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उफ! अस्पताल मानो मौतघर

गोरखपुर/ नई दिल्ली। पूर्वी उत्तरप्रदेश के प्रमुख सरकारी अस्पताल में नवजात बच्चों की हत्या का शर्मनाक वाकिया हुआ है। पांच दिन में 60 बच्चों की मौत के बाद अब विवाद है कि डाक्टरों की लापरवाही जिम्मेवार कारण है या आक्सीजन सप्लाई न होने से ऐसा हुआ।  9 तारीख की आधी रात से 10 तारीख की आधी रात में 23 मौतें हुईं जिनमें से 14 मौतें नियो नेटल वॉर्ड यानी नवजात शिशुओं को रखने के वॉर्ड में थी। खबर के बाद सरकार ने जांच कमेटी गठित कर मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल को निलंबित किया है। गोरखपुर पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि सही में आक्सीजन की आपूर्ति बाधित हुई लेकिन बच्चों की मृत्यु का कारण और भी है।  
श्री टंडन ने कहा कि मामले में प्रारम्भिक तौर पर मेडिकल कालेज के प्रिसिंपल को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। आगे कार्रवाई मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी की रिपोर्ट पर होगी। 10 अगस्त की रात साढे 11 बजे से डेढ़ बजे तक दो घंटे आक्सीजन की आपूर्ति बाधित रही है। जांच में पता चला है कि साढ़े सात बजे शाम से ही आक्सीजन का प्रेशर कम होने लगा था। श्री टंडन ने कहा कि इस मामले की जांच की जायेगी कि आक्सीजन की आपूर्ति बाधित क्यों हुई?
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने 2015 और 2016 के अगस्त में बच्चों की हुई मृत्यु का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए वजह बताई। गौरतलब है कि गोरखपुर और उसके आसपास के इलाके मस्तिष्क ज्वर से प्रभावित हैं। बारिश के मौसम में इस बीमारी से हर वर्ष सैंकड़ों बच्चों की मृत्यु होती है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि आक्सीजन जीवन रक्षक रसायन है। आपूर्ति क्यों रोकी गयी, इसका क्या कारण था,  इस सबकी जांच मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी करेगी। उन्हें बताया गया है कि आक्सीजन की आपूर्ति करने वाले डीलर का भुगतान बाकी था। डीलर के अनुसार उसने एक अगस्त को प्रधानाचार्य को भुगतान के लिये पत्र लिखा था। इसकी प्रतिलिपि चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक लखनऊ को भी भेजी थी। उन्होंने बताया कि पांच अगस्त को भुगतान मेडिकल कालेज को भेज दिया गया। प्रधानाचार्य का कहना है कि सात अगस्त को मेडिकल कालेज में पैसा आया। डीलर का कहना है कि 11 अगस्त को उसके खाते में पैसा ट्रान्सफर हुआ। देरी क्यों हुई, यह भी जांच के दायरे में होगा।
सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने इस मामले को गम्भीरता से लिया है, इसीलिए मुख्यमंत्री ने दो मंत्रियों को यहां भेजा है। इससे पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक को कल शाम ही गोरखपुर भेज दिया गया था। दूसरी ओर, मेडिकल कालेज के निलम्बित प्रधानाचार्य राजीव कुमार मिश्रा ने आक्सीजन की कमी से बच्चों की मृत्यु होने से इन्कार करते हुए इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने पूरे मामले में अपने को निर्दोष भी बताया।
कहा कि आक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कम्पनी के भुगतान के लिए शासन से पैसा ही देर में आया है। पैसा आते ही उन्होंने तत्काल भुगतान कर दिया था। उनकी तरफ से कहीं से लापरवाही नहीं है। उन्होंने कहा कि नौ अगस्त को शासन से उनके पास पैसा आया है। दस अगस्त को वह मुख्यमंत्री के दौरे की वजह से व्यस्त थे। 11 अगस्त को कम्पनी को चेक दे दिया गया है। उनकी कहीं से कोई गलती नहीं है। फिर भी उन्हें दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है।
उधर इस मामले में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने राज्य स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी है। गोरखपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने कहा कि पिछले दो दिनों में शहर के सरकारी अस्पताल बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में कम से कम 30 बच्चों की मौत हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक के अनुसार तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण 21 बच्चे मारे गए।
मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा था कि गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक के अनुसार पिछले 36 घंटे में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी से 21 बच्चों की मौत हो गई। वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर हैं। नागरिक प्रशासन मौत के सटीक कारण का सत्यापन कर रहा है।

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