ना हुआ हो लेकिन सब कुछ कंट्रोल में और बेहतर यह कहना भी जल्दबाजी होगी.. सरकार में रहते भाजपा पहले से ज्यादा मजबूत जिसने कमलनाथ सरकार के मुकाबले जनहित में कई बड़े फैसले लिए.. जिसका आर्थिक लाभ जरूरतमंदों को दिए जाने की कोशिश जारी है… तो उसके पास संगठन का प्रभावी नेटवर्क और चुनाव जिताने का माद्दा रखने वाली शिवराज के साथ महाराज की जोड़ी भी बन चुकी है।

तो सवाल कॉन्ग्रेस क्या भाजपा और शिवराज ही नहीं मोदी सरकार के खिलाफ बिगड़ते माहौल का फायदा उठाकर उप चुनाव जीतना चाहती.. जिसके नेता तख्तापलट से गिर चुकी सरकार के सदमे से अभी बाहर नहीं निकल पाए हैं.. तो कांग्रेस के अंदर भी एकजुटता बड़ा सिरदर्द साबित हो रही है.. वह बात और है कि कमलनाथ सारे अनुभवों को दांव पर लगाकर नए सिरे से इसे अंतिम मौका मानकर सभी को साथ लेकर चुनाव में जाने की कवायद में जुट चुके हैं ..ऐसे में बड़ा सवाल भाजपा का पडला उपचुनाव में यदि अभी भारी माना जाए तो भी उसके लिए बड़ी चुनौती कौन साबित होगी कांग्रेस जो बिल्ली के भाग से छींका टूटने की कहावत को चरितार्थ देखना चाहती या फिर कोरोना.. जो आने वाले समय में ना जाने क्या गुल खिलाएगा कोई नहीं जानता।

सवाल कांग्रेस की हार सुनिश्चित करने के लिए क्या भाजपा और शिवराज कोरोना को हरा पाएंगे ..तो क्या उपचुनाव से पहले मध्य प्रदेश कोरोना मुक्त हो जाएगा.. या फिर बिगड़ते हालात पर नियंत्रण और मृत्यु दर में कमी लाकर तमाम नुकसान के बावजूद हालात काबू में बनाए रखने का श्रेय शिवराज और उनकी सरकार को जाएगा.. जिसका फायदा उन्हें उपचुनाव में मिल सकता तो सवाल क्या जिन 24 विधानसभा सीटों पर चुनाव को आज नहीं तो कल हरी झंडी मिलेगी ..क्या जरूरतमंद असहाय गरीब बेसहारा लोगों के हक में शिवराज के फैसले उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप जमीन पर सही उतर रहे हैं या फिर हकीकत कुछ और है।

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