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पापड़ बेलकर पांच बेटियों को सबल बनाया

बैतूल। विपरीत परिस्थितियों के बीच अथक परिश्रम से जुड़ी 'पापड़ बेलने' की कहावत को चरितार्थ करते हुए मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की एक महिला ने अपने पति के निधन के बाद पांच बेटियों को पापड़ बेलकर ही न सिर्फ पढ़ाया लिखाया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा भी कर दिया। अब बड़ी बेटी भारती ने एमए, एलएलबी, बीएड किया और भोपाल के एक स्कूल में अध्यापिका हैं

महिला सशक्तिकरण की एक शानदार मिसाल पेश करने वालीं स्थानीय निवासी पंचफूला सूने ने बताया कि 17 सितंबर 2002 का वो मनहूस दिन कभी नहीं भूल सकती हैं, जब उन्हें उनके पति की करंट लगने से निधन की सूचना मिली। मानो उनके पैरों तले जमीन ही नहीं थी। कई दिनों तक तो इस सदमे से बाहर ही नहीं आ पायी। कई मौकों पर जीवन समाप्त करने का सोचती थी, लेकिन दूसरे ही पल पांच बेटियों के भविष्य का सवाल था। पति के जीवित रहने तक कभी चहारदीवारी से बाहर नहीं निकली श्रीमती सूने ने बताया कि अब उन्होंने अपना पूरा जीवन पांचों बेटियों का भविष्य बनाने के लिए समर्पित कर दिया था। आजीविका के लिए अपने परिचितों की सलाह पर पापड़ बेलकर बेचने का कार्य शुरू किया।

शुरूआती संघर्ष के बाद इस कार्य में सफलता मिलने लगी और इस दौरान पांचों बेटियों की पढ़ाई आदि का खर्च इसी से निकाला। हालाकि इस दौरान कई मर्तबा आर्थिक तंगी के चलते बेटियों की फीस आदि में भी तकलीफ उठानी पड़ी। लेकिन उन्हें अब इस बात की प्रसन्नता है कि पांचों बेटियां पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो गयी हैं।

श्रीमती सूने ने अपने जीवन के संघर्ष भरे सफर की यादों को साझा करते हुए बताया कि वे महाराष्ट्र के सेंदूरजना घाट की रहने वाली हैं। उनका विवाह परतवाड़ा के सिरजगांव में हुआ था। पति हलवाई का काम करते थे और वर्ष 1984 में बैतूल आकर बस गए थे। यहां उनके परिवार में 5 बेटियां आईं। हमने कभी भी बेटे की चाह नहीं की और न ही बेटा नहीं होने का मलाल किया। हम पति-पत्नी की यही ख्वाहिश थी कि बेटियों को खूब पढ़ाएं-लिखाएं और उन्हें अच्छे पदों पर पहुंचाए।

श्रीमती सूने बतातीं हैं कि पति के निधन के बाद उन्होंने पापड़ बेलना शुरू किया और बड़ी बेटी ने ट्यूशन पढ़ाना प्रारंभ कर दिया। संघर्ष में सभी बेटियों ने साथ दिया और उन्होंने भी कभी हिम्मत नहीं हारी। अब बड़ी बेटी भारती ने एमए, एलएलबी, बीएड किया और भोपाल के एक स्कूल में अध्यापिका हैं। दूसरी बेटी सुरेखा ने एमए, बीएड किया है। इन दोनों का विवाह हो चुका है। तीसरी बेटी नीलिमा ने बीएससी नर्सिंग किया और वह एक अस्पताल में नर्स है। चौथी बेटी मीना ने एमटेक किया और वह यह निजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

पांचवीं बेटी मेघा बीएससी नर्सिंग करने के बाद नर्स के पद पर कार्य कर रही हैं। श्रीमती सूने का कहना है कि बेटियों ने अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उन्हें पापड़ नहीं बेलने दिए और अब बेटियां ही उनका सहारा हैं।

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