जिनके स्वंय के महल ध्वस्त हुए, वे अपनों की जमीदारी बचा पाएंगे? - Naya India
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जिनके स्वंय के महल ध्वस्त हुए, वे अपनों की जमीदारी बचा पाएंगे?

मध्यप्रदेश की सियासी राजनीति इसी सिद्धांतों में चलती आई है। पंरतु जो अपना महल नही बचा पाये वे अपने जमीदारों की जमीदारी कैसे बचा पाएंगे। हम बात कर रहे मध्यप्रदेश की राजनीति में महाराज के नाम से ख्यातिप्राप्त राजनेता ज्योतिरात्दिया सिंधिया की जो स्वंय ही अपने संसदीय क्षेत्र से अपने सिपाहीदार दरबार केपी यादव से लोकसभा चुनाव हार गये। जैसा की राजा महाराजाओं की तासीर रही है कि इन्हे अपनी हार जल्द स्वीकार नही होती है और हुया भी ऐसा कुछ।

कांग्रेस की दिग्गज नेता रहे ज्योतिरात्दिया सिंधिया अपने 22 जमीदारों अर्थात् अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा से संधि कर ली, इस संधि का विशेष कारण तो सिर्फ सिंधिया तथा भाजपा आलाकमान ही जानती है। लेकिन बात करे इन 22 जमीदारों की तो ये कि इनकी जमीदारी सिंधिया या भाजपा वापस दिला पायेगी। ये वही भाजपा है जो विधानसभा चुनाव 2018 में यहीं 22 सीट हारी, यही वो सिंधिया है जो लोकसभा चुनाव 2019 में हारे , इनके संसदीय क्षेत्र की वो तीन सीट जिनके जमीदारों ने आज भाजपा का दामन थाम लिया है उनसे से सिंधिया के खास या यह कहे मिशन लोटस में सेनापति रहे म.प्र. सरकार के पूर्व मंत्री महैन्द्र सिंह सिसौदिया जिनकी विधानसभा क्षेत्र बामोरी से लोकसभा चुनाव 2019 में सिंधिया करीब 10,715 वोटो से हारे, दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य यह कि विधानसभा चुनाव 2018 में बमोरी विधानसभा से महैन्द्र सिंह सिसौदिया भाजपा से बागी कन्हैयालाल अग्रवाल के कारण त्रिकोणीय मुकाबले में करीब 27,920 वोटो से जीते।

वही बाते करे विधानसभा सीट अशोकनगर की तो विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस उम्मीदवार जज्जपाल सिंह जज्जी 9,730 वोटो से जीते, लेकिन लोकसभा चुनाव में सिंधिया इस सीट से करीब 21,770 वोटो से हारे। यही हालात मुगंावली विधानसभा क्षेत्र के रहे यहॉ सबसे रोचक तथ्य यह रहा की जिस जमीदार को सिंधिया ने विधानसभा चुनाव के पहले हुए उपचुनाव में पूरी ताकत से जिताया और विधानसभा चुनाव 2018 में बृजेन्द्र सिंह यादव करीब 2,136 वोटो से जीते लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 में सिंधिया इस सीट से 17,101 वोटो से हारें। हालांकि इस हार के कई कारण बताये गए जैसे की मोदी लहर, भाजपा से स्थानीय उम्मीदार का होना, ज्योतिरात्दिया सिंधिया का चुनाव प्रबंधन कमजोर होना इत्यादि इत्यादि। लेकिन बात करे आने वाले उपचुनाव की जो भाजपा और कांग्रेस का भविष्य तो तय करेगा ही लेकिन कहीं न कहीं महाराज एवं उनके 22 जमीदारों का भी भविष्य इस चुनाव पर टिका हुया है।

देखना यह कि जो जमीदार अपने आका यानि की महाराज को अपने क्षेत्र से नही जिता पाएं क्या वे भाजपा उम्मीदवार बनके अपनी जमीदारी वापस पा सकेगें। जहॉ दूसरी और भाजपा में अंर्तकलह उफान पर है, दूसरी ओर स्थानीय जनता इनके प्रति नाराजगी।  ये 22 विधानसभा क्षेत्र किसान बहुल्य क्षेत्र है, भले ही कमलनाथ सरकार की किसान कर्जा माफी योजना से संपूर्ण किसान लांभावित न हुए है लेकिन जितने हुए या होने वाले थे या सरकार बदलने से इस योजना से जो किसान अछूते रह गये वो इन जमीदारों का समर्थन करेगें की नही।

इन विधानसभा क्षेत्रों में कई प्रवासी मजदूर भी है जो इस लॉकडाउन के कारण भारीभरकम जोखिम उठाकर भूखे प्यासे नगंे पैर अपने घरों में पहुॅचे है, क्या मजदूर या उनका परिवार इन महाराज एवं जमीदारों की राजनीति को वोट करेगा ? कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इनका अवागमन का खर्चा उठाकर पहले ही इन मजदूर को अपने पक्ष में ले चुकी हो। आपको विदित हो कि मध्यप्रदेश के अधिकंाश मजदूर महाराष्ट्र एवं गुजरात में कार्य करते है भले ही सरकार ने इनका खर्चा दिया हो लेकिन दोनो ही प्रदेश के कांग्रेस नेताओ ने प्रचारप्रसार करके मजदूर वर्ग को कांग्रेस की ओर कर दिया हैं।

इन जमीदारोें के महाराज यानि की ज्योतिरात्दिया सिंधिया टिवटर के माध्यम से लोगों का घर पहुॅचा रहे है लेकिन जहॉ मजदूरो के पास बैंक अकांउट नही होता वहॉ टिवटर अकाउंट तो दूर की बात है।  भाजपा के भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में इन जमीदारों के समर्थक प्रदेश के अन्य क्षेत्र से आकर भाजपा की सदस्यता ले रहे है। वही आम आदमी कई दिनो से ईपास की आस में बैठा है क्या भाजपा की सदस्यता आमआदमी की मजबूरी से ज्यादा जरुरी है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा की युवा टीम का अंसतोष बढ़ाता ही जा रहा है, इस युवा नेतृत्व को देखते हुए स्थानीय भाजपा नेता अपना भविष्य अंधकार में देख रहे है, पहले ही भाजपा ने अपने स्वच्छ दुध में थोडी सी छाछ यानि की ये 22 कांग्रेस विधायक को मिलाकर खराब कर लिया है, ऐसे में आने वाले उपचुनाव में देखना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा एंव महाराज ज्योतिरात्दिया सिंधिया इस दुध यानि की सरकार को बचा पायेगें।

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