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40 फीसद एचआईवी पीड़ित दवा को मोहताज

पेरिस। संयुक्त राष्ट्र की एचआईवी/एड्स एजेंसी ने आज बताया कि एचआईवी से संक्रमित पांच में से कम से कम तीन लोगों ने वर्ष 2017 में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ली। दुनिया भर में ऐसे लोगों की संख्या 2.17 करोड़ है और यह एंटी-एड्स दवा तक पहुंच का नया रिकॉर्ड है।

एचआईवी का इलाज जिन दवाइयों से किया जाता है, उन्हें एंटीरेट्रोवायरल मेडिसिन कहा जाता है। ये दवाइयां,एचआईवी वायरस को शरीर से बाहर नहीं निकालती, बल्कि उनको अपनी तादाद बढ़ाने से रोकती हैं। ताकि इस बीमारी की गति धीमी हो जाये। एंटीरेट्रोवायरल दवाइयों को “ एआरवी ” कहते हैं और इन दवाइयों द्वारा एचआईवी के इलाज की प्रक्रिया को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी या एआरटी कहा जाता है।

यूएनएड्स की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में 3.69 करोड़ लोग प्रतिरोधक तंत्र को प्रभावित करने वाले इस विषाणु से संक्रमित थे। इनमें से 1.52 करोड़ लोगों को आवश्यक दवा मिली। एजेंसी ने नये संक्रमणों और मौतों की संख्या में कमी लाने में हुई प्रगति की प्रशंसा की , लेकिन उसने इंसानों के मरने की बढ़ती संख्या पर अफसोस भी जताया।

1980 के दशक की शुरुआत में इस बीमारी का पता चला था और तब से करीब आठ करोड़ लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और 3.54 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है। एजेंसी ने कहा कि अब तक हुई प्रगति से इसके खतरे पर तो विराम लगा है लेकिन एजेंसी ने यह चेतावनी दी है कि इस बीमारी पर किये जाने वाले खर्च एवं दुनिया के ध्यान में कमी आयी है।

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रम्प के शासन में अमेरिकी प्रशासन ने इस पर होने वाले खर्च में कटौती की धमकी दी है। अमेरिका एड्स कार्यक्रम पर सबसे अधिक कोष खर्च करने वाला देश रहा है।

संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य है कि वर्ष 2020 तक एचआईवी संक्रमित लोगों में से 90 प्रतिशत अपनी स्थिति को जानें। उनमें कम से कम 90 प्रतिशत को निश्चित रूप से एआरटी प्राप्त होना चाहिए और उनमें से 90 प्रतिशत के एचआईवी विषाणु सक्रिय नहीं होने चाहिए।

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