वैक्सीन के बावजूद कई सवाल?

वैज्ञानिकों के काबिले तारीफ काम के बावजूद कई सवालों का उत्तर आना बाकि है? पहला तो यही कि वैक्सीन बन तो गई है लेकिन यह कितने महीने असरकारक होगी? फिलहाल संभव नहीं कि वैक्सीन के दो टीके जीवन भर के लिए शरीर को कोरोना वायरस से मुक्ति दिला दे। हिसाब से अंततः यह भी हो जाएगा लेकिन फिलहाल तात्कालिक या छह महिने-साल दो साल की प्रतिरोधक क्षमता बन सकने का अनुमान है। शरीर कितने महिने, कब तक इस वायरस से इम्यून रहेगा, यह जिस तकनीक से लंबी अवधि की गारंटी लिए होगा उसी का वैक्सीन अंतिम समाधान होगा।

सवाल है कि टीका लगा तो उससे मरीज के लक्षण रूकेगें, खत्म होंगे या उससे वायरस का फैलाव रूकेगा? बुजुर्ग लोगों के शरीर का प्रतिरोधक, इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है, तभी ऐसे शरीर में फ्लू वैक्सीन का कम असर होता है। उस नाते फाइज़र/बायोएनटेक और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन के बुजुर्गों पर असरदार होने की खबर सुकूनदायी है लेकिन क्या ऐसा दूसरे वैक्सीन, प्रोटिन आधारित वैक्सीन से भी होगा? वैक्सीन की रिसर्च में कई तरीके आजामाए जा रहे है। उन सबसे अलग-अलग आयु वर्ग में अलग-अलग असर की गुत्थी बननी है जिस पर वैश्विक एक राय आसान काम नहीं है। हिसाब से यह सब विश्व स्वास्थ्य संगठन की देखरेख में होना चाहिए था लेकिन इस महिने तीन वैक्सीन या रूस-चीन की वैक्सीन को ले कर जितनी खबरे बनी क्या किसी में डब्ल्यूएचओ का रोल दिखलाई दिया?

सवाल-समाधान-शंका-जवाब और क्षेत्र व देश विशेष की उपयुक्तता में विश्व स्वास्थ्य संगठन याकि वैश्विक संगठन को ही रोडमैप बनवाना चाहिए था। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप और वैश्विक लीडरशीप की कमी के कारण सन् 2020 की महामारी में दुनिया केवल वैज्ञानिकों के भरोसे समाधान निकालते हुए है। इसलिए वैज्ञानिकों और अमेरिका-योरोप की दवा कंपनियों से ही आगे मालूम होगा कि क्या सही है और क्या गलत? और जीवंत पर्यंत तमाम वायरसों से मुक्त बनाने वाली वैक्सीन बन  सकना संभव है या नहीं?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares