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कैसी है गूगल की मोबाइल पेमेंट एप ‘तेज’, क्या है खास!

नई दिल्ली। सोमवार को सर्च इंजन कंपनी गूगल ने भारत में अपनी मोबाइल भुगतान सेवा तेज शुरू की। कंपनी ने देश में डिजिटल भुगतान में बढ़ती संभावनाओं के उपयोग और फायदे के लिए यह कदम उठाया है।

भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कंपनी के इस एप की शुरुआत की है। वहीं भारत में बढ़ती डिजिटल भुगतान संभावनाओं के बीच व्हाट्सएप और फेसबुक भी पेमेंट एप शुरू करने के पर काम कर रहे हैं।

  • गूगल के अनुसार तेज एंड्राइड पे की तरह ही काम करेगा।
  • तेज एप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों से फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है।
  • तेज सभी बैंको से जुड़ा है जिससे पेमेंट की सुविधा बिना दूसरे खाते के उपलब्ध हो जाती है।
  • गूगल तेज के उपभोक्ता सीधे अपने बैंक खाते से पेमेंट कर सकेंगे और पेमेंट प्राप्त कर सकेंगे।
  • गूगल तेज एप में क्यूआर कोड स्कैन करके भी पेमेंट करने की सुविधा है। 
  • गूगल तेज ने अपने उपभोक्ताओं के लिए लकी ड्रॉ जैसी सुविधा भी रखी है जिससे हर महीने 1000 रुपए तक जीते जा सकते हैं।
  • दुकानदार/व्यवसायी तेज बिजनेस एप का डिजिटल पेमेंट के लिए उपयोग कर सकते हैं।
  • 'तेज कैश' के द्वारा आप दूसरों से पैसे ले या दे सकते हैं। इसके द्वारा ऑनलाइन शॉपिंग भी की जा सकती है।
  • वहीं बस एक रिमांइडर सैट करने से एप आपको याद दिलाएगा कि आपको आरडी या अन्य किसी का पेमेंट करना है।
  • तेज एप हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड़, मराठी, तमिल, तेलगु आदि भाषाओं में काम कर सकता है।
  • इस एप से रोजाना एक लाख रुपए और दिन में 20 ट्रांसफर करने की सीमा तय की गई है। 

यूपीआई भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से लांच की गई भुगतान प्रणाली है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक नियंत्रित करती है। इसके सहयोग से मोबाइल के माध्यम से दो बैंक खातों के बीच तत्काल फंड ट्रांसफर किया जा सकता है। भारत के बढ़ते डिजिटल भुगतान प्रणाली में वाट्स एप भी अपना पांव पसारने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अग्रणी मेसैजिंग एप की पहले से ही एनपीसीआई के साथ बात चल रही है और कुछ बैंक यूपीआई के माध्यम से वित्तीय ट्रांजेक्शन की सहायता पहुंचाने के लिए भी तैयार हैं।

डब्ल्यूएबेटाइंफो ब्लॉग वेबसाइट के अनुसार, वाट्सएप यूपीआई प्रणाली का प्रयोग कर बैंक से बैंक ट्रांसफर योजना को अंतिम रूप दे रहा है। कुछ मोबाइल मैसेजिंग एप जैसे 'वी चैट' और 'हाईक मैसेंजर' पहले से ही यूपीआई आधारित भुगतान सेवा को सपोर्ट करते हैं।

इलेक्ट्रोनिक और सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्रालय के अनुसार, भारत में डिजिटल भुगतान की आधारभूत संरचना में 2017 के अंत तक लगभग 50 लाख इलेक्ट्रोनिक प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) के साथ तीन स्तरों में बढ़ोतरी की संभावना है।

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