बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा

नई दिल्ली। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा को आज उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसी के साथ वह देश की पहली ऐसी महिला वकील बन गयी हैं जो बार से सीधे देश की शीर्ष अदालत में न्यायाधीश नियुक्त हुयी हैं। विधि मंत्रालय के एक बयान में कहा गया , ‘‘भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 (2) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति को सुश्री इंदु मल्होत्रा को भारत के उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश नियुक्त करते हुए प्रसन्नता हो रही है तथा उनकी नियुक्ति उनके पद ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। ’’ 
इंदु मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया था। अब वह देश की पहली ऐसी महिला वकील बन गयी हैं जो सीधे देश की शीर्ष अदालत में न्यायाधीश नियुक्त हुयी हैं। सर्वोच्च न्यायालय के कोलेजियम ने 10 जनवरी को उन्हें उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। शीर्ष न्यायालय के एक प्रस्ताव में कहा गया , ‘‘ हमारी सुविचारित राय में , वर्तमान में , इंदु मल्होत्रा , वरिष्ठ वकील उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए पर्याप्त रूप से योग्य हैं। ’’ कोलेजियम ने मल्होत्रा के साथ साथ उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ के नाम को भी उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनाने की सिफारिश भेजी थी। किंतु केन्द्र ने कोलेजियम से न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर पुनर्विचार करने को कहा है। देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद से शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीश बनने वाली मल्होत्रा सातवीं महिला होंगी। किंतु शेष छह न्यायाधीश उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय पहुंची थीं। वर्तमान में न्यायमूर्ति आर भानुमति उच्चतम न्यायालय में एकमात्र महिला न्यायाधीश हैं। यमूर्ति एम फातिमा बीबी उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने शीर्ष न्यायालय के 1950 में स्थापना के 39 साल बाद नियुक्त किया गया था। इसके बाद न्यायमूर्ति सुजाता एम मनोहर, न्यायमूर्ति रूमा पाल, न्यायमूर्ति ज्ञानसुधा मिश्रा, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति भानुमति शीर्ष न्यायालय की न्यायाधीश बनीं। न्यायमूर्ति ज्ञानसुधा मिश्रा और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने 2013 में एक नया इतिहास तब रचा जब दोनों ने पूरे दिन पूर्णत : महिला पीठ के रूप में सुनवाई की थी। उच्चतम न्यायालय के 67 वर्षीय इतिहास में ऐसा दूसरा अवसर तब आया जब न्यायमूर्ति देसाई एवं न्यायमूर्ति भानुमति ने इस तरह की पीठ में सुनवाई की। 

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