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पानीपत में 52 दिनों में 42 लोगों ने आत्महत्या की

पानीपत। पानीपत के शहरी व ग्रामीण अंचल में 17 फरवरी से लेकर 12 अप्रैल तक 42 लोगों ने किसी ने किसी कारण से उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली। मरने वालों में 30 महिलाएं शामिल है। अधिकतर आत्महत्या के मामलों के कारण स्पष्ट नहीं हो सके। सुसाइड करने वालों ने फांसी के फंदे पर लटक कर, जहर खा कर ट्रेन के आगे कूद कर अपनी जीवन लीला खत्म की। मौत को लगे लगाने वालों में तीन विद्यार्थी भी शामिल है। तीनों विद्यार्थियों ने परीक्षा अच्छी नहीं होने के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त की है। वहीं सुसाइड करने में अधिकतर लोग 16 से 35 वर्ष की आयु के थे। जबकि आत्महत्या करने के मुख्य कारणों में घरेलू कलेश, अवैध संबंध, आर्थिक परेशानी, सामाजिक सम्मान नहीं मिला शामिल है। साहित्यकार दीपचंद निर्मोही ने कहा कि हर इंसान को कोई न कोई परेशानी रहती है। व्वहीं जीवन में आने वाली समस्याओं का डटकर मुकाबला करना चाहिए। आत्महत्या करना समास्याओं का हल नहीं है। आत्महत्या करने से समाज कमजोर होता है और मृतक के परिवार को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पडता है। सबसे अधिक परेशानी मृतक की पत्नी व बच्चों को होती है। आत्महत्या करने वाले का काला साया हमेशा उसकी पत्नी व बच्चों पर रहता है। इसके मद्देनजर इंसान को आत्महत्या जैसा भयानक फैसला नहीं लेना चाहिए और समस्याओं का मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर समस्या का हल है, परेशानी होने पर उसका हल तलाशना चाहिए। एसडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनुपम अरोडा ने कहा कि आज के आधुनिक जमाने में हर इंसान तनाव ग्रस्त है, यह बात अलग है कि कोई अधिक तनाव में या फिर किसी को तनाव कम है। उन्होंने कहा कि तनाव के कारण ही इंसान आत्महत्या जैसे भयानक रास्ता अपनाता है। उन्होंने कहा कि परिवार में किसी को मानसिक परेशानी है तो पूरो परिवार को उसका साथ देना चाहिए, उसकी हालत को सामान्य करना चाहिए, सहयोग व समर्पण के भाव से इंसान के तनाव को खत्म किया जा सकता है। आमतौर पर देखा जाता है कि मानसिक रूप से परेशान नागरिक की बाहर के लोग और घरवाले उसकी परेशानी को खत्म करने के बजाए उसे और अधिक बढा देते है। इससे इंसान के अंदर निराशा का भाव और अधिक प्रबल हो जाता है और वह आत्महत्या जैसा भयानक कदम उठाता है। मनो रोग विशेषज्ञ डॉ. सुदेश खुराना ने बताया कि आत्महत्या करने के पीछे सबसे बड़ा कारण हताशा व निराशा होती है। जब इंसान को किसी समस्या को लेकर स्वयं को अकेला समझने लगता है तब वह आत्महत्या जैसा कदम उठाता है। इसके मद्देनजर परिवार के सदस्यों, दोस्तों, रिश्तेदारों को मानसिक रूप से परेशान रहने वाले नागरिक की हर संभव मदद करनी चाहिए और उसके अंदर निराशा व हताशा का भाव खत्म करने में उसकी मदद करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मानसिक रूप से परेशान होने का मुख्य कारण शरीर में केमिकल का सतुंलन बिगड़ना भी है। शरीर में कुछ केमिकल अप व कुछ डाउन हो जाते है। शरीर में अप करने वाले केमिकल कम हो जाते हैं तो व्यक्ति तनाव में आ जाता है। शरीर में मुख्य रूप से फ्यूरो टोनिन, नोर नेपिनेफरिन, डोकोमीन जैसे कैमिकल होते हैं। इन अप डाउन होना कुछ हद तक मौसम पर भी निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार में किसी को तनाव है तो परिवार के लोगों उसे पहले अपने स्तर पर सामान्य करने के प्रयास करने चाहिए। यदि फिर भी तनाव कम न हो तो मनो रोग विशेषज्ञ से उपचार करवाना चाहिए। 

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