तीसरे पक्ष का दखल पहली बार - Naya India
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप| नया इंडिया|

तीसरे पक्ष का दखल पहली बार

अभी तक भारत सरकार की ओर से इसका खंडन नहीं किया गया है इसलिए इस खबर को सही माना जाना चाहिए कि पहली बार भारत और पाकिस्तान के संबंधों के बीच किसी तीसरे पक्ष का दखल हुआ है। पिछले दिनों एक रिपोर्ट थी कि सऊदी अरब ने दखल देकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव घटाने की पहल की है। ध्यान रहे भारत हमेशा कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ उसके जो भी विवाद हैं वह दो देशों के बीच का मसला है और इसे सुलझाने के लिए किसी तीसरे पक्ष के दखल की जरूरत नहीं है। यह भी हकीकत है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों के तनाव का एकमात्र कारण जम्मू कश्मीर है, जो भारत का अभिन्न अंग है लेकिन पाकिस्तान उसकी आजादी की मांग करता रहा है। तभी भारत दो टूक स्टेंल लिए रहा है कि कश्मीर मसला सुलझाने के लिए उसे किसी तीसरे पक्ष के दखल की जरूरत नहीं है।

इसके बावजूद अगर सऊदी अरब ने इस मामले में दखल बनाया तो यह भारतीय कूटनीति में एक बड़ा बदलाव है। खबर है कि सऊदी अरब के शाही खानदान के एक सदस्य ने भारत सरकार से इस बारे में बात की और उसके तुरंत बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य स्तर की वार्ता बहाल हुई। लंबे समय से बंद पड़ी वार्ता का शुरू होना ही अपने आप में बड़ी बात है। पिछले महीने भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान के महानिदेशकों यानी डीजीएमओ के बीच हॉट लाइन पर बातचीत हुई। दोनों के बीच 2003 से लागू संघर्षविराम का पालन करने की सहमति बनी। इसके बाद ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने पुरानी बातों को भूल कर दोनों देशों के आगे बढ़ने की बात कही।

यह माना जा रहा है कि सऊदी अरब के दखल की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबारी संबंध बहाल होने का फैसला हुआ था। इसके तहत भारत की ओर से पाकिस्तान को कपास और चीनी दी जाती, जिसके बदले में उसने सीमेंट की आपूर्ति करने का वादा किया था। ध्यान रहे इन दिनों पूरे उत्तर भारत में सीमेंट की भारी कमी हो रही है। हालांकि यह कारोबारी पहल आगे नहीं बढ़ पाई क्योंकि पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकतों ने इसमें फच्चर डाल दिया है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकतों ने शर्त लगा दी कि जब तक कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल नहीं होता है तब तक भारत के साथ कारोबार नहीं शुरू हो सकता है। इस वजह से पाकिस्तान सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा है। इसके बावजूद यह हकीकत अपनी जगह कायम है कि पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर मसले में तीसरे पक्ष का दखल हुआ।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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