वायरस नई बीमारियां पैदा कर रहा हैं

दुनिया के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक इसकी पुष्टि कर रहे हैं कि कोरोना वायरस के इलाज से जो लोग ठीक हो रहे हैं उनमें नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। वे लंबे समय तक के लिए बीमार हो रहे हैं और कोरोना से ठीक होने के थोड़े समय बाद मृत्यु हो रही है। यहीं कारण है कि मृत्यु दर कम होने के आंकड़ों से ज्यादातर समझदार लोग प्रभावित नहीं हैं। अभी इस पर रिसर्च हो रही है कोरोना लोगों के शरीर को किस तरह से प्रभावित कर रहा है और ठीक होने के बाद उससे मृत्यु का खतरा कितना बढ़ रहा है।

अभी पिछले दिनों एक शोध हुई है, जिससे पता चला है कि कोरोना का वायरस अनेक लोगों की सुनने की क्षमता हमेशा के लिए खत्म कर रहा है। कई लोगों को फेफड़े और दिल की बीमारियां हो गई हैं। कोरोना के इलाज के दौरान या इलाज से ठीक हो जाने के बाद दिल का दौरा पड़ने से लोगों की मृत्यु होने की अनेक घटनाएं दुनिया भर में हो रही हैं। लीवर और किडनी फेल होने की भी कई घटनाएं हुई हैं और अमेरिका में हुई रिसर्च से पता चला है कि कोरोना बच्चों और बड़े लोगों के भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। इसका मतलब है कि यह सिर्फ सांस की बीमारी पैदा करने या बढ़ाने वाला वायरस नहीं है, जैसा कि पहले कहा गया था।

शुरू में जब यह बीमारी शुरू हुई तो कहा गया था कि यह सांस लेने में दिक्कत से जुड़ी बीमारी है। आमतौर पर कोरोना वायरस से सांस की बीमारी, कफ, जुकाम आदि होते थे। परंतु यह नोवल कोरोना है, जो सिर्फ सांस की बीमारी नहीं पैदा कर रहा है। पहले कहा जा रहा था कि ज्यादातर लोग दो-तीन हफ्ते में ठीक हो जाते हैं। लेकिन, यह पूरी तरह से सच नहीं है। हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में लोग ठीक होने के बाद भी बीमार रह रहे हैं। टेस्ट निगेटिव आने के बाद भी महीनों तक संक्रमण के लक्षण दिखा दे रहे हैं। तभी दुनिया भर के शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने लांग कोविड का जुमला दिया है। इसका मतलब है कि ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक संक्रमण का खतरा रहना।

इस हुई रिसर्च के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ ने भी लांग कोविड की संभावना पर विचार कर रहा है। ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीच्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च, एनआईएचआर ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि लांग कोविड के चार अलग-अलग सिंड्रोम है। लांग कोविड का मतलब है कि जो एक बार मरीज हो गया उसे महीनों तक परेशानी आती रहेगी और अगर उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक नहीं है तो संभव है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी उसका निधन हो जाए। ब्रिटेन में 10 फीसदी से ज्यादा मरीजों में ठीक होने के एक महीने बाद भी कोई न कोई लक्षण दिखे हैं। वहां कोविड के लक्षण को ट्रैक करने वाले ऐप बनाए गए हैं, जिनके जरिए यह पता चल रहा है। यह भी पता चला है कि दो फीसदी के करीब लोगों को तीन महीने बाद भी कोई न कोई लक्षण दिखाई दिए हैं। सो, चाहे सरकार कुछ भी कहे, सब कुछ नॉर्मल हो जाने के जितने भी दावे किए जाएं, सब कुछ अनलॉक कर दिया जाए पर लोगों को अभी घरों में बंद होना चाहिए। क्योंकि सरकार लोगों को घरों से बाहर निकाल तो रही है पर संक्रमित होने के बाद कोई पूछने वाला नहीं है।

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