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... तो खत्म हो जाएगा लोकतंत्र!

नई दिल्ली। भारत में लोकतंत्र खतरे में है! लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका की जरूरत है पर अफसोस की बात है कि देश की सर्वोच्च अदालत में सब कुछ ठीक नहीं है। अगर इस संस्था को नहीं बचाया गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा! ये शब्द हैं देश के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर के! आजाद भारत के इतिहास में पहली बार एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में चीफ जस्टिस के बाद चार सबसे वरिष्ठ जजों ने सुप्रीम कोर्ट में अपना कामकाज छोड़ कर प्रेस कांफ्रेंस की। विडंबना यह है कि जिनसे समूचे देश को न्याय की उम्मीद है उन्होंने कहा कि न्याय के सबसे बड़े मंदिर में उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी इसलिए उनको मीडिया के जरिए जनता के सामने आकर सब कुछ बताना पड़ा।

सबसे वरिष्ठ पांच जजों की कॉलेजियम के चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके चीफ जस्टिस के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए। दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्ती चेलमेश्वर के तुगलक रोड स्थित आवास पर बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में चारों जजों ने सर्वोच्च अदालत की कार्यप्रणाली में प्रशासनिक व्यवस्थाओं का पालन नहीं किए जाने और सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण मुकदमों के आवंटन में मनमाना रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

इस प्रेस कांफ्रेंस में जस्टिस चेलमेश्वर के साथ जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस कुरियन जोसेफ भी मौजूद थे। ये सभी जज मामलों की सुनवाई बीच में ही छोड़ कर अदालत कक्ष से बाहर आ गए थे और इन्होंने मीडिया के जरिए देश के सामने स्थिति रखने की योजना बनाई। मीडिया को मुख्य रूप से जस्टिस चेलमेश्वर ने संबोधित किया और जस्टिस गोगोई ने भी बीच में टिप्पणी की।

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि सर्वोच्च अदालत के प्रशासन के ठीक तरीके से काम नहीं करने की शिकायत उन्होंने चीफ जस्टिस से की थी। लेकिन जब उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो उनको जनता के सामने आना पड़ा। उन्होंने कहा- 'हम चार जजों ने तमाम प्रशासकीय खामियों का हवाला देकर चीफ जस्टिस से मुलाकात की थी, लेकिन वहां से कोई समाधान न मिल पाने की स्थिति में देश को वस्तुस्थिति के बारे में बताने के लिए मीडिया का सहारा लेना पड़ा है।

उन्होंने शुक्रवार को कहा - चारों जज आज सुबह भी चीफ जस्टिस के पास कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ गए थे, लेकिन वहां से निराशा हाथ लगी। जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि सर्वोच्च अदालत का प्रशासन अस्तव्यस्त है। जब तक सुप्रीम कोर्ट को बचाया नहीं जाता तब तक लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्‍होंने कहा- हम देश के सामने यह बात इसलिए रखना चाहते हैं कि अब से 20 साल बाद कोई यह न कह सके कि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने अपनी आत्मा बेच डाली।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत में बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जो नहीं होना चाहिए था। उन्होंने चीफ जस्टिस से भेंट करके सुधार के उपाय करने का आग्रह किया, लेकिन उनके प्रयास बेकार साबित हुए। एक सवाल के जवाब में जस्टिस गोगोई ने स्वीकार किया कि सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले के ट्रायल जज बीएच लोया की हत्या की जांच का मामला भी उनकी नाराजगी के केंद्र में है। जस्टिस चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग के सवाल का सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस पर देश को फैसला करना है।

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