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पूरी दुनिया में आर्थिक विषमता का ग्राफ बढ़ा

नई दिल्ली। पिछले करीब चार दशकों से भारत सहित पूरी दुनिया में आर्थिक विषमता का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है हालांकि हर जगह इसकी रफ्तार अलग अलग रही है। दुनिया भर में आर्थिक हालात पर विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की राय के आधार पर 'द वर्ल्ड वेल्थ एंड इनकम डाटाबेस' की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार 1980 से उत्तरी अमरीका,चीन,भारत और रूस में आर्थिक विषमता की खाई बढ़ती ही जा रही है हालांकि यूरोप में इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है। रिपोर्ट में भारत की स्थिति का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश में वर्ष 2014 में एक प्रतिशत लोगों के पास जहां राष्ट्रीय आय का 22 फीसदी हिस्सा था वहीं दस प्रतिशत के पास 56 फीसदी हिस्सा था। आगे आने वाले समय में यह संपन्न वर्ग और संपन्न होता गया और बाकी की आबादी की कुल आय की तुलना में राष्ट्रीय आय के हिस्से में इनका कब्जा और बढ़ता ही चला गया।

पछले चार दशकों में यह स्थिति अकेले भारत में नहीं रही बल्कि पूरी दुनिया में कमोबश यही हालात रहे और एक प्रतिशत धनाढ्य वर्ग ने दुनिया की निर्धतम 50 प्रतिशत आबादी की कुल आर्थिक संपदा से दोगुना अर्जित किया। दूसरे शब्दों में 1980 से दुनिया भर के आय के जितने नए संसाधन बने उनपर धनाढ्य वर्ग का कब्जा रहा जबकि दुनिया की 50 प्रतिशत निर्धतम आबादी को केवल 13 फीसदी संसाधन ही हाथ लगे।

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