Modi Hai to Mumkin Hai सब कुछ मुमकिन होने की धारणा टूटी
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सब कुछ मुमकिन होने की धारणा टूटी

मोदी की छवि गढ़ने के लिए एक नारा बना था कि मोदी है तो मुमकिन हैयह नारा अब मजाक का विषय है। अब हर निगेटिव चीज को बताने के लिए इस नारे का इस्तेमाल  किया जा रहा है। जैसे पिछले दिनों खबर आई कि गौतम अडानी ने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया और एशिया के सबसे अमीर कारोबारी बन गए, तब भी सोशल मीडिया में यह जुमला चला कि मोदी है तो मुमकिन है। महंगाई बढ़ रही है तो विपक्षी पार्टियों ने नारा बनाया, जो सोशल मीडिया में हिट हुआ कि मोदी है तो महंगाई है। हरी सब्जियों के इस मौसम में टमाटर से लेकर मटर तक कोई सब्जी नहीं है, जो सौ रुपए किलो से ज्यादा कीमत पर नहीं बिक रही है। ऐसा किसी मौसम की मार से नहीं हुआ है, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों की अंधाधुंध बढ़ती कीमत की वजह से माल ढुलाई महंगी होने से है। वह तो अच्छा है कि सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए नहीं तो आने वाले दिनों में ये चीजें लोगों को नसीब नहीं होती। क्योंकि सरकार ने आवश्यक वस्तु कानून भी बदल दिया था, जिससे कारोबारियों को असीमित भंडारण की छूट मिल गई थी।

उधर दूसरी ओर सरकार एक के बाद एक सरकारी संपत्तियों को बेच रही है, जिससे नौकरियों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हवाईअड्डे बनाए या विकसित किए जा रहे हैं और उन्हें एक खास कारोबारी को दिया जा रहा है। निजी ट्रेनों का प्रयोग पूरी तरह से विफल रहा है और सबसे पहले शुरू की गई तीन निजी ट्रेनों की सेवा बंद करनी पड़ी है फिर भी सरकार ट्रेनों और स्टेशनों का निजीकरण कर रही है। निजी कंपनियां, जो स्टेशन ले रही हैं वहां प्लेटफॉर्म टिकट के दाम बढ़ रहे हैं और हवाईअड्डों की तरह यूजर चार्ज लगाए जाने की तैयारी हो रही है। सरकार जो कंपनी नहीं बेच रही है उसकी भी संपत्तियां बेची जा रही हैं। अभी सरकार ने ऐलान किया है कि बीएसएनएल और एमटीएनएल की करीब एक हजार करोड़ रुपए की संपत्ति बेची जाएगी।

भारत की सबसे प्रतिष्ठित महारत्न कंपनियों में से एक भारतीय जीवन बीमा निगम की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी पूरी हो गई है। जल्दी ही इसे सरकार शेयर बाजार में ले जाएगी और 10 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचेगी। कम से कम चार सरकारी बैंकों को बेचने की तैयारी भी हो गई है। पेट्रोलियम कंपनी बीपीसीएल को बेचने के लिए सरकार काफी समय से बेकरार है लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं। एयर इंडिया को औने-पौने दाम में बेच दिया गया है। सो, सरकार के बारे में यह धारणा मजबूत हो रही है कि उससे आर्थिकी नहीं संभल रही है, महंगाई काबू में नहीं आ रही है, रोजगार नहीं पैदा हो रहे हैं और उलटे सरकार सारी पुरानी संपत्तियों को बेच कर काम चला रही है। कृषि कानूनों के मामले में भी यह हल्ला मचा था कि समूचे कृषि क्षेत्र को चुनिंदा कारोबारियों के हाथ में देने के लिए ये कानून बने हैं। इससे प्रधानमंत्री के साथ साथ कुछ चुनिंदा कारोबारियों की छवि भी प्रभावित हो रही थी। तभी उसे बदला गया। सरकार के तमाम प्रचार और सफाइयों के बावजूद यह धारणा मजबूत हो रही है कि वह देश के चुनिंदा कारोबारियों के हितों में काम कर रही है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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