अमेरिका में मौका सबके लिए

अमेरिकी लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया में खोट निकालने वालों को जरा ठहर कर अमेरिकी लोकतंत्र की इस खूबसूरती को भी ध्यान से देखना चाहिए कि वहां दुनिया भर के देशों के लोगों के लिए कैसे अवसर हैं। भारत में इस बात पर खुशी मनाई जा रही है कि अमेरिका के अलग अलग राज्यों की सीनेट और निचले सदन में 12 भारतीय जीते हैं। पांच महिलाएं अलग अलग राज्यों की विधायिका के लिए चुनी गई हैं।

अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में चार भारतीय चुने गए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के डॉ. अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, आरओ खन्ना और राजा कृष्णमूर्ति चुनाव जीते हैं। डॉ. हीरल तिपिरनेनी एरिजोना की एक सीट से प्रतिनिधि सभा का चुनाव लड़ रहे हैं और बढ़त बनाए हुए हैं। टेक्सास के 22वां कांग्रेस क्षेत्र से प्रेस्टन कुलकर्णी भी बढ़त बनाए हुए हैं। महज 30 साल के नीरज एंटोनी ओहायो से सीनेटर चुने गए हैं। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को हराया और वे ओहायो से सीनेटर बनने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। इनके अलावा अनेक क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोग चुनाव लड़े और हार गए।

भारतीय मूल की कमला हैरिस अमेरिका की उप राष्ट्रपति बनने वाली हैं और बेहद सहज अंदाज में वहां के लोग मान रहे हैं कि एक दिन वे अमेरिकी की राष्ट्रपति बनेंगी। ऐसा भी नहीं है कि वे कई पीढ़ियों से अमेरिकी में रह रही हैं। वे अमेरिका में जन्म लेने वाली पहली पीढ़ी हैं। उनकी मां भारत में जन्मी और पढ़ी-लिखी थीं। अब सोचें, जब भारतीय मूल के इतने लोग चुनाव लड़ रहे हैं और जीत हार रहे हैं तो दुनिया के दूसरे मुल्कों के लोगों की कितनी संख्या होगी, जिन्होंने चुनाव लड़ा होगा और जीते-हारे होंगे। यह अमेरिकी लोकतंत्र की खूबसूरती है, जिसने अमेरिका को महान बनाया है, उसके लोकतंत्र को जिंदादिल बनाया है और दुनिया का चौकीदार बनाया है। ट्रंप इस खूबसूरती को खत्म करना चाहते थे पर अमेरिका के लोगों ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी है।

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