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सफारी में बढ़ेग शेरों का कुनबा

इटावा। उत्तर प्रदेश मे इटावा मुख्यालय के फिशर वन मे स्थापित कराए जा रहे इटावा सफारी पार्क में शेरों का कुनबा बढ़ाने की कवायद फिर से शुरू की जा रही है।
सफारी प्रशासन की पूरी उम्मीदें शेरनी जेसिका पर टिकी हैं। पिछले साल अक्तूबर माह में जेसिका ने दो शावकों को जन्म दिया था जो अभी तक अपनी मां के साथ रह रहे हैं । अब इन्हें अलग स्थान पर रखा जाएगा और जेसिका को फिर गर्भवती कराने की कोशिशें की जाएंगी। इटावा सफारी पार्क के निदेशक पीपी सिंह ने बताया कि कोशिश की जा रही है सफारी मे शेरों के कुनबे में बृद्धि हो। शेरों को कुनबा बढ़ाने की कवायद शुरू की गई है। इसके साथ ही गुजरात से भी शेरनी मंगाई जा रही हैं। मुख्य मकसद सफारी में शेरों का कुनबा बढ़ना है। कुवंरि के बीमार होने से सारा दारोमदार जेसिका पर है। सिंह ने बताया कि इटावा सफारी पार्क में गुजरात से लाई गई शेरनी जेसिका ने पांच और छह अक्तूबर को दो शावकों को जन्म दिया था। यह दोनों शिम्बा और सुल्तान फिलहाल मां के साथ ही रह रहे हैं। दोनों अब नौ महीने के हो चुके हैं अब इन्हें इनकी मां से अलग रखे जाने का समय आ गया है। इसकी तैयारी सफारी प्रशासन कर रहा है। सफारी को जनता के लिए खोलने से कम से कम दस शावकों का होना जरूरी है। फिलहाल सफारी में सिर्फ दो शावक हैं। इसलिए शावकों की संख्या बढ़ाए जाने पर सर्वाधिक जोर दिया जा रहा है। गुजरात से भी तीन शेरनी मंगाए जाने के लिए बातचीत जारी है। बारिश के बाद गुजरात से तीन शेरनी सफारी पार्क में पहुंच जाएंगी। उन्होने बताया कि इटावा सफारी पार्क में शेरों की निगरानी के लिए विशेषज्ञ डाक्टरों को तैनात किया जा रहा है । गोवा, दमन, दीव में सफारी में काम कर चुके डा. गौरव श्रीवास्तव सफारी के शेरों की निगरानी में लगे हैं। सफारी प्रशासन ने महाराष्ट्र में कार्य कर रही विशेषज्ञ डा. रुचा श्रीवास्तव से भी सम्पर्क किया है। निदेशक ने बताया है कि डा.रुचा श्रीवास्तव महाराष्ट्र सरकार की सेवा छोड़कर इटावा सफारी पार्क में आने के लिए तैयार हैं। जल्द ही उनके सफारी पहुंच जाने की संभावना है। इस बीच डा. अरविन्द त्रिपाठी को तबादले के बाद सफारी से रिलीव कर दिया गया है। सिंह ने बताया कि आईबीआरआई बरेली तथा मथुरा के विशेषज्ञ डाक्टरों से सफारी प्रशासन सम्पर्क में है और जरूरत पड़ने पर उनकी सेवाएं तत्काल मिलेंगी। उन्होने बताया कि इटावा सफारी पार्क मे लैपर्ड उन वन्य जीवों में शामिल हैं जिन्हे कैनाइन डिस्टेम्पर की बीमारी हो सकती है। सफारी के कई शेर इस जानलेवा बीमारी से पीड़ित रह चुके हैं। सफारी में ही कैनाइन डिस्टेम्पर की वैक्सीन का प्रयोग किया गया था,जो सफल रहा है।
सफारी लाए जाने से पहले सभी लैपर्ड को कैनाइन डिस्टेम्पर रोधी वैक्सीन दी जा चुकी है। सफारी में आठ लैपर्ड लाए जाने हैं। इनमें से पांच कानपुर और तीन लखनऊ चिड़ियाघर में है। बारिश के बाद इन्हें सफारी लाया जाएगा। सफारी में तीन शेरनी जेसिका, हीर और कुवंरि हैं। इनमें से कुवंरि बीमार चल रही है। हीर ने जुलाई 2015 में दो शावकों को जन्म दिया था। हालांकि बाद में दोनों की मौत हो गई थी। 

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