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नहीं रहे पीपी राव!

नई दिल्ली। संविधान विशेषज्ञ व वरिष्ठ अधिवक्ता पी पी राव का 84 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। एक जुलाई 1933 को जन्मे राव ने इसी वर्ष जुलाई में वकालत पेशे में पांच दशक पूरे किए थे। देश के प्रमुख संविधान विशेषज्ञों में शुमार राव ने अपने शुरुआती दिनों में एम सी सीतलवाड़, एन सी चटर्जी, एस वी गुप्ते, ये के सेन और नीरेन डे के साथ काम किया था और उनके व्यक्तित्व में इन शख्सियतों की झलक देखी जा सकती थी।

उन्होंने 1967 में दिल्ली बार काउंसिल से अपना पंजीकरण कराया था और उसके बाद वह उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करने लगे थे। वह 1976 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने। वर्ष 1991 में वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष चुने गए थे और 2006 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। वकालत पेशे के अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने बहुचर्चित 'केशवानन्द भारती' मामले में आंध्र प्रदेश सरकार की पैरवी की थी और 'एडीएम जबलपुर कांड' में तत्कालीन एटर्नी जनरल नीरेन डे के सहायक की भूमिका निभाई थी।

एआर अंतुले बनाम आर एस नायक (1988), एस आर बोम्मई बनाम भारत सरकार (1994) नरसिंह राव बनाम सरकार (1998), एमएस गिल बनाम मुख्य निर्वाचन आयोग (1978) और एम नागराज बनाम केंद्र सरकार जैसे बहुचर्चित मामलों में पैरवी की थी।

एससीबीए के सचिव गौरव भाटिया ने कहा, यह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सम्पूर्ण वकील बिरादरी के लिए बड़ी क्षति है।

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