ट्रंप की मुश्किलें कैसे कम होंगी?

अमेरिका में मोटे तौर पर यह माना जाने लगा है कि राष्ट्रपति ट्रंप की गलतियों के कारण संक्रमण बेकाबू है और इतनी मौते हुई है, जिसमे अभी तत्काल कमी आने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ट्रंप भी इस बात को समझ रहे हैं तभी उन्होंने लोगों को दिखाने के लिए मास्क लगाना शुरू किया है और वैक्सीन के बारे में बड़े बयान दे रहे हैं। उन्होंने ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिल कर बन रही वैक्सीन के 30 करोड़ डोज की खरीद का ऑर्डर दे दिया है। उनकी कोशिश होगी कि वैक्सीन आ जाए तो नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले अमेरिका में सबको वैक्सीन की पहली डोज मिले। इसके लिए वे कहीं से भी वैक्सीन मंगाएंगे। संभव है रूस की वैक्सीन पहले आए तो ट्रंप वहां के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे।

कोरोना वायरस को ले कर  ट्रंप की अनाप-शनाप हरकतों की वजह से बड़े तबके में नाराजगी है और यह नाराजगी कई तरह से जाहिर हुई है। न्यूयॉक में एक बिल्डिंग पर कोरोना संक्रमितों और मरने वालों की गिनती का एक मीटर बड़े स्क्रीन पर लगा है, जिस पर बताया जाता है कि ट्रंप की गलतियों के कारण अब तक कितने लोग मरे। यानी ट्रंप ने कोरोना वायरस से लड़ने की रणनीति में गलती नहीं की होती तो इतने लोग बच सकते थे। यह मीटर लगातार चल रहा होता है, जिससे अमेरिका के लोगों को पता चलता है कि उन्होंने जिसे राष्ट्रपति के तौर पर चुना है वह कैसा नासमझ, लापरवाह और गैर जिम्मेदार व्यक्ति है, जिसकी वजह से हजारों लोगों की जान गई है। ट्रंप चाह कर भी इसे नहीं बदल पा रहे हैं।

कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए बने टास्क फोर्स से जुड़े डॉक्टर एंथनी फौची ने भी ट्रंप को एक्सपोज किया है। वे हर प्रेस कांफ्रेंस में वास्तविक स्थिति बताते थे, जो ट्रंप की कही बातों से उलटी होती थी। तभी ट्रंप ने अपने कार्यालय से जुड़े अधिकारी पीटर नवारो को इन दिनों डॉक्टर फौची को खिलाफ छोड़ रखा है। नवारो ने डॉक्टर फौची की तीखी आलोचना की है। हालांकि फौची ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देने की बात कही है पर ट्रंप अपना स्कोर सेटल करने के लिए नवारो को उनसे लड़ा रहे हैं। हालांकि इससे भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं क्योंकि अमेरिकी नागरिकों को मीडिया से इस बारे में पता चल रहा है।

इस बीच ट्रंप की मुश्किल बढ़ाने वाली एक किताब उनके भाई की बेटी ने लिख दी है। उनकी भतीजी मैरी ट्रंप ने एक किताब लिखी है, जिसे रूकवाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने ऐड़ी चोटी का जोर लगाया पर उसे रूकवा नहीं सके। वह किताब आ गई है। उनकी भतीजी ने किताब का टाइटल दिया है- टू मच एंड नेवर एनफःहाऊ माई फैमिली क्रिएटेड द वर्ल्ड्स मोस्ट डेंजरस मैन।

सोचें उनकी भतीजी कह रही है कि ट्रंप दुनिया के सबसे खतरनाक आदमी है। इस खतरनाक आदमी ने दुनिया की व्यवस्था को जो नुकसान पहुंचाया है वो तो पहुंचाया ही है सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका को पहुंचाया है। कम से कम एक सदी के समय में पहली बार ऐसा हो रहा है कि दुनिया किसी बडे संकट में है और लोग नेतृत्व के लिए अमेरिका की ओर नहीं देख रहे हैं। उलटे भारत सहित दुनिया भर में मिसाल दी जा रही है कि जब अमेरिका में कोरोना वायरस की स्थिति इतनी खराब है तो हम क्या कर सकते हैं। ट्रंप ने अमेरिका को दुनिया के चौधरी के तख्त से गिरा कर सत्ता की संरचना में कहीं बहुत नीचे पहुंचा दिया है।

एक बड़ा संकट ट्रंप के सामने यह है कि लोग उनसे पिछले दो-तीन साल की संपत्ति का ब्योरा जारी करने की मांग कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने प्रचार में इसका वादा किया था पर उसके बाद वे मुकर गए। उन्होंने अपनी कंपनी में अपना हित भी नहीं छोड़ा, जो आमतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति करते रहे हैं और कह दिया कि अमेरिका के लोगों की इसमें दिलचस्पी नहीं है। उनके उलट उनके प्रतिद्वंदी जो बाइडेन ने अपनी संपत्ति और आय का ब्योरा जारी कर दिया है। अमेरिका के मशहूर स्तंभकार थॉमस एल फ्रायडमैन ने अपने ताजा कॉलम में बाइडेन से कहा है कि वे ट्रंप के साथ प्रेसिडेशियल डिबेट के लिए तभी तैयार हों, जब वे अपनी संपत्ति का ब्योरा जारी करें। उन्होंने अपने उसी कॉलम में बताया है कि ट्रंप अब तक 19 हजार बार से ज्यादा झूठ बोल चुके हैं या झूठी मिसालें दो चुके हैं।

सो, चाहे कोरोना वायरस का मामला हो, परिवार के सदस्यों का मामला हो, संपत्ति और आय का मसला हो या अंतरराष्ट्रीय राजनीति का मसला हो, ट्रंप हर मोर्चे पर विफल  हैं। तभी चुनाव से पहले उनकी मुश्किलें बढ़ी हैं। अभी आ रहे तमाम सर्वेक्षणों में वे पिछड़ रहे हैं और कई लोग याद दिला रहे हैं कि जब 2016 के नवंबर में वे जीते थे तभी उनको सिंगल टर्म प्रेसीडेंट कहा जाने लगा था।

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