आम आदमी ही मदद भी करे

आम आदमी अपनी लड़ाई लड़े, कोरोना वायरस से संक्रमित होने से बचने और दूसरों को बचाने के लिए घर में बंद रहे और ऊपर से सरकार की मदद भी करे। यह भी सिर्फ भारत में ही हो रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से मदद की अपील की। उन्होंने दिल खोल कर दान करने को कहा और याद दिलाया कि कैसे इस देश में दान की परंपरा रही है और युद्ध के समय महिलाएं अपने जेवर तक दान देती रही हैं। हालांकि मोदीजी की अपील के बाद भी कहीं से किसी महिला के जेवर आदि दान करने की खबर नहीं आई है। पर छोटे छोटे बच्चे अपने गुल्लक के पैसे दान कर रहे हैं, साइकिल खरीदने के लिए इकट्ठा किए गए पैसे लोग दान कर रहे हैं, पेंशन के पैसे निकाल कर बुजुर्ग दान दे रहे हैं। उनके लिए सरकार क्या कर रही है यह किसी को पता नहीं है।

आम आदमी के लिए मदद की जो कुछ भी व्यवस्थाएं होती थीं, वह सरकार ने बंद कर दी है। सांसदों को हर साल अपने क्षेत्र में पांच करोड़ रुपए खर्च करने की अनुमति थी। इससे उस इलाके में लोगों की मदद भी होती थी और काम भी होता था। दो साल के लिए वह पैसा सरकार ने बंद कर दिया और उसका करीब 14 हजार करोड़ रुपए खुद रख लिया है। इसी तरह विधायकों को मिलने वाले हजारों करोड़ रुपए अब सरकारों के पास चले गए हैं। कंपनियों को अपने मुनाफे का दो फीसदी सीएसआर के तौर पर खर्च करना था, उससे भी समाज के हाशिए पर के समूहों को कुछ मदद होती थी तो कोरोना का बहाने सरकार ने वह पैसा भी हथिया लिया है। ध्यान रहे पीएम-केयर्स में किए गए दान को सीएसआर माना जा रहा है। आम आदमी के काम-धंधे बंद हैं, रोजगार छीन रहा है, कंपनियां या तो छंटनी कर रही हैं या वेतन घटा रही हैं और ऐसे में सरकार को आम आदमी से दान चाहिए और ऊपर से यह अपील भी की जा रही है कि उसके यहां अगर कुछ लोग काम करते हैं तो उनका ध्यान रखे। यानी आम आदमी अपने कर्मचारियों को बिना काम के वेतन देता रहे, अपने आसपास के परेशान लोगों की मदद करे, भूखे लोगों को खाना खिलाए, उनका ख्याल रखे, कोई मकान मालिक है तो किराएदारों से किराया न मांगे और इसके बाद भी उसके पास पैसा वगैरह बच जाता है तो उसे प्रधानमंत्री को दान में दे।

यह स्थिति तब है, जब सिर्फ 40 दिन की बंदी हुई है और कोरोना के 33 हजार मरीज हैं। सोचें, अगर बंदी थोड़ी और लंबी चल गई और मरीजों की संख्या लाखों में पहुंच गई तो क्या होगा? देश इससे पहले भी मुश्किलों से जूझता रहा है। आधा दर्जन बड़ी लड़ाइयां हुई हैं और अनेका प्राकृतिक आपदा आ चुके हैं पर कभी ऐसा नहीं हुआ कि आम आदमी की रोजी-रोटी छीनी गई हो, सरकारी कर्मचारियों का वेतन-भत्ता प्रभावित हुआ हो, इतने बड़े पैमाने पर चंदा-दान-कर्ज मांगने की नौबत आई हो। आम लोग स्वेच्छा से मदद करते रहे हैं पर यह भी हकीकत है कि उस समय की सरकारों ने आम आदमी को लूट कर अपना खजाना नहीं भरा होता था।

One thought on “आम आदमी ही मदद भी करे

  1. Govt should controll its unnecessary expenditure. Most of social security schemes are useless. Foe example Gramin Aavas Yojna which was earlier Indira Awash Yojna is totally useless. I know families are taking since three generations . Grand father has taken benefit, then his multiple children have taken benefit and now his grand son has taken again benefi for construction of housing. In my village all those who has got benefit under this scheme have better houses than common or so called above poverty line people. This wastage of money , every one who has produced so many off springs must bear the brunt. Asha , Aagan vaadi all these are useless and feeding corruption only. But this can be seen from villagers point of view

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