nayaindia regional parties religion and diplomacy क्षेत्रीय पार्टियां कैसे धर्म और कूटनीति को बेचें?
kishori-yojna
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप| नया इंडिया| regional parties religion and diplomacy क्षेत्रीय पार्टियां कैसे धर्म और कूटनीति को बेचें?

क्षेत्रीय पार्टियां कैसे धर्म और कूटनीति को बेचें?

Up election Cycle terrorist

जब नरेंद्र मोदी और भाजपा अगले लोकसभा चुनाव से पहले धर्म और कूटनीति का मुद्दा राजनीतिक लाभ के लिए बेच रहें होंगे तो क्षेत्रीय पार्टियां क्या करेंगी? उनके पास क्या एजेंडा है, जिससे वे भाजपा के प्रचार का जवाब देंगी? क्या वे भी धर्म के क्षेत्र में घुसेंगी? संभव है। कई क्षेत्रीय पार्टियां ऐसी हैं, जिनको धर्म का मुद्दा उठा कर वोट मांगने में दिक्कत नहीं है। ममता बनर्जी ने पिछले विधानसभा चुनाव में चारों तरफ घूम कर चंडीपाठ किया था और भाजपा के जय श्रीराम के नारे के मुकाबले जय मां काली का नारा लगाया था। उनके सामने इसका कोई जोखिम भी नहीं है कि अगर वे धर्म के क्षेत्र में घुसती हैं तो दूसरे धर्म यानी मुसलमानों का वोट बिदक जाएगा। उनके राज्य में भाजपा और तृणमूल के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसलिए अगर वे धार्मिक मुद्दा उठा कर वोट की राजनीति करती हैं तब भी अल्पसंख्यक वोट उनके साथ रहेगा। सो, जहां तक ममता बनर्जी का सवाल है तो वे बांग्ला अस्मिता, बांग्ला भाषा और मां काली के नाम की राजनीति कर सकती हैं और लोग उनके ऊपर भरोसा भी करेंगे।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की स्थिति भी ऐसी है। वे भी बेहद धार्मिक हैं और अक्सर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के ऐतिहासिक मंदिरों में बड़े बड़े दान करते रहे हैं। उत्तर भारत की तरह वहां राममंदिर का माहौल नहीं बनने वाला है। ममता बनर्जी की तरह उनको भी यह सुविधा है कि अल्पसंख्यक मतदाताओं के पास विकल्प नहीं है। ओवैसी की पार्टी सिर्फ हैदराबाद भर की पार्टी है और कांग्रेस को टीआरएस व भाजपा ने मिल कर खत्म कर दिया है। चंद्रशेखर राव तेलंगाना की अस्मिता के प्रतीक हैं और उन्होंने राज्य के किसानों के लिए कई बड़ी लोक लुभावन व उपयोगी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उनको फायदा मिलता है। इसलिए वे भी भाजपा की धर्म की राजनीति का जवाब देने की स्थिति में हैं।

तमिलनाडु में एमके स्टालिन की स्थिति बाकी राज्यों के क्षत्रपों से अलग है। उनको धर्म की राजनीति नहीं करनी है, बल्कि धर्म विरोध की राजनीति करनी है। इस मामले में तमिलनाडु बिल्कुल अलग प्रदेश है। वहां की धार्मिक मान्यताएं अलग हैं और लोग उस तरह के कर्मकांडों या धार्मिक अस्मिता में विश्वास नहीं करते हैं, जैसे उत्तर भारत के राज्यों में लोग करते हैं। अभी तो इस मामले में डीएमके नेता चुप हैं लेकिन करुणानिधि के जीवित रहते पार्टी के नेता अपने को नास्तिक घोषित करने में गर्व महसूस करते थे। वहां तमिल अस्मिता के साथ साथ दलितों, पिछड़ों का आरक्षण, शिक्षा व नौकरी आदि का मुद्दा ज्यादा बड़ा होता है। चूंकि वहां के लोगों में इस्लामोफोबिया का प्रचार वैसा नहीं है, जैसा उत्तर भारत में है इसलिए धर्म का मुद्दा ज्यादा कारगर नहीं होता है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

19 − twelve =

kishori-yojna
kishori-yojna
ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
विशाखापत्तनम होगी आंध्र प्रदेश की राजधानी
विशाखापत्तनम होगी आंध्र प्रदेश की राजधानी