कांटैक्ट ट्रेसिंग बंद नहीं होनी चाहिए

दुनिया के देशों का एक बड़ा सबक यह है कि संक्रमण के मामले बहुत बढ़ गए तो कांटैक्ट ट्रेसिंग बंद नहीं करनी चाहिए। जिन देशों ने संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की तलाश बंद कर दी या संक्रमण का स्रोत तलाशना बंद कर दिया उन देशों की हालत लगातार बिगड़ती गई है। ब्राजील से लेकर पेरू तक कई देशों में ऐसा हो रहा है। इतना ही नहीं यूरोप के कई विकसित देशों में भी कहा जा रहा है कि वे कांटैक्ट ट्रेसिंग नहीं कर सकते हैं क्योंकि संक्रमण के मामले बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। लेकिन यह पिंड़ छुड़ाने वाली बात है, जिससे अंततः वायरस का प्रकोप और बढ़ेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ के प्रमुख टेड्रोस ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा है कि यह स्वीकार्य नहीं है कि बहुत से देश कह रहे हैं कि संक्रमण के केसेज बहुत ज्यादा हो गए हैं और इसलिए सबकी कांटैक्ट ट्रेसिंग नहीं हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि साधन संपन्न देशों भी कह रहे हैं कि कांटैक्ट की संख्या ज्यादा हो गई है इसलिए उनको ट्रेस करना मुश्किल है, यह अपने बचाव में दिया गया बहुत बुरा तर्क है। टेड्रोस ने इस मामले में तीन देशों की मिसाल देते हुए कहा कि सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और चीन ने कांटैक्ट ट्रेसिंग की और कोरोना को रोकने में कामयाब हुए। उन्होंने डब्लुएचओ के इमरजेंसी डायरेक्टर डॉक्टर माइकल रेयान की मिसाल दी और कहा कि इबोला वायरस के समय रेयान ने कांगो में खुद कांटैक्ट ट्रेसिंग की थी और इसके लिए वे हेलमेट और बुलेटप्रूफ रक्षा कवच पहन कर गए थे। कुल मिला कर उनका कहना था कि किसी भी कीमत पर कांटैक्ट ट्रेसिंग होनी चाहिए। अगर देशों ने वह नहीं किया तो कोरोना को रोका नहीं जा सकेगा।

टेड्रोस ने किसी का नाम नहीं लिया पर जब उन्होंने साधन संपन्न देशों का नाम लिया तो सबको अंदाजा हो गया कि उनका इशारा ब्रिटेन और अमेरिका की ओर था। ब्रिटेन के जून के पहले हफ्ते में कहा था कि उसने कांटैक्ट ट्रेसिंग का बहुत शानदार सिस्टम बना कर उसे काम पर लगाया है। उसने इसके लिए एक एप भी डेवलप किया पर जैसे जैसे केसेज बढ़े उसने इस एप का इस्तेमाल भी बंद कर दिया और कांटैक्ट ट्रेसिंग धीमी हो गई। खबर है कि ब्रिटेन में बडी संख्या में लोगों को सिर्फ कांटैक्ट ट्रेसिंग के काम के लिए बहाल किया फिर भी यह काम कायदे से नहीं हो पा रहा है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि तमाम अच्छे प्रयासों के बावजूद उनके कार्यकर्ता और मेडिकल पेशेवर कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आए एक चौथाई लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है और इसका नतीजा यह है कि हजारों की संख्या में संभावित कोरोना कैरियर अनजाने में लोगों के बीच वायरस फैला रहे हैं।

अमेरिका में भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने माना है कि बहुत ज्यादा संक्रमित होने से उनके संपर्क में आए लोगों की संख्या भी बहुत ज्यादा हो गई है इसलिए कांटैक्ट ट्रेसिंग मुश्किल हो रही है। पर उन्होंने साथ ही यह भी माना है कि उसके बगैर कोरोना पर काबू नहीं पाया जा सकता है। ब्रिटेन, अमेरिका सहित दुनिया भर के प्रभावित देशों में बड़ी संख्या में नियुक्तियों हो रही हैं और एक बड़ी वर्क फोर्स सिर्फ कांटैक्ट ट्रेसिंग के लिए नियुक्त की जा रही है। पर भारत में ऐसा सुनने को नहीं मिला है कि कांटैक्ट ट्रेसिंग का कोई सिस्टम बना है। सरकार ने आरोग्य सेतु नाम से एक एप जरूर बनाया है और करोड़ों लोगों ने इसे डाउनलोड किया है पर इसकी सफलता की एक भी कहानी पढ़ने, सुनने या देखने को नहीं मिली है, जिससे यह पता चला कि इस एप ने किसी को अलर्ट किया कि उसके आसपास कोई कोरोना संक्रमित है। उलटे विफलता की दर्जनों कहानियां हैं। जिस दफ्तर में या अस्पताल में सारे कर्मचारी यह एप डाउनलोड किए बैठे रहे वहां भी कोरोना का केस आ गया। इस एप ने किसी को अलर्ट किया हो इसकी खबर नहीं मिली है। आक्रामक कांटैक्ट ट्रेसिंग के लिए लोगों की बहाली या कोई सिस्टम बनने की खबर भारत के किसी राज्य से भी नहीं मिली है। उलटे यह खबर जरूर मिली है कि कांटैक्ट के तौर पर लोगों की पहचान हो गई पर उनकी जांच के लिए कोई नहीं पहुंचा। यह भी तब की खबर है, जब केसेज कम थे। अब तो सबको भाग्य के भरोसे छोड़ा गया है।

ब्राजील ने डब्लुएचओ के दिशा-निर्देशों को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई तो वह अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा संक्रमित देश बना है। वहां के राष्ट्रपति बोलसोनारो ने मास्क पहनने से मना कर दिया और कांटैक्ट ट्रेसिंग का भी अभियान नहीं चलाया। नतीजा यह है कि आज वहां हर दिन औसतन 40 हजार मामले आ रहे हैं। ब्राजील में 15 लाख से ज्यादा संक्रमित हो गए हैं और 62 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। भारत को इससे सबक लेना चाहिए और कांटैक्ट ट्रेसिंग का एक अच्छा सिस्टम बनाना चाहिए ताकि संपर्क और स्रोत का पता चल सके।

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