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भारत में तनाव का स्तर बढ़ा

नई दिल्ली| विकसित और कई उभरते देशों की तुलना में भारत में तनाव का स्तर अधिक है। भारत की लगभग 89 प्रतिशत आबादी का कहना है कि वे 86 प्रतिशत के वैश्विक स्तर की तुलना में तनाव से अधिक पीड़ित हैं। इसके अलावा आठ में से एक व्यक्ति को तनाव से निपटने में गंभीर रूप से दिक्कत का सामना करना पड़ता है। सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस ने सोमवार को अपने सिग्ना '360डिग्री वेल-बीइंग सर्वेक्षण-फ्यूचर एश्योर्ड' के परिणाम जारी किए। सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस अमेरिका स्थित वैश्विक स्वास्थ्य सेवा कंपनी, सिग्ना कॉर्पोरेशन और भारतीय समूह, टीटीके ग्रुप का संयुक्त उद्यम है। 

यहां जारी एक बयान के अनुसार, यह सर्वेक्षण अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन, ब्राजील और इंडोनेशिया सहित 23 देशों में किया गया और इसमें 14,467 ऑनलाइन साक्षात्कार लिए गए। बयान के अनुसार, सर्वेक्षण में पांच प्रमुख क्षेत्रों - शारीरिक, पारिवारिक, सामाजिक, वित्तीय एवं कार्य- में स्वास्थ्य के बारे में उनकी समझ पर लोगों की सोच एवं चिंताएं तलाशी गईं। सर्वेक्षण के निष्कर्षो के अनुसार, भारत लगातार चौथे वर्ष संपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य सूचकांक में सबसे ऊपर रहा। इस वर्ष भारत में शारीरिक, सामाजिक एवं पारिवारिक स्वास्थ्य में हल्की-सी गिरावट देखने को मिली, जबकि कार्य एवं वित्तीय स्वास्थ्य के प्रति भागीदारों की प्रवृत्ति आशावादी रही। सबसे अधिक गिरावट शारीरिक क्षेत्र में देखने को मिली, जो वजन एवं पोषण प्रबंधन में परिलक्षित हुई, उसके बाद नींद-संबंधी परिवर्तनों का स्थान रहा। 

सामाजिक क्षेत्र में, भारत के 50 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा कि वे दोस्तों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पाते हैं या उनके पास अपने शौक की चीजों को करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। पारिवारिक स्वास्थ्य में गिरावट इसलिए आई है कि माता-पिता और बच्चों को आर्थिक रूप से सपोर्ट करने की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रसून सिकदर ने कहा, "कार्यस्थल किसी कर्मचारी के स्वास्थ्य एवं कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यस्थलीय तनाव को दूर करना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है।"
 

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