ध्यान रहे ओणम मना संक्रमित हुआ केरल

अगस्त के महीने से पहले केरल देश के राज्यों के लिए मॉडल था। देश के सभी राज्यों और केंद्र सरकार के लिए केरल मॉडल था। वहीं केरल अब एक सबक है। वहां जिस तेजी से कोरोना वायरस का संक्रमण फैला है उससे देश भर के राज्यों को सबक लेना चाहिए। अगस्त से पहले तक एक महीने में केरल में पांच हजार केसेज आ रहे थे और वह पहला राज्य था, जहां नए केसेज आने के मुकाबले ठीक होने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा थी। वैसें ही आज पूरे भारत में प्रोपंगेंडा है कि आज एक दिन में जितने नए मरीज आते हैं उससे ज्यादा मरीज ठीक होते हैं। तभी एक्टिव केसेज की संख्या लगातार कम होती जा रही है।

अगस्त आते आते ऐसा लग रहा था कि केरल अब संक्रमण से मुक्त होने जा रहा है। ठीक उसी समय केरल का सबसे लोकप्रिय ओणम त्योहार शुरू हुआ। दस दिन का यह त्योहार 22 अगस्त से शुरू होकर दो सितंबर तक चला। इस त्योहार में पूरा राज्य उत्सव मनाने लगा। दस दिन तक चलने वाला ओणम का त्योहार खत्म हुआ तब पता चला कि कितना बड़ा नुकसान हो गया। सितंबर के बाद अगले डेढ़ महीने में केरल में संक्रमितों की संख्या तीन लाख पहुंच गई है। कहां तो केरल संक्रमण से मुक्त होने वाला था और कहां उस राज्य में एक दिन में 10-10 हजार केसेज आने लगे। पूरे देश में जितने समय में केस दोगुने हो रहे थे उतने समय में केरल में पांच गुना केसेज आने लगे। यह बिना सावधानी के और कोरोना की परवाह किए बगैर त्योहार मनाने का नतीजा था।

अगर सावधानी नहीं बरती गई तो जो केरल में हुआ है वह पूरे देश में होगा। लगभग पूरे देश में दशहरा और दिवाली का त्योहार आने वाला है। दशहरा का दस दिन तक चलने वाला त्योहार आज से शुरू हो गया। पश्चिम बंगाल, बिहार सहित पूरी पूर्वी भारत दस दिन तक इस त्योहार का उत्सव मनाता है। उत्तर भारत में भी पूरे उत्साह के साथ नवरात्रि मनाई जाती है। जम कर खरीदारी होती है और अंत में रावण जलाने का उत्सव होता है। पश्चिम में गुजरात में नवरात्रि के डांडिया उत्सव का पूरे साल इंतजार होता है। नौ दिन पूरी रात डांडिया का डांस चलता है। सुदूर दक्षिण के कर्नाटक के मैसूर का दसरा उत्सव सारी दुनिया में मशहूर है। ध्यान रहे इस समय कर्नाटक कोरोना के संक्रमण से सबसे ज्यादा परेशान है। अगर ऐसे समय में वहां दसहरा उत्सव मनाया जाता है तो क्या होगा? बंगाल, बिहार में दुर्गापूजा, उत्तर और पश्चिमी भारत में नवरात्रि और मैसूर में दसरा का आयोजन पहले की तरह हुआ तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके बाद देश में कोरोना की क्या स्थिति होगी।

दशहरा के तुरंत बाद देश भर में दिवाली की तैयारी शुरू हो जाती है। सरकार चाहती है कि देश के लोग जम कर खरीदारी करें ताकि त्योहारी सीजन की खरीद से अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटे। इसके लिए केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों की एलटीसी के लिए मिलने वाले पैसे को कैश वाउचर में बदला है और उससे खरीद करने के लिए प्रेरित किया है। दस हजार रुपए का ब्याज मुक्त उधार भी कर्मचारियों को दिया गया है। सरकार ने अनलॉक के पांचवें चरण में ही लगभग सारी चीजें खोल दी हैं। यहां तक कि सिनेमा हॉल भी खुल गए हैं। बाजार सज रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि बड़ी खरीद होगी। अगर कोरोना की परवाह किए बगैर लोगों की भीड़ खरीद के लिए पहुंचती है तो कोरोना संक्रमण में कई गुना बढ़ोतरी हो सकती है।

दिवाली के छह दिन बाद बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का लोक पर्व छठ है और उसके नौ दिन बाद गंगा स्नान है। ये दोनों पर्व लोक आस्था से जुड़े हैं और सामूहिकता के पर्व हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग नदी और तालाब के किनारे जुटते हैं। छठ और गंगा स्नान दोनों की सामूहिकता कोरोना संक्रमण के बढ़ने का कारण हो सकती है। ध्यान रहे आबादी के लिहाज से देखें तो यहीं इलाका अभी तक कोरोना वायरस से अछूता दिख रहा है। बिहार, बंगाल, व्यापक रूप से उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों अभी कोरोना का विस्फोट नहीं हुआ है। अगर त्योहारों में सावधानी नहीं बरती गई तो उस विस्फोट को कोई नहीं रोक सकता है।

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