मौत के चार सौ साल बाद डच कर्नल का अंतिम संस्कार

हेग। फिशियान शहर में आज एक डच कर्नल का उनकी मौत के करीब 400 साल बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जा रहा है। डच सेना के प्रवक्ता ने बताया कि कर्नल स्चेल्टे वान अयश्मा की अस्सी साल तक चली लड़ाई में 1637 में मौत हो गयी थी। डच प्रौटेस्टैंटों ने स्पेन के शासकों से आजादी के लिए यह लड़ाई लड़ी थी। लेकिन इन सैनिक के शव के अवशेष स्चेट्टेन गिरिजाघर के परिसर में एक कब्र में यूं ही पड़े रहे और एक तरह से उन्हें सदियों तक भुला दिया गया। कैप्टन जूस्ट प्लोगमैकर्स ने कहा , ‘‘ आज कर्नल स्चेल्टे वान अयश्मा के पार्थिव शरीर के अवशेष नयी कब्र में पूरे सैन्य सम्मान के साथ फिर से दफनाए जाएंगे।’’ यह स्पष्ट नहीं है कि कैसे वान अयश्मा मरे लेकिन 1637 की ‘ सीज आफ ब्रेडा’ के दौरान उनकी मौत हुई। तब इस दक्षिणी किले पर स्पेन का कब्जा था , उसे नीदरलैंड के निष्ठावान सैनिकों ने घेर लिया। नीदरलैंड के सैनिकों ने सालभर के संघर्ष के बाद उस पर फिर से कब्जा कर लिया। कर्नल को स्पेन से आजादी के लिए नीदरलैंड की लड़ाई का नायक माना जाता है। सदियों बाद उनके शव के अवशेष पाए जाने की कहानी किसी जासूसी उपन्यास की कहानी जैसी लगती है। सदियों तक गुमनाम रहने के बाद डच नेशनल मिलिट्री म्यूजियम के अधिकारियों ने 2015 में अचानक एक दिन इस बात पर गौर किया कि कर्नल का हेलमेट अभी भी स्थानीय चर्च में टंगा हुआ है। शौकिया इतिहासकार आंद्रे बुवाल्दा ने कर्नल की कब्र के पत्थर पर इसी प्रकार के हेलमेट की तस्वीर देखी थी।इसके बाद इस कब्र को खोला गया। डीएनए जांच में पुष्टि हुई कि ये अवशेष कर्नल के ही थे। 

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