सर्दियां कोरोना के लिए आदर्श

दुनिया के दूसरे देश से अलग भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण जाती हुई सर्दी के समय हुआ। मार्च के आखिरी हफ्ते में जब देश में लॉकडाउन लागू हुआ तब तक गर्मियों का लगभग शुरू  था । उसके बाद कोरोना का प्रसार भारत में गर्मी और बरसाती उमस के मौसम में हुआ। इस मौसम को कोरोना का काल माना जाता है। आमतौर पर वैज्ञानिक मानते हैं कि गर्मी और उमस वाले मौसम में कोरोना पिघल कर खत्म हो जाता है। एक निश्चित सीमा से ज्यादा तापमान वह बरदाश्त नहीं कर सकता है। उसके ऊपर एक प्रोटीन की परत होती है, जो गर्मी से पिघल जाती है तो वह खत्म हो जाता है। इसलिए इसके फैलने का आदर्श समय सर्दियों को माना जाता है।

सो, भारत में अब सर्दियां शुरू होने वाली हैं और भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में कोरोना के फैलने के आदर्श स्थितियां बन गई हैं। अव्वल तो सर्दियों में कोरोना वायरस किसी भी सतह तक लंबे समय तक जीवित रहेगा। दूसरे सर्दियों में लोगों के लिए सामाजिक दूरी का पालन मुश्किल होता है। भारत में वैसे भी आबादी इतनी बड़ी है कि सामाजिक दूरी का ध्यान रखना मुश्किल होता है। फिर भी गर्मियों में लोगों ने इसका पालन किया। गांवों में लोग घरों से बाहर रहे या पेड़ों के नीचे या खेतों में समय बिताया पर सर्दियों में वह संभव नहीं है। हर सार्वजनिक जगह पर सर्दियों में ज्यादा भीड़ जुटेगी। अलाव के आसपास लोग जुटेंगे। गरीब लोग, जहां एक कमरे में पूरा परिवार रहता है, वहां संक्रमण का अंदेशा बढ़ेगा और जिन झुग्गी बस्तियों में अभी कोरोना काबू कर लिए जाने का दावा किया जा रहा है। वहां भी संक्रमण फैल सकता है।

जिस तरह से सर्दियों में सामाजिक दूरी का ध्यान रखना मुश्किल होगा वैसे ही सर्दियों के मौसम में हर 20 मिनट पर हाथ धोते रहना भी लगभग नामुमकिन हो जाएगा। पानी के ज्यादा इस्तेमाल से अलग किस्म की बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। सैनिटाइजर का इस्तेमाल बढ़ सकता है पर कितने लोग हैं, जो लगातार सैनिटाइजर इस्तेमाल कर सकते हैं? सर्दियां शुरू होने से पहले दिल्ली और देश के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि वायु प्रदूषण कोरोना के खतरे को कई गुना बढ़ा देगा। जिन लोगों को सांस लेने में तकलीफ है या सांस से जुड़ी कोई बीमारी है उनके लिए सर्दियों का यह मौसम भयावह होने वाला है। गर्मियों में यह पिघल कर खत्म होता था पर सर्दियों में यह गिर कर पिघलने की बजाय घंटों तक हवा में लटका रहेगा। जिस तरह से वायु प्रदूषण की वजह से एसपीएम हवा में लटके रहते हैं वैसे यह वायरस लटका होगा और हर इंसान के लिए खतरा बनेगा।

कोरोना के बारे में यह आम राय बन गई है कि वह छह फीट की दूरी तक लोगों को संक्रमित कर सकता है। सवाल है कि क्या भारत में लोग इतनी दूरी का पालन कर सकते हैं? ध्यान रहे दुनिया के अनेक अमीर देशों में सर्दियां शुरू होते ही संक्रमण दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से फैल रहा है। फ्रांस में एक दिन में 30 हजार केसेज आ रहे हैं। पेरिस में कर्फ्यू लगानी पड़ी है। जर्मनी और ब्रिटेन अपने यहां नए सिरे लॉकडाउन कर रहे हैं। वैक्सीन बना लेने का दावा करने वाले रूस में एक महीने में केसेज तीन गुना बढ़ने लगे हैं। सर्दियों ने कोरोना को और संक्रामक बना दिया है।

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