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वाघेला का तीसरा मोर्चा लड़ेगा चुनाव!

अहमदाबाद। कांग्रेस छोड़ने के बाद एक महीने से ज्यादा समय तक चुप रहने के बाद गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने अपनी चुनावी रणनीति का खुलासा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वे जन विकल्प को समर्थन देंगे। उन्होंने कहा कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। जन विकल्प तीसरे मोर्चे की तरह राज्य में विधासनभा का चुनाव लड़ेगा। वाघेला ने कहा कि उनका यह मोर्चा राज्य की सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। गौरतलब है कि गुजरात में दिसंबर में विधानसभा के चुनाव होगा।

प्रदेश के दिग्गज नेता वाघेला ने सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस से दूरी बनाते हुए तीसरे विकल्प के तौर पर उतरने की तैयारी कर रहे जन विकल्प को समर्थन देने का फैसला किया है। इससे पहले 21 जुलाई को अपने 77 वें जन्मदिन पर उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ा और कांग्रेस से नाता तोड़ने का ऐलान किया है।

वाघेला ने मंगलवार को कहा कि वे 21 सितंबर को नवरात्रि के पहले दिन से चुनाव अभियान की शुरुआत अंबाजी से करेंगे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस चुनाव नहीं जीतने वाली है और 20 साल के भाजपा के शासन के प्रति भी लोगों में नाराजगी है। उन्होंने कहा - नया मोर्चा सभी 182 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का प्रयास करेगा। इनका चयन स्थानीय जनता के माध्यम से स्वयंसेवियों की ओर से भेजे गए तीन नामों में से किया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा - जनविकल्प कोई पार्टी नहीं, बल्कि तीसरा मोर्चा होगा, इसके जरिए आप, भाजपा या कांग्रेस के अच्छे प्रत्याशी को भी समर्थन देते हुए अपना प्रत्याशी बताया जा सकता है। इसका कोई एक चुनाव चिन्ह भी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि एक मोर्चे से जुड़े हैं। इससे जुड़े लोगों ने कुछ बिंदुओं पर जनता से सर्वे किया, जिसमें लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री के प्रत्याशी के तौर पर कांग्रेस के अहमद पटेल या मौजूदा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से बेहतर माना है।

वाघेला ने कहा कि जन विकल्प ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल या ओबीसी एकता मंच के अल्पेश ठाकोर से न तो संपर्क किया है न ही उन दोनो ने इससे कोई संपर्क किया है। जन विकल्प जाति आधारित राजनीति का समर्थक नहीं है। यह गैर आरक्षित वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 25 फीसदी आरक्षण देने के लिए विधानसभा और संसद की मदद से कानून बनाने का समर्थक है। यह आरक्षण मौजूदा साढ़े 49 फीसदी के अतिरिक्त होगा। तमिलनाडु में ऐसी व्यवस्था है।

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