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भारत में चलेगी हाइपरलूप, एक घंटे में पहुंचेंगी मुंबई से चेन्नई

नई दिल्ली। भारत के मुंबई-चेन्नई, बेंगलूर-चेन्नई में हाइपरलूप चलाने का प्रस्ताव है। हाइपरलूप के द्वारा मुंबई-चेन्नई तक 1102 किलोमीटर की दूरी को सिर्फ 63 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। वहीं बेंगलूर से चेन्नई तक हाइपरलूप यात्रियों और माल को सिर्फ 23 मिनट में ले जाएगी। मुंबई से चेन्नई तक हाइपरलूप पुणे, कोल्हापुर, धारवाड़, तुमकूरु, बेंगलुरु और वेल्लोर से होकर गुजरेगी।

एईसीओएम इंडिया ने 334 किलोमीटर के बेंगलूर-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का प्रस्ताव किया था जो यात्रियों और माल को सिर्फ 23 मिनट में ले जाएगा। यह मार्ग कोलार, पालमानर, चित्तूर और कांचीपुरम से होकर गुजरेगा। जनवरी में हाइपरलूप वन ने ग्लोबल चैलेंज के तहत दुनियाभर में हाइपरलूप रूट की पहचान के लिए प्रतियोगिता कराई जिसमें फाइनल के बाद पांच देशों की लिस्ट जारी की है। विश्वभर के पांच देशों में 10 जगहों पर हाइपलूप अपने ट्रैक बनाएगा जिसमें भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, मैक्सिको और कनाडा जैसे देश शामिल हैं। जिन 5 देशों की 10 जगहों को इसके लिए चुना गया है अब इनके प्रतिनिधि और टीम अब हाइपरलूप वन के साथ काम करेगी और इन 10 जगहों पर ट्रैक बनाने के लिए गहन अध्यन करेंगी।

हाइपरलूप वन ने अपनी चुनौती के विजेताओं की घोषणा की है जिसमें दो भारतीय कंपनियों, हाइपरलूप इंडिया और एईसीओएम इंडिया ने इस सूची में स्थान पाया है। दुनियाभर के 2600 शहरों में से भारत के चार शहरों को हाइपरलूप के लिए चुना गया है।

हाइपरलूप इंडिया ने मुंबई-चेन्नई मार्ग प्रस्तावित किया जो पूरे भारत में पूर्व-पश्चिम कनेक्शन प्रदान करेगा। मुंबई-चेन्नई तक 1102 किलोमीटर की दूरी को सिर्फ 63 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। मुंबई से चेन्नई तक हाइपरलूप पुणे, कोल्हापुर, धारवाड़, तुमकूरु, बेंगलुरु और वेल्लोर से होकर गुजरेगी।

एईसीओएम इंडिया ने 334 किलोमीटर के बेंगलूर-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का प्रस्ताव किया था जो यात्रियों और माल को सिर्फ 23 मिनट में ले जाएगा। यह मार्ग कोलार, पालमानर, चित्तूर और कांचीपुरम से होकर गुजरेगा।

हाइपरलूप ट्रेन चुंबकीय शक्ति पर आधारित तकनीक है। जिसके अंतर्गत खंभों के ऊपर (एलीवेटेड कॉरिडोर) पारदर्शी ट्यूब बिछाई जाती है। इसके भीतर बुलेट जैसी शक्ल की लंबी सिंगल बोगी हवा में तैरते हुए चलती है। इसमें घर्षण नहीं होता है इसलिए इसकी गति 72000 किलोमीटर/घंटा से भी अधिक हो सकती है।

हाइपरलूप प्रस्तावित परिवहन का पांचवां मोड है एलोन मस्क ने इस विचार को शुरू करने के बाद से हर किसी का ध्यान आकर्षित किया है। जबकि दुनियाभर में कई कंपनियां वैक्यूम में परिवहन की इस अवधारणा को बनाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं हाइपरलूप वन ऐसी एकमात्र कंपनी है जिसने पूर्ण रूप से हाइपरलूप प्रणाली का निर्माण और परीक्षण किया है।

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