अब गूगल कराएगा शहरों से रू-ब-रू

नई दिल्ली। अक्सर ऐसा होता है कि जब हम किसी नए इलाके में जाते हैं तो वहां की बढ़िया खान-पान की दुकानों, ट्यूशन क्लास जैसी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई सारी सेवाओं की जानकारी नहीं होती। अब गूगल ने इसके लिए ‘नेबरली’ एप पेश किया है।

बेहतर सुविधाओं को खोजने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अब गूगल ने इसका डिजिटल समाधान ‘नेबरली’ एप के रूप में पेश किया है। इस पर लोग आस-पड़ोस की हर जानकारी आपस में साझा कर सकते हैं। हिंदी, अंग्रेजी समेत आधा दर्जन से अधिक भाषाओँ में उपलब्ध इस एप पर टाइप करने की जरूरत नहीं है, बोलकर भी सवाल पूछ सकते हैं।

गूगल की नेक्स्ट बिलियन यूजर शाखा के उत्पाद प्रबंधक बेन फोह्नर ने बताया, ‘‘नेबरली किसी उपयोक्ता को उसके पास-पड़ोस से डिजिटली तौर पर जोड़ने का काम करता है। इस पर वह सवाल-जवाब कर स्थानीय जानकारी को हासिल कर सकता है। उपयोक्ता ही एक-दूसरे को ये जानकारी प्रदान करते हैं। एक तरह से यह एप सूचना का लोकतंत्रीकरण करता है।’’

गूगल के इस उत्पाद को विकसित करने में अहम भूमिका निभाने वाले फोह्नर ने बताया कि अभी इस सेवा को मुंबई और जयपुर में शुरू किया गया है।अन्य शहरों के लिए कंपनी ने एक प्रतीक्षा सूची बनायी है। एक निश्चित सीमा में एप डाउनलोड होने और उस पर लोगों के पंजीकरण के बाद इसे अन्य शहरों में शुरू किया जाएगा।

डाटा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बारे में फोह्नर ने कहा, ‘‘इस एप को उपयोग करने के लिए लोगों को अपना फोन नंबर साझा नहीं करना होता है। ना ही उन्हें कोई सीधा संदेश, स्क्रीनशॉट या प्रोफाइल फोटो इत्यादि साझा करनी होती है। उपयोक्ता सिर्फ अपने पहले नाम का उपयोग कर इस एप पर सवाल-जवाब कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस एप पर आम लोग ही आम लागों से सवाल-जवाब करते हैं।

इसे समझाते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई जयपुर की छोटी चौपड़ पर खड़ा होकर नेबरली पर पूछता है कि आसपास मिठाई की अच्छी दुकान कौन-सी है तो यह संदेश एप पर मौजूद सभी स्थानीय लोगों तक पहुंच जाएगा और फिर वह अपना जवाब एप पर दे सकते हैं। इसी तरह आसपास गणित के अच्छे अध्यापक या अच्छे बुटीक या ब्यूटी पार्लर की जानकारी लोग इस एप पर सवाल पूछकर हासिल कर सकते हैं।

फोह्नर ने बताया कि यह एप मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, तेलुगू, तमिल और बांग्ला भाषा में काम करता है। इसके लिए उपयोक्ता को टाइप करने की भी जरूरत नहीं, वह बोल कर भी एप में सवाल-जवाब कर सकते हैं।

यह एप ऑफलाइन भी काम करता है। एंड्राइड जेलीबीन या उससे आगे के सभी एंड्राइड स्मार्टफोन पर काम करता है। फोह्नर के अनुसार इस एप को विकसित करने में गूगल की मैप सेवा, आवाज पहचान सेवा, स्थानीय भाषा सहयोग सेवा पर किए गए काम का भी लाभ लिया गया।

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