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शेयर बाजार मे बाजीगरी

hit on Dalal Street

सन् 2021 की हैरान करने वाली बात यह कि देश की अर्थव्यवस्था गिरती हुई और वायरस की महामारी का संकट भारी फिर भी शेयर बाजार की तेजी बरकरार।। तभी मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रह्मण्यम ने 2019 में ही आईआईएम अहमदाबाद के छात्रों को एक चुनौती दी थी और कहा था कि अगर वे यह पहेली सुलझा लें कि अर्थव्यवस्था के इतनी तेजी से गिरने के बावजूद शेयर बाजार कैसे ऊपर जा रहा है तो वे इसे समझने के लिए अमेरिका से जहाज पकड़ कर भारत आ जाएंगे। लेकिन अब वहां भी हालात डावांडोल हैं। शेयर बाजार में निवेशकों के लाखों करोड़ रुपए डूब गए। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का जो सूचकांक 60 हजार से ऊपर पहुंचा हुआ था वह 56-57 हजार के बीच झूल रहा है। संस्थागत विदेशी निवेशक पैसे निकाल रहे हैं, जिसका असर मुद्रा की कीमत पर भी पड़ रहा है और बाजार में निवेशकों के पैसे अलग डूब रहे हैं।

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महंगाई नरेंद्र मोदी की सरकार का एक अहम मुद्दा था, जो 2021 में चरम पर पहुंच गई। इससे पहले इतिहास में कभी लोगों ने ऐसी महंगाई नहीं देखी थी। इस साल पेट्रोल के दाम 120 रुपए लीटर से ऊपर पहुंच गए और रसोई गैस का सिलिंडर एक हजार रुपए तक पहुंचा। थोक महंगाई की दर 14 फीसदी पर पहुंची, जो इतिहास में कभी नहीं हुआ था। सब्जियों का मौसम होने के बावजूद हर सब्जी की कीमत आसमान छू रही है तो दाल और तेल की कीमत ऐतिहासिक ऊंचाई है। महंगाई की बढ़ती दर की वजह से पिछले करीब डेढ़ साल से रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव रोका हुआ है। बेरोजगारी की दर 2021 में 45 साल पहले के स्तर पर पहुंच गई। दो साल पहले अरविंद सुब्रह्मण्यम ने कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था आईसीयू की तरफ बढ़ रही है अब वह आईसीयू में पहुंच गई है।

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सरकार झूठे-सच्चे आंकड़ों के दम पर चाहे जो दावे करे हकीकत यह है कि भारत में गरीबी और कुपोषण बढ़ रहा है। लोगों की कमाई कम हो रही है और यह सरकारी आंकड़ों से ही पता चल रहा है कि पांच किलो अनाज और एक किलो दाल के सहारे जीवन चला रहे लोगों की संख्या बढ़  रही है। प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य में ऐसे लोगों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 2021 में 15 लाख का इजाफा हुआ है। सोचें, गुजरात में जितने लोग 2020 में मुफ्त अनाज ले रहे थे उनकी संख्या 15 लाख बढ़ गई है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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