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अमेरिकी हिंदू समझेंगे या बुद्धि फिरी रहेगी?

इस्लाम ने क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप को सत्ता दिलाई तो मुसलमान से डरे-परेशान हिंदुओं के लिए ट्रंप 2016 में अवतार थे। ट्रंप के जन्मदिन पर हिंदू केक काटते दिखलाई दिए थे। उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दस तरह की उम्मीदें कीं। अब जरा गौर करे चार सालों में हिंदुओं को क्या मिला? झूठ का वायरस और मुंह में राम बगल में छुरी। डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल इस्लाम के मामले में धोखा दिया, बल्कि हिंदुओं और भारत के साथ वह किया जो दुश्मन भी नहीं करता। सुन्नी-वहाबी कट्टपंथ के झंडाबरदार सऊदी अरब की राजधानी रियाध जा कर डोनाल्ड ट्रंप शाही खानदान के साथ तलवार ले कर जिस अंदाज में नाचे थे उससे शुरुआत में ही मालूम हो गया था कि ट्रंप का विचार, विचारधारा और सत्य से नहीं, बल्कि धंधे से नाता है। वह अच्छाई-सच्चाई-लोकतंत्र के लिए लड़ने-भिड़ने-मरने वाले नहीं, बल्कि धंधे के लिए दोस्त को कुरबान करेंगे और तानाशाहों को गले लगाएंगे। डोनाल्डे ट्रंप ने चीन, रूस और इस्लामी कट्टरपंथ के लिए कैसे मौके बनाए हैं इसके प्रमाण में सीरिया व पश्चिम एशिया की चार साल की घटनाएं हैं तो अफगानिस्तान से सेना हटाने से ले कर यूक्रेन, उत्तर कोरिया की कूटनीति के नुकसान भी जगजाहिर हैं।

बावजूद इसके क्या अमेरिका में रह रहे भारत के हिंदू नवंबर में ट्रंप के दिवाने रहेंगे? हिसाब से डोनाल्ड ट्रंप को हराने के लिए हर हिंदू को जी-जान से जुटना चाहिए। ट्रंप ने चार सालों में अमेरिका में रह रहे हिंदुओं, भारत के छात्रों, भारत की आईटी, भारत के व्यापार और भारत को दबाने, भारत के लिए मुश्किलें बनाने के जितने काम किए हैं वैसा पिछले बीस सालों में कभी नहीं हुआ। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीचता की हद थी जो अभी, हाल में विश्वविद्यालयों में दाखिला लिए छात्रों का वीजा इस आधार पर रद्द करने का फैसला किया कि पढ़ाई ऑनलाइन होने लगी है तो छात्र अपने-अपने देश लौटें। यदि ऐसा होता तो भारत से गए नौजवान छात्रों के लिए इसका अनुभव कैसा होता? ऐसे ही एच1बी वीजा खत्म करना भारत के आईटीकर्मी नौजवानों पर ट्रंप का सीधा हमला है। ट्रंप ने हिंदू परिवारों, नौकरीपेशा नौजवानों, आईटी कंपनियों के लिए इतनी मुश्कलें बनाईं हैं कि हिसाब से अमेरिका के हर हिंदू को ट्रंप को हराने की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए!

तथ्य जानें कि डोनाल्ड ट्रंप ने जो फैसले लिए हैं उन सबको पलटने का डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन ने वादा किया है। मतलब वे एच1बी वीजा वापिस लागू करेंगे, प्रवासी लोगों को आने देने में उदारता बरतेंगे और भारत व भारत के हिंदुओं के लिए वापिस 2014 वाला माहौल बनेगा। मतलब संभव है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की उपस्थिति बनाए रखने का फैसला हो। भारत पर ईरान से नाता नहीं रखने का दबाव खत्म हो जाए। हां, ओबामा के राज में ईरान के खिलाफ होते हुए भी अमेरिका ने भारत को ईरान की मदद से रोका नहीं था। जबकि ट्रंप ने हर मामले में दस तरह से भारत का टेंटुआ कसा। ईरान के रेल प्रोजेक्ट के लिए भारत को पैसा नहीं देने दिया। नतीजतन चीन अब भारत की जगह भारत का प्रोजेक्ट ले रहा है और वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान में अपने रास्ते बना सीधे खाड़ी के मुहाने पहुंचने की तैयारी में है।

तभी भारत राष्ट्र-राज्य, भारत की सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की हिंदुवादी राजनीति को येन केन प्रकारेण अमेरिकी हिंदुओं को प्रेरित करना चाहिए कि वे डोनाल्ड ट्रंप को हटाने में जुटें और डेमोक्रेटिक पार्टी का 2020 के चुनाव में समर्थन करें। अमेरिकी हिंदुओं को ट्रंप से पूछना चाहिए कि उन्होंने चार साल में उनके लिए क्या किया? उन्हें कैसे लातिनी लोगों, मुसलमानों के साथ रख उनकी रोजी रोटी-उनके अवसरों पर तलवार लटकाई? पर अभी तक के संकेतों से लगता नहीं कि अमेरिकी हिंदुओं का ट्रंप से दिवानापन खत्म है। हिंदू क्योंकि झूठ और गुलामी में जीने के ज्यादा आदी हैं तो उनके लिए ट्रंप छाप झूठ वायरस से मुक्ति आसान नहीं है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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