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बिहार: शराबबंदी के बाद महिलाएं सुरक्षित

पटना। बिहार के पूर्णिया के चनका गांव की रहने वाली 45 वर्षीय महिला दयमंती देवी आज इस बात को लेकर काफी खुश हैं कि अब उनके घर में न केवल पैसे की बचत हो रही है, बल्कि घर में कलह भी नहीं हो रहा है। 

दयमंती अपनी आपबीती सुनाते हुए कहती हैं कि शराबबंदी के पूर्व उनके पति शराब पीते थे, घर में झगड़ा-झंझट करते थे और देखने में भी क्रूर लगते थे। शराबबंदी के बाद हंसते-मुस्कुराते सब्जी लेकर घर आते हैं और अब देखने में भी अच्छे लगते हैं।

वैसे यह कहानी केवल दयमंती की ही नहीं है। बिहार में शराबबंदी के बाद यहां सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी में आमूल-चूल परिवर्तन हुआ है। आज कई घर शाम होते जहां 'मधुशाला' बन जाते थे, आज वही घर शाम होते पाठशाला नजर आते हैं।  पूर्णिया के आदिवासी बहुल गांव बनभागा की एक महिला ने अपना नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया, "मेरे पति पहले घर में ही महुआ से शराब का निर्माण करते थे, जिस कारण शाम ढलते ही लोग यहां शराब पीने पहुंचने लगते थे। जो लोग शराब पीने आते थे, वे अजीब नजर से घूरते भी थे, परंतु अब स्थिति बदली है। अब शाम होते घर के बच्चे पढ़ने बैठ जाते हैं।" 

वैसे आंकड़े भी इस बात को प्रमाणित करते हैं कि बिहार की महिलाओं की हिंसा में भी कमी आई है। बिहार समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि राज्य में शराबबंदी के बाद महिलाओं और लड़कियों के प्रति हिंसा में अभूतपूर्व कमी आई है। विभाग के लिंग संसाधन केंद्र (जेंडर रिसोर्स सेंटर) द्वारा राज्य के पूर्णिया, समस्तीपुर, नवादा, कैमूर सहित कई जिलों में 2500 से ज्यादा महिलाओं में किए गए सर्वेक्षण में कहा गया है कि 99 प्रतिशत महिलाएं शराबबंदी के पक्ष में हैं। 

लिंग संसाधन केंद्र के प्रमुख सलाहकार आनंद माधव आईएएनएस से कहते हैं, "यह सर्वेक्षण पिछले वर्ष अप्रैल से लेकर नवंबर के बीच किया गया था। इस दौरान 1,001 महिलाओं के साथ 26 समूह चर्चा, 242 महिलाओं के साथ चर्चा और 647 लड़कियों के साथ 10 समूह चर्चा के बाद किया गया। पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी की।"

रिपोर्ट के मुताबिक, शराबबंदी से समाज के सभी वर्गो, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों को फायदा हुआ है। शराबबंदी के बाद लोगों ने भोजन पर 1,331 रुपये साप्ताहिक के हिसाब से खर्च किए, जो कि पहले 1,005 रुपये था। शराबबंदी के बाद 43 प्रतिशत पुरुष खेती में ज्यादा समय व्यतीत करते हैं तथा 84 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि अब पैसे की बचत ज्यादा हो रही है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पहले जहां महिलाओं में मानसिक हिंसा 79 प्रतिशत थी, वह शराबबंदी के पश्चात घटकर 11 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि मौखिक हिंसा 73 प्रतिशत से घटकर 14 प्रतिशत, शारीरिक हिंसा 54 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत, आर्थिक हिंसा 70 से घटकर छह प्रतिशत, यौन हिंसा 15 प्रतिशत से घटकर चार प्रतिशत तथा शारीरिक प्रताड़ना के साथ यौन हिंसा 17 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत पर आ गई है।

पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक निशांत कुमार तिवारी आईएएनएस से कहते हैं, "पूर्णिया जिले में शराबबंदी के बाद लोगों को जागरूक करने के लिए कई काम किए गए। इसके तहत कई रैलियां निकाली गईं तथा कई क्षेत्रों में लोगों के घर-घर जाकर उन्हें शराबंबदी के लिए जागरूक किया गया। शराब माफियाओं के खिलाफ भी जोरदार अभियान चलाए गए।"

उनका मानना है कि ऐसे कार्य केवल कानून बना देने से ही नहीं रोके जा सकते, बल्कि इसके लिए जागरूकता पैदा करना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा, "पूर्णिया पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है और आपको भी क्षेत्र में इसका प्रभाव नजर आ रहा होगा।" 

बिहार में सत्ताधारी जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार कहते हैं कि शराबबंदी की सफलता के बाद बिहार नशामुक्ति की ओर बढ़ चला है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी न केवल सरकार की नीति का परिणाम है, बल्कि यहां के लोगों की इस अभियान में सहभागिता है। 

नीरज आईएएनएस को आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, "सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी शराबबंदी के खिलाफ कर्तव्यहीनता के आरोप में लगातार कार्रवाई हो रही है। राज्य मद्य निषेध विभाग में 17 अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है, जबकि आठ लोगों को बर्खास्त किया गया है। इसके अलावा इस मामले में 242 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।" उल्लेखनीय है कि बिहार में पिछले साल पांच अप्रैल से शराबबंदी लागू है।

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