सुनो डब्ल्यूएचओ को

ऐसा फरवरी -मार्च में भी समझ आना था और अब भी संभलने का वक्त है। तब विश्व स्वास्थ्य संगठन याकि डब्ल्यूएचओ का फोकस अमीर देश थे, दो दिन पहले इस संगठन ने भारत, ब्राजिल, रूस को ध्यान में रख कर चेतावनी दी है, दुनिया को डराया है।डब्लुएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडेनम गेब्रेसियस ने चेतावनी दी है कि महामारी अभी लंबे समय तक हमारे बीच रहने वाली है।संक्रमण और इससे मरने वालों की संख्या बढ़ने की दर तेज हो गई है।

विश्व संस्था के मुताबिक, 24 घंटे में संक्रमण के एक लाख छह हजार मामले दर्ज किए गए हैं। यह एक दिन का सबसे बड़ा आंकड़ा है।66 फीसदी मामले अमेरिका, रूस, ब्राजील और भारत में बढ़े। कम और मध्यम आय वाले देशों में अब बढ़तावायरस चिंताजनक है। इसके साथ विशेषज्ञों की यह चेतावनी कि इन देशों में संक्रमितों की वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि ज्यादातर देशों में अभी टेस्टिंग कम है।

सचमुच डब्ल्यूएचओ की इस बात पर तारीफ करनी होगी कि वह पहले दिन से लगातार सभी देशों की सरकारों से कह रहा है कि वायरस का पता लगाने के लिए कराओं टेस्ट, टेस्ट और टेस्ट! टेस्ट (सच्चे, सही लैब, प्रशिक्षित तकनिशियनों से फुर्ती के साथ) करा कर योरोपीय देशों, अमेरिका ने वायरस पर काबू पाया और लोगों में भरोसा बना कि टेस्ट, ट्रेसिंग-रिस्पोंस, इलाज की पुख्ता व्यवस्था बन गई है तो धीरे-धीरे ताला खुले और लोग बाहर निकले, आर्थिकी चले।

ऐसा भारत ने नहीं किया। कहने को भारत ने 20  मई को दुनिया से कहा कि 18 मई के दिन उसने एक लाख टेस्ट किए।21 मई को 103, 532 टेस्ट हुए। दो महिने पहले सौ टेस्ट प्रतिदिन होते थे और साठ दिन के भीतर उस संख्या का एक हजार गुना होना कमाल की बात है। नहीं, कतई नहीं। दुनिया के बाकि देशों दक्षिण कोरिया, इटली, स्पेन, अमेरिका ने रातोरात, कुछ ही दिनों में टेस्ट बढ़ाने का वह रिकार्ड बनाया जिसके आगे भारत की कथित उपलब्धि ऊंट के मुंह में जीरा है। ऐसा भारत की आबादी की संख्या के चलते है। जब आबादी 138 करोड लोगों की है तो लाखों टेस्ट रोजाना जरूरी है। ये टेस्ट सच्चे होने चाहिए। पता नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के मुख्यमंत्रियों, आईसीएमआर या प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों को अभी तक क्यों नहीं समझ में आया कि पहली जरूरत दुनिया की नामी कंपनियों से कोरोना स्पेसिफिक टेस्टींग मशीन, लैब उपकरण, किटस वैसे ही आयात करने चाहिए जैसे दक्षिण कोरिया, जर्मनी आदि देशों से बाकि तमाम देश आयात कर रहे है।

पर भारत ने टेस्टींग का ऐसा ढ़ाचा बनाया और जानकारियां इतनी छुपा कर रखी कि भारत के कुल टेस्टों में पहले दिन से ले कर अब तक कितने प्रतिशत सही, सटीक नतीजे थे, यह वैज्ञानिकों में चर्चा, वैश्विक रिपोर्टों का मुद्दा है। भारत के आंकड़े वैसे ही अविश्वसनीय, शक के दायरे है जैसे आर्थिक आंकड़ों को लेकर धारणा बनी हुई है।

आत्मघाती बात आबादी के अनुपात में टेस्टींग नहीं हो सकता है। कोरोना बीमारी की वैश्विक लिस्ट में भारत इस समय सर्वाधिक प्रभावित देशों में 11 वे नंबर पर है लेकिन पता है आपको कि भारत टेस्टींग में पाकिस्तान से भी पिछड़ा हुआ है और ब्राजिल, ईरान से बहुत पीछे है। भारत ने एक लाख लोगों के पीछे 193 टेस्ट किए तो अमेरिका में एक लाख के पीछे 3,737 टेस्ट व इटली में 5251 टेस्ट होने का आंकड़ा है। शुक्रवार सुबह वैश्विक लिस्ट में दस लाख लोगों के पीछे भारत में सिर्फ 1,989 टेस्ट होने का आंकडा है तो ईरान में 8,895, ब्राजिल में 3,462 का आंकडा है। मतलब पिछड़े-विकासशील देशों की टेस्टीग में भी भारत बहुत पीछे है। विकसित याकि अमीर देशों में रूस ने 53 हजार, अमेरिका ने 41 हजार, स्पेन ने 65  हजार, ब्रिटेन ने 45 हजार, और जर्मनी 43 हजार और यही नहीं तुर्की ने भी 20 हजार टेस्ट प्रति दस लाख लोगों के पीछे किए है जबकि भारत दो हजार टेस्ट का आंक़डा भी नहीं बना पाया है।

इसलिए भारत दुनिया या डब्ल्यूएचओ की टेस्टींग कसौटी में फेल है। तभी भारत में संक्रमण की रियलिटी छुपी हुई है। टेस्ट ज्यादा होंगे तो मरीज अधिक निकलेगें व देश, दुनिया, जनता सब जान सकेंगे कि बीमारी कितनी फैली है और उस अनुपात में कितनी सावधानी, कितने बंदोबस्त हो।

2 thoughts on “सुनो डब्ल्यूएचओ को

  1. अशिक्षा इस महामारी को ओर वीभत्स बनाने में पूर्ण योगदान दे रही है , हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था तो भगवान भरोसे है । ऊपर से तैयारी के नाम पर आपस मे राजनीतिक लाभ हानि के अनुमान लगाना । जनता तो पहले से मूर्ख बन रही है । क्या लिखें इस देश का क्या होगा जहां सत्य को सत्य कहने से डर लगता है ।

  2. Bharat ki samvedhanik sansthan emandari se kaam kar rahi hoti toh abhi tak eske leye jababdeh logo per kanooni karvae shuru ho jana chahiye tha,lekin supreme court sabhi nagrik ka free test karane ka order sarkar ko diya uska aaj tak kya hua pata nahi chal paya hai or nirlajjta se neta or prashasak kutark karte hai jisko chand janta virodhi media bale desh ki kimat per pracharit karate hai or propganda phailate hai.Har burai ka aant nischit hai.

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