nayaindia Narendra Modi Gujrat मोदी के बनाए गुजरात में है क्या?
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मोदी के बनाए गुजरात में है क्या?

नरेंद्र मोदी का नारा है मैंने गुजरात बनाया! सोचें जरा गुजरात के सृष्टिकर्ता नरेंद्र मोदी के बनाए गुजरात में गुजरातियों के जीवन पर! कैसा जीवन गुजरा है पिछले पांच सालों में? या 27 साला भाजपा राज में? निश्चित ही सत्य है कि गुजरात में अब दंगे नहीं होते। मुस्लिम आबादी खोल में दुबकी हुई है। लेकिन हिंदुओं का ही जीवन क्या है? कोरोना काल में सर्वाधिक लावारिस मौतों का प्रदेश था गुजरात! आम आदमी के मेडिकल और शिक्षा, रोजगार के मामले में सर्वाधिक भूखा गुजरात। अंग्रेजों के बनाए पुल की देख-रेख तक मे नाकाबिल सरकार! बेरोजगारी के प्रतिनिधि चेहरे हार्दिक पटेल से गुजराती यूथ की लाचारगी और खौफ में घुटने टेकने वाले असमर्थ नौजवान!

प्रदेश पूरी तरह से एक नेता की उंगलियों पर नाचने को मजबूर और मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और भाजपा नाम की पूरी पार्टी बेगैरत-बेमतलब। मोदी कहें मैंने बनाया तो सब गर्दन हिलाते हुए जी हुजूर, जी मालिक। न स्वाभिमान, न मान और सम्मान लोकतांत्रिक प्रक्रिया का तो खैर सवाल ही नहीं उठता। पिछले 27 सालों में और खासकर पिछले पांच सालों में गुजरात में क्या हुआ? वहीं हुआ जो नरेंद्र मोदी ने चाहा। और उन्होंने क्या चाहा? मैं तुम्हारा भगवान! और दिल्ली में अपनी तीसरी आंख से गुजरात का राज करते हुए नरेंद्र मोदी! जब चाहा तब मुख्यमंत्री हटाया। जब चाहा पूरे कैबिनेट सहित सीएम की बरखास्तगी। एक भी गुजराती नेता, भाजपा नेता की चूं करने की हिम्मत नहीं!

तभी नरेंद्र मोदी का मानना सौ टका सही है कि मैं हूं गुजरात का मालिक। फिर भले गुजराती अंबानी हो या अडानी या कोई एक्सवाईजेड अरबपति तो सत्ता के सेठ अमित शाह हों या भूपेंद्र पटेल सब के ईश्वर नरेंद्र मोदी ही हैं। इनमें से एक भी गुजराती कहने की जरूत नहीं कर सकता है कि वे नरेंद्र मोदी की कृपा से नहीं हैं, बल्कि अपने बूते हैं!

सचमुच पिछले पांच सालों में बतौर सृष्टिकर्ता नरेंद्र मोदी ने गुजरातियों को जैसे हांका है, दिल्ली से गांधीनगर और प्रदेश का जैसे भाग्य निर्धारित हुआ है उससे यह समझ में आता है कि गोरी-गजनी के असंख्य बार सोमनाथ मंदिर को लूटने की कोर वजह क्या थी? क्यों कर महात्मा गांधी का औजार अंहिसा था? क्यों कर नरेंद्र मोदी की मनोदशा ने उनसे इंडिया गेट पर गांधी व पटेल के बजाय सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगवाई।

मैं भटक रहा हूं। मोदी और गुजरातियों की वैष्णव मनोदशा, समर्पण-भक्ति और सबसे बड़े रुपए की तासीर का मामला या हिंदू गुलामी कालखंड के डीएनए का है। लेकिन मोदी की यह गर्वोक्ति बहुत गहरी है जो नरेंद्र मोदी मानते हैं और गुजराती भी मान रहे हैं कि उन्होंने गुजरात बनाया!

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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