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भारत अहम मुद्दों पर मिलकर काम करने को तैयार: मोदी

 मनीला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत क्षेत्र के राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों को हल करने के लिए पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के सदस्य राष्ट्रों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी ने कहा कि एक समूह के रूप में क्षेत्रीय समूह आसियान का प्रभाव 'आशा की किरण' के रूप में उभरा है।

मोदी ने तीन दिवसीय आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान 12वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, आगामी वर्षों में हम पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को अधिक महत्वपूर्ण बनाने के लिए तत्पर हैं। मैं क्षेत्र के राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों से निपटने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराता हूं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के अनुसार मोदी ने सभा में कहा कि एक समूह के रूप में क्षेत्रीय समूह आसियान का प्रभाव 'आशा की किरण' के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा,आसियान की शुरुआत वैश्विक विभाजन के समय हुई थी लेकिन आज यह अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है, यह आशा की किरण के रूप में चमक रहा है और शांति और समृद्धि का प्रतीक है।

इस अवसर पर श्री मोदी ने अन्य राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। उन्होंने चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग और फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते से खुशनुमा माहौल में बातचीत की। उन्होंने कुछ देर तक न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न से भी बातें की।

श्री मोदी की मनीला यात्रा की संध्या पर सचिव(पूर्व) प्रीति सरन ने पत्रकारों को बताया, आसियान भारत की एक्ट ईस्ट नीति में अहम भूमिका रही है। इसलिए हमारे प्रधानमंत्री को आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने से साझेदारी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर मिलता है।

पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में 10 आसियान राष्ट्रों के अलावा आठ अन्य देश भारत, चीन, अमेरिका, रूस, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, जापान और उत्तर कोरिया शामिल हैं। पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन की स्थापना के बाद से, संस्थापक सदस्य होने नाते भारत 2005 के बाद से पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लगातार भाग लेता रहा है।

सचिव(पूर्व) ने कहा कि एशिया शिखर सम्मेलन एक मंच के रूप में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन क्षेत्र के नेताओं के विचारों आदान-प्रदान करने, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों, मुख्य रूप से आतंकवाद, समुद्री सहयोग, समुद्री सुरक्षा आदि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

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