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हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप| नया इंडिया| Drugs gutkha and gambling नशा, गुटखा, और जुआ

नशा, गुटखा, और जुआ

नशे का कारोबार चौतरफा कई तरीकों से फैलता और प्रमोट होता हुआ है। अगर देश के नेता धर्म के कारोबार में शामिल हैं तो देश के फिल्मी सितारे और मशहूर क्रिकेटर भारत महान के लोगों को गुटखा खाने, शराब पीने और जुआ खेलने के लिए प्रेरित करने के कारोबार में लगे हैं। पिछले दिनों एक राष्ट्रवादी फिल्म अभिनेता ने गुटखा का विज्ञापन किया, जिसे लेकर बड़ा विवाद हुआ। बाद में उस अभिनेता ने कहा कि वह अपने प्रशंसकों और देश के लोगों की भावनाओं को समझते हुए उस विज्ञापन से खुद को अलग कर रहा है। उसने सोशल मीडिया में लिखित बयान जारी करके यह बात कही, इसके बावजूद एक महीने से यह विज्ञापन चल रहा है।

इस विज्ञापन में हिंदी फिल्मों के दो और बड़े अभिनेता उनके साथ हैं। यानी तीन लोग एक साथ मिल कर देश के नौजवानों को गुटखा खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी तरह का विवाद पिछले साल एक गुटखे के विज्ञापन को लेकर देश के महानायक के साथ हुआ था और उन्होंने भी बिल्कुल ऐसी ही सफाई दी थी, लेकिन अब आईपीएल के क्रिकेट तमाशे का नया सीजन चल रहा है और उनका भी गुटखे का विज्ञापन बदस्तूर जारी है। इस विज्ञापन में उनके साथ एक और बड़ा सफल अभिनेता शामिल है। जो कुछ अभिनेता, अभिनेत्री गुटखा या तंबाकू का विज्ञापन करने से रह गए हैं वे शराब का विज्ञापन कर रहे हैं।

गुटखा खाओ और शराब पियो के बाद जो कुछ बचता है वह जुआ खेलने में लुटाया जा सकता है। यह नसीहत भारत के बड़े क्रिकेटिंग सितारे देश के नौजवानों को दे रहे हैं।

सोचे, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्कारी हिंदू राष्ट्र में भारत का हर बड़ा क्रिकेटिंग सुपर स्टार देश के युवाओं के अपने संघर्ष और सपने के बारे में बताता है और उनसे कहता है कि वे जुआ खेलें, उसी से उनका सपना पूरा होगा। ऑनलाइन गेमिंग का प्रचार यह कहते हुए किया जाता है कि इसमें वित्तीय जोखिम है और इसकी लत लग सकती है। सोचें, जिस खेल में वित्तीय जोखिम हो और लत लगने का खतरा हो उस खेल का प्रचार क्यों किया जाना चाहिए? दक्षिण भारत के कई सितारों ने गुटखा, तंबाकू, शराब आदि के विज्ञापन से इनकार कर दिया था। खेल के अंतरराष्ट्रीय सितारे तो कोल्ड ड्रिंक्स आदि का भी विज्ञापन नहीं करते हैं लेकिन भारत में खेल और फिल्मों से करोड़ों की कमाई करने वाले सितारों को भी शराब, गुटखा और जुए का विज्ञापन करने में कोई हिचक नहीं है।

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By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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