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फल-सब्जियों के कचरे से दौड़ेंगी सिटी बसें

इंदौर। राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग में लगातार दूसरे साल अव्वल रहे इंदौर में फल-सब्जियों के कचरे से बायो-सीएनजी बनाकर इस हरित ईंधन से वाहनों को दौड़ाने का प्रयोग कामयाब रहा है, नतीजन शहर की लोक परिवहन बसों में सामान्य सीएनजी के बजाय बायो-सीएनजी का वाणिज्यिक इस्तेमाल शुरू होने वाला है। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के लिये इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के सलाहकार असद वारसी ने आज "पीटीआई-भाषा" को बताया, "फल-सब्जियों के कचरे से बनी बायो-सीएनजी से फिलहाल दो सिटी बस (शहरी लोक परिवहन बस) और 20 ऑटो रिक्शा को प्रायोगिक तौर पर दौड़ाया जा रहा है।" अप​शिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ ने कहा, "हमारा यह प्रयोग सफल रहा है. जल्द ही हम इसे वाणिज्यिक रूप से अमली जामा पहनायेंगे। पहले चरण में 20 सिटी बसों में सामान्य सीएनजी के स्थान पर बायो-सीएनजी का इस्तेमाल जल्द ही शुरू किया जायेगा।" बायो-सीएनजी के इस्तेमाल से आबो-हवा की हिफाजत के साथ सिटी बसों के ईंधन बिल में बड़ी कटौती भी होगी। वारसी ने बताया कि सामान्य सीएनजी की एक किलोग्राम मात्रा के इस्तेमाल से सिटी बस 3.5 किलोमीटर चलती है, जबकि बायो-सीएनजी से इसी वाहन का एवरेज बढ़कर चार किलोमीटर प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच जाता है। उन्होंने बताया कि आईएमसी ने देवी अहिल्याबाई होलकर फल-सब्जी मंडी में शहर का पहला बायोमीथेनाइजेशन प्लांट लगाया है। 

इस संयंत्र के जरिये हर रोज फल-सब्जियों के 20 टन अपशिष्ट को 1,000 किलोग्राम बायो-सीएनजी में बदला जा सकता है। प्रसंस्करण के बाद बचे अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद बनायी जा सकती है। वारसी ने बताया कि संयंत्र लगाने वाली निजी कम्पनी और स्थानीय निकाय के बीच हुए अनुबंध के मुताबिक अगले 15 साल तक बायो-सीएनजी का दाम सामान्य सीएनजी की प्रचलित दर से पांच रुपये प्रति किलोग्राम कम रखा जायेगा। उन्होंने बताया कि आईएमसी की योजना है कि मार्च 2019 तक शहर में फल-सब्जियों के अपशिष्ट से बायो-सीएनजी के उत्पादन को बढ़ाकर करीब 4,000 किलोग्राम के दैनिक स्तर पर पहुंचाये दिया जाये। इतना ईंधन तय रूटों पर 70 सिटी बसों को दौड़ाने के लिये काफी होगा। वारसी ने बताया कि फल-सब्जियों के कचरे से बायो-सीएनजी का उत्पादन बढ़ाने के लिये शहर में 15-15 टन के दो नये बायोमीथेनाइजेशन प्लांट लगाने की योजना पर काम जारी है। मोटे अनुमान के मुताबिक कोई 35 लाख की आबादी वाले इंदौर में हर रोज तकरीबन 1,100 टन कचरे का अलग-अलग तरीकों से सुरक्षित निपटारा किया जाता है। इसमें 650 टन गीला कचरा और 450 टन सूखा कचरा शामिल है। वारसी ने कहा, "अगर फल-सब्जियों के कचरे का उचित निपटारा नहीं किया जाये, तो खुले में इसके सड़ने से कार्बन डाई ऑक्साइड और कुछ अन्य गैसें उत्पन्न होती हैं जो वातावरण के लिये हानिकारक हैं।"

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