पुलिस की वहीं पुरानी कहानी

भारत के चाहे किसी राज्य की पुलिस हो उसके पास हर चीज के टेंपलेट बने हुए हैं। वह जिस बात को चाहे जस्टिफाई कर सकती है और बिल्कुल एक जैसे तर्क से। इस मामले में तेलंगाना से लेकर उत्तर प्रदेश तक की पुलिस में कोई फर्क नहीं है। उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगेस्टर और आठ पुलिसवालों की हत्या के आरोपी विकास दुबे के कथित इनकाउंटर में पुलिस ने बिल्कुल वहीं कहानी बताई है, जो पिछले तीन दिन में उसने चार अन्य मुठभेड़ों के बारे में बताई थी। इससे पहले भी पुलिस हर मुठभेड़ में यहीं कहानी सुनाती रही है। मशहूर व्यंग्यकार संपत सरल हमेशा कहते हैं, जब सुनाने वाले और सुनने वाले दोनों को पता हो कि कहानी झूठी है तो ऐसे झूठ में कोई पाप नहीं लगता है।

सो, पुलिस ने शुक्रवार की सुबह बताया कि वह विकास दुबे को लेकर कानपुर आ रही थी और उसी समय कानपुर से कोई 20 किलोमीटर दूर पुलिस की एक गाड़ी पलट गई। इसका फायदा उठा कर विकास दुबे ने भागने की कोशिश की। इससे पहले उसने पुलिस वाले के हथियार छीन कर उन पर फायरिंग भी की। उसकी फायरिंग में पुलिस के जवान घायल हुए और मजबूरी में पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी, जिसमें विकास दुबे मारा गया। यह कहानी इतनी मानक है कि देश में होने वाले किसी भी मुठभेड़ में सुनाई जा सकती है। इसके एक दिन पहले ही पुलिस ने विकास दुबे के दो साथियों को मार गिराया था। उसमें फर्क यह था कि पुलिस की गाड़ी पलटी नहीं थी, बल्कि खराब हो गई थी। बहरहाल, जैसे भी हो विकास दुबे मारा गया और उसके साथ अनेक राज भी दफन हो गए।

खुद उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले चार दिन में पहले भी दो बार यह कहानी सुनाई है। असल में कानपुर के बिकरू गांव में आधी रात के बाद हुई मुठभेड़ के बाद आठ दिन में यह छठा इनकाउंडर हुआ है। पहला इनकाउंटर तो मुठभेड़ की सुबह उसी गांव में कर दिया गया था। विकास के मामा प्रेम प्रकाश पांडेय और उसके करीबी अतुल दुबे को पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस ने कहा कि वे पुलिस टीम पर हमला करके भागने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद आठ जुलाई को पुलिस ने विकास के करीबी अमर दुबे को मार गिराया।

अगला इनकाउंटर नौ जुलाई को हुआ, जिसके एक दिन पहले विकास दुबे के दिल्ली से सटे फरीदाबाद में होने की खबर आई थी। हालांकि पुलिस जब तक वहां पहुंचती तब तक वह फरार हो गया था। लेकिन पुलिस ने उसी दिन उसके दो करीबियों प्रभात झा और बऊआ दुबे को गिरफ्तार कर लिया। बाद में दोनों मुठभेड़ में मारे गए। पुलिस ने बताया कि पुलिस की गाड़ी खराब हो गई थी और इसका फायदा उठा कर अपराधियों ने पुलिस के हथियार छीन कर भागने का प्रयास किया और गोलीबारी में मारे गए। प्रभात झा को पुलिस ने कानपुर में और बऊआ दुबे को इटावा में हुई मुठभेड़ में मारा। इसके एक दिन बाद उज्जैन से आते हुए कानपुर के पास विकास दुबे भी भागने के प्रयास में मारा गया।

पिछले आठ दिन में हुई मुठभेड़ों की तुलना देश में कहीं भी हुई किसी भी मुठभेड़ से की जा सकती है। जैसे पिछले साल के अंत में तेलंगाना में हुआ था। नवंबर 2019 में एक युवती के साथ बलात्कार के बाद जला कर मार डालने की घटना में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने इन्हें कई दिन तक हिरासत में रखा पूछताछ की और फिर एक दिन घटनास्थल पर ले गई, जहां सबूत जुटाने के लिए घटना को रिक्रिएट किया गया। पुलिस ने बताया कि इस दौरान चारों आरोपियों ने पुलिस के हथियार छीन कर भागने का प्रयास किया और इस दौरान पुलिस की फायरिंग में चारों आरोपी मारे गए। आम लोगों ने इस कथित मुठभेड़ का भरपूर जश्न मनाया।

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