सोशल मीडिया पर टूटता वर्चस्व - Naya India
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप| नया इंडिया|

सोशल मीडिया पर टूटता वर्चस्व

दो चीजें एक साथ हो रही हैं। पहली तो यह कि सोशल मीडिया का जादू टूट रहा है और दूसरी यह कि भाजपा, केंद्र सरकार और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चस्व भी खत्म हो रहा है। सबसे पहले तो मीडिया के साथ साथ सोशल मीडिया का भी जादू टूटना शुरू हुआ। पारंपरिक मीडिया से अलग वैकल्पिक मीडिया स्रोतों से लोगों को सोशल मीडिया की हकीकत मालूम होनी शुरू हुई। फेसबुक से डाटा चोरी होने और चुनावों में उनका इस्तेमाल किए जाने की शुरुआती खबर अमेरिका में हुए 2016 के चुनाव के बारे में आई थी। लेकिन उसके बाद ऐसी खबरें कई जगह से आने लगीं। अमेरिका में मुकदमे हुए और सोशल मीडिया साइट्स चलाने वालों की संसदीय समितियों के आगे पेशी हुई। उनसे सोशल मीडिया पर मोनोपोली खत्म करने को कहा गया।

इसके साथ ही सोशल मीडिया यानी फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि की डाटा सुरक्षा और उनकी निजता की नीति को लेकर भारत में भी बहस होने लगी। लोग आशंकित हुए क्योंकि साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं और लोगों को यह पता चल रहा है कि सोशल मीडिया से उनके बारे में सूचनाएं इकट्ठा की जा रही हैं। लोगों की सूचनाएं चोरी करके हर साल हजारों करोड़ रुपए के बैंकिंग फ्रॉड हो रहे हैं। सो, धीरे धीरे लोगों का मोहभंग होना शुरू हुआ है। लोगों को यह भी पता चल रहा है कि सोशल मीडिया में किसी खबर को वायरल करना या कोई खास विषय ट्रेंड कराना अब बहुत कूल बात नहीं रह गई है, बल्कि यह एक धंधा हो गया है। संगठित तरीके से पार्टियां या संस्थाएं फर्जी ट्विटर हैंडल या बॉट्स के जरिए यह काम कर रही हैं। मशहूर हस्तियों के पैसे लेकर ट्विट करने का एक स्टिंग भी कुछ समय पहले आया था। सो, इन बातों की वजह से धीरे धीरे लोगों ने सोशल मीडिया को गंभीरता से लेना कम कर दिया है। हालांकि अब भी इसका असर है पर जादू खत्म है।

दूसरी बात यह है कि भाजपा की आईटी सेल ने सोशल मीडिया पर जो वर्चस्व बना रखा था वह चैलेंज हो गया है क्योंकि यह खेल सब लोग जान गए हैं। कांग्रेस पार्टी भी यह खेल बहुत कायदे से खेल रही है तो आम आदमी पार्टी उससे भी बेहतर ढंग से खेल रही है। यहां तक कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के आईटी सेल ने पिछले दो महीने में कमाल का काम किया है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि के किसानों के इंजीनिरिंग पढ़े बच्चों ने सिंघु बॉर्डर पर आईटी सेल बनाया, जिसका सर्वर उन्होंने कनाडा में रखा है। इन युवाओं ने किसान आंदोलन को लेकर वायरल की गई हर गलत खबर का रियल टाइम में जवाब दिया। उन्होंने यह दिखा दिया कि सोशल मीडिया को मैनेज करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह उनका प्रयास था जो फर्जी ट्विट को लेकर भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के एकाउंट को ट्विटर ने चेतावनी दी। भाजपा का समर्थन करने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत ने पंजाब की बूढ़ी महिला मोहिंदर कौर को शाहीन बाग की दादी बताते हुए कहा कि सौ-सौ रुपए में ये लोग उपलब्ध हैं तो किसानों के आईटी सेल ने तत्काल जवाब दिया और महिलाओं ने उनको ऊपर केस भी किए।

इसी तरह चीन के मामले में भी प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के खड़े किए विमर्श के बरक्स असलियत ज्यादा चर्चा में रही। भारत की एक इंच जमीन किसी ने नहीं ली है और कोई भी भारतीय सीमा में नहीं घुसना, ऐसा कहना प्रधानमंत्री के लिए ही भारी पड़ गया। सोशल मीडिया में चीन के कब्जे की तस्वीरें खूब वायरल हुई हैं। अमेरिकी कंपनी प्लैनेट लैब्स की सेटेलाइट से खींची गई तस्वीरों के वायरल होने के बाद लोगों ने जाना कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारत की सीमा में चार किलोमीटर अंदर घुस कर गांव बसा लिया है। भाजपा के अपने सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी के ट्विट से लोगों ने जाना कि चीन ने पैंगोंग झील और देपसांग के पास भारत की चार हजार किलोमीटर जमीन कब्जा कर ली है। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश के भाजपा सांसद तापिर गावो ने सोशल मीडिया में वीडियो जारी कर बताया कि चीन के सैनिक भारत की सीमा में अंदर घुस कर पुल और सड़कें बना रहे हैं।

अभी पिछले दिनों केंद्र सरकार का आम बजट आया तो भले शेयर बाजार ने इसका जबरदस्त स्वागत किया और बजट के बाद से लगातार शेयर बाजार में तेजी रही लेकिन सोशल मीडिया में पहले दिन से हैशटैग सेल इंडिया ट्रेंड करता रहा। नरेंद्र मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेच रही है, यह नैरेटिव ट्विटर ने बना दिया, जिसका जवाब देते नहीं बन रहा है। वित्त मंत्री ने बजट में कहा क स्वास्थ्य सेवाओं पर 137 फीसदी खर्च बढ़ाया गया है। सोशल मीडिया और वैकल्पिक मीडिया स्रोतों में इसकी पड़ताल हुई और पता चला कि इस बार उन्होंने ज्यादा खर्च दिखाने के लिए पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय की योजनाओं का पैसा भी स्वास्थ्य मंत्रालय में दिखा दिया है।

इसी तरह गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली में पुलिस और किसानों के बीच हुई झड़प को लेकर भाजपा और सरकार की ओर से जो नैरेटिव बनाया गया, उसका भी किसान संगठनों और विपक्षी पार्टियों के आईटी सेल ने तत्काल जवाब दिया। किसानों को उकसाने और उन्हें लाल किले तक ले जाने वालों की पहचान सोशल मीडिया ने ही की। पंजाबी कलाकार दीप सिद्धू की भाजपा नेताओं से करीबी सोशल मीडिया ने ही दिखाई। भाजपा नेताओं के साथ उसकी फोटो ऐसी वायरल हुई कि मजबूरी में पुलिस को उसके ऊपर मुकदमा दर्ज करना पड़ा और अब एक लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया गया है।

सो, विपक्षी पार्टियों को, स्वतंत्र संगठनों और नागरिकों को थोड़ा समय लगा सोशल मीडिया की तिकड़मों को समझने में लेकिन वे अब इसे समझ गए हैं। इसलिए यह प्लेटफॉर्म जैसे को तैसा वाला हो गया है। पार्टियों ने तो अपनी आईटी टीम बना ही ली है छोटे-बड़े हर नेता ने अपनी सोशल मीडिया टीम बनाई है या पेशेवर रखे हैं, जो उनकी बातों का प्रचार करते हैं और उनके खिलाफ होने वाले दुष्प्रचार का जवाब देते हैं। पहले जहां इस प्लेटफॉर्म पर सिर्फ एक पार्टी या नेता का वर्चस्व था, वहीं अब इसका लोकतांत्रिकरण हो गया है। सारी पार्टियां और नेता अपनी अपनी सामर्थ्य के साथ इस पर मौजूद हैं। लेकिन दुर्भाग्य से आम लोगों के बीच इसका जादू खत्म होता जा रहा है। लोग आभासी दुनिया से निकल कर वास्तविक दुनिया में आने लगे हैं। उनको लगने लगा है कि प्रचार के जरिए उनको जो चीजें मिलने का दावा किया गया था वह वास्तव में मिला ही नहीं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

});