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हिंदू राजनीति कहां तक जाएगी

साल 2021 हिंदू राजनीति का साल था तो 2022 भी इससे अलग नहीं होगा। पूरे साल राजनीति होगी और हिंदुत्व के वोट उसका केंद्र। कांग्रेस के राहुल गांधी हिंदुत्व और हिंदुत्ववाद की बहस छेड़ कर नया साल मनाने विदेश चले गए हैं लेकिन वहां से लौट कर वे इस बहस को आगे बढ़ाएंगे। कांग्रेस और उसके कुछ बुद्धिजीवी हिंदू और हिंदुत्ववादी की बहस चलाते रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी कॉरिडोर के पहले चरण का लोकार्पण कर दिया है और उस अवसर पर ऐसा भव्य आयोजन हुआ कि देश और दुनिया भर के हिंदुओं की आंखों चौंधिया गईं। उस चमक-दमक के पीछे मंदिर के पास ‘पक्कामहाल’ इलाके का जो विध्वंस हुआ वह छिप गया। कॉरिडोर बनाने के लिए अविमुक्तेश्वर महादेव का मंदिर टूटा, दुर्मुख विनायक का मंदिर टूटा, शंकराचार्य से शास्त्रार्थ करने वाले मंडन मिश्र का घर टूटा, भारत माता मंदिर टूटा, समूची वाल्मिकी बस्ती उजड़ गई, लेकिन कोई बात नहीं है टूटी झोपड़ी, मड़ैया पसंद करने वाले महादेव के मंदिर का भव्य कॉरिडोर तो बन गया, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व करेंगी!

ऐसे और कॉरिडोर आने वाले साल में बनेंगे। हैरानी नहीं होगी अगर 2022 का साल मथुरा का हो। आखिर 2020 अयोध्या का था, जब अदालत के फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त 2020 में भव्य राममंदिर का शिलान्यास किया था। उसके बाद 2021 में काशी कॉरिडोर का लोकार्पण हुआ और अब भाजपा के नेता मथुरा की बात करने लगे हैं। सो, नया साल मथुरा में हिंदू पुनरूत्थान का हो सकता है। साल 2021 का अंत हरिद्वार के धर्म संसद के विवाद के साथ हुआ है। वहां धर्म संसद के नाम पर कुछ साधु-संतों का जमावड़ा हुआ, जिन्होंने देश के मुसलमानों को मार कर खत्म करने का संकल्प किया। ऐसे हिंदू योद्धाओं की तलाश का संकल्प किया गया कि सौ योद्धा मिल कर 20 लाख मुसलमानों को मारें। इस तरह के भड़काऊ और हिंसक भाषण देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

हालांकि महात्मा गांधी को गाली देने वाले कालीचरण महाराज जरूर जेल चले गए हैं। रायपुर में उन्होंने एक कार्यक्रम में महात्मा गांधी के बारे में अपशब्द कहे थे, जिसे लेकर उनके ऊपर मुकदमा दर्ज हुआ था। छत्तीसगढ़ पुलिस ने उनको मध्य प्रदेश के खजुराहो से गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी को लेकर भाजपा के नेता बिगड़े हैं। अनेक नेता खुल कर कालीचरण महाराज के पक्ष में उतर गए हैं और अब एक अन्य धर्मगुरू ने गांधी के बारे में अपशब्द कहा है। गांधी को गालियां यह कह कर दी जा रही हैं कि वे मुस्लिमपरस्त थे और पाकिस्तान के मददगार थे। कहा जा रहा है कि नाथूराम गोडसे ने अच्छा किया, जो उनको गोली मार दी। देश में चल रही हिंदू-मुस्लिम की बहस में गांधी और गोडसे भी पक्ष बना दिए गए हैं। कहीं गोडसे जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं तो कहीं गोडसे मुर्दाबाद के नारे लगाती भीड़ जुलूस निकाल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले पहनावे से दंगाइयों की पहचान करने की सलाह दी थी, इसे आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ने कहा है कि दाढ़ी-टोपी वाले गुंडे उत्तर प्रदेश से भगा दिए गए हैं। इसी बात को देश के गृह मंत्री ने जरा अलग तरह से कहा। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में कोई बाहुबली नहीं दिख रहा है, सिर्फ बजरंग बली दिख रहे हैं। यानी मुसलमानों के बाहुबली बनाम हमारे बजरंग बली का मुकाबला हो गया। पहले अली बनाम बजरंग बली मुकाबला था।

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एक-एक करके सभी भाजपा शासित राज्यों ने लव जिहाद रोकने के मकसद से धर्मांतरण विरोधी कानून बना दिए गए है। खुले में नमाज पढ़ने से रोकने का कानून तो नहीं बना है लेकिन हिंदू संगठनों ने जोर-जबरदस्ती और स्थानीय प्रशासन की मदद से कई राज्यों में मुसलमानों को खुले में नमाज पढ़ने से रोक दिया है या रोकना शुरू कर दिया है। इस बार क्रिसमस इस मायने में खास रहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने टेलीविजन पर आकर देश के लोगों को क्रिसमस की बधाई दी लेकिन देश के कई राज्यों में भाजपा और कुछ हिंदुवादी संगठनों ने क्रिसमस के कार्यक्रमों में बाधा डाली। सैंटा क्लॉज मुर्दाबाद के नारे लगाए। क्रिसमस के दिन तुलसी दिवस मनाने का प्रचार हुआ। सोशल मीडिया में यह सलाह दी गई की हिंदू अपने बच्चों को सैंटा क्लॉज की तरह जोकर बनाने की बजाय राम-कृष्ण बनाएं।

उधर भाजपा शासित राज्यों में स्टैंड अप कॉमेडियंस के कार्यक्रम सफलतापूर्वक रूकवाने का अभियान चल रहा है। पुलिस और प्रशासन की मदद से भाजपा के नेता और हिंदुवादी संगठनों के कार्यकर्ता मुनव्वर फारूकी या कुणाल कामरा जैसे कॉमेडियंस के कार्यक्रम रूकवा रहे हैं। उन्हें हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का विरोधी बताया जा रहा है। नए साल में इस तरह के अनेक स्टैंड अप कॉमेडियम कार्यक्रम नहीं कर पाएंगे। भाजपा की राज्य सरकारों के मंत्रियों, विधायकों,  प्रवक्ताओं आदि ने कई उत्पादों के विज्ञापन और कई धारावाहिकों की शूटिंग इस आधार पर रुकवा दी कि इनसे हिंदू धर्म और संस्कृति खतरे में आती है। सो, तय मानें कि नया साल इससे अलग नहीं होगा। धर्म के नाम पर राजनीति होती रहेगी, भड़काऊ भाषण और मंदिरों के शिलान्यास-लोकार्पण का कार्यक्रम चलता रहेगा, अल्पसंख्यकों को कानूनी तौर पर दोयम दर्जे के नागरिक बनाने का प्रयास चलता रहेगा, कुल मिला कर वोट के मकसद से सामाजिक टकराव बनाए रखा जाएगा।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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