क्या भारत में सामुदायिक संक्रमण नहीं? - Naya India
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप| नया इंडिया|

क्या भारत में सामुदायिक संक्रमण नहीं?

भारत में अभी भी माना जा रहा है, प्रचार हो रहा है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं शुरू हुआ है। पर अलग अलग राज्यों से ऐसे कई ट्रेंड मिले हैं, जिनसे लग रहा है कि संक्रमण सामुदायिक हो गया है। जैसे मध्य प्रदेश में ज्यादातर मामलों में संक्रमण के सोर्स का पता नहीं चल पाया है। मुंबई और तेलंगाना में भी ऐसा हुआ है कि लोग संक्रमित हुए हैं और उनके संक्रमण का सोर्स नहीं पता चला है। यानी ऐसा व्यक्ति, जिसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है और न किसी ऐसी हिस्ट्री वाले व्यक्ति के संपर्क में आया है, अगर वह संक्रमित हुआ है तो इसका स्पष्ट मतलब है कि वह कम्युनिटी ट्रांसमिशन का शिकार हुआ है। इस बात को अब जाकर सरकारों ने समझा है और संक्रमण से प्रभावित पूरे इलाके को सील करने की रणनीति अपनाई है। यह काम पहले होना चाहिए था।

असल में भारत में पहले कुछ निश्चित लोगों की ही जांच होती थी। गुरुवार को जाकर आईसीएमआर ने इसमें बदलाव किया और तय किया कि जिस व्यक्ति में इंफ्लुएंजा के लक्षण दिखाई देंगे, उसकी जांच होगी। इससे पहले पांच श्रेणी के लोगों की जांच होती थी। सबसे पहले ऐसे लोग, जो विदेश यात्रा करके आए हों और उनमें कुछ लक्षण दिख रहे हों। दूसरे, ऐसे लोग, जो ऐसे लोगों के संपर्क में आए हों और जिनमें लक्षण दिख रहे हों। तीसरे, ऐसे स्वास्थ्यकर्मी, जिनमें कोई लक्षण दिख रहा हो। चौथे, ऐसे लोग, जिनमें सिवियर एक्यूट रेसिपरेटरी ईलनेस हो यानी सांस लेने में गंभीर बीमारी जैसी बीमारी हो और पांचवें, ऐसे लोग, जिनमें लक्षण नहीं दिख रहे हों, पर जो किसी कंफर्म मरीज के सीधे संपर्क में आया हो। ऐसी श्रेणी बनाने की वजह से भारत में जांच कम हो रहे थे। पर यह भी हो सकता है कि भारत में चूंकि जांच की सुविधा कम जगह पर है इसलिए ऐसी श्रेणी बनाई गई हो ताकि रैपिड टेस्टिंग किट आने तक उनकी जांच चलती रहे।

इसका मतलब है कि जांच बहुत कम हुई हैं इसलिए भी सामुदायिक संक्रमण की बात नकारी जाती रही। पर कम जांच में भी आईसीएमआर ने जो डाटा पेश किया है उसी से सामुदायिक संक्रमण का संकेत मिलता है। भारत में गुरुवार तक हुए सवा लाख से ज्यादा जांच में सिवियर एक्यूट रेसिपरेटरी ईलनेस यानी सारी के 5911 रैंडम टेस्ट हुए थे। इनमें से 104 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। हैरानी और चिंता की बात यह है कि इनमें से हिस्ट्री सिर्फ तीन लोगों की मिली। दो लोगों की ट्रैवल हिस्ट्री है और तीसरा मामला ट्रैवल हिस्ट्री वाले व्यक्ति के संपर्क में आने का है। इसका मतलब है कि सांस की गंभीर बीमारी वाले छह हजार लोगों में से 101 लोग ऐसे मिले, जो बिना किसी हिस्ट्री के हैं और उनको कोरोना संक्रमण यह है। जाहिर है ये लोग किसी न किसी स्तर के सामुदायिक संक्रमण का शिकार हुए हैं। यह आंकड़ा सरकारों की नींद खुलवाने के लिए पर्याप्त होना चाहिए।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
ट्विटर पर मना रहे थे केशव मौर्य