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मुन्ना बजरंगी जैसे कईयों की जेल में हुई है हत्या

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के कुख्यात माफिया सरगना प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की कल बागपत जेल में हुई हत्या, इस तरह का अकेला मामला नहीं है। प्रदेश की जेलों में पहले भी ऐसी कई वारदात हुई है, जब कैद में अपराधियों की हत्या की गयी। इससे पहले 13 मई 2015 को बजरंगी के करीबी माने जाने वाले अनुराग त्रिपाठी उर्फ अन्नू की संतोष गुप्ता नामक कैदी ने वाराणसी जेल में गोली मारकर हत्या कर दी थी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक अन्नू की हत्या करने के लिये हथियार को एयर कूलर के अंदर रखकर जेल में पहुंचाया गया था, ताकि मेटल डिटेक्टर में वह पकड़ में ना आये। अन्नू वाराणसी के एक पार्षद बंशी यादव की हत्या के मामले दो मार्च 2004 से जेल में था। वर्ष 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिये आबंटित धन में घोटाले के आरोपी डाक्टर योगेन्द्र सचान की 22 जून को संदिग्ध परिस्थितियों में लखनऊ जेल के अंदर मौत हो गयी थी। सचान का शव जेल के शौचालय से बरामद किया गया था। उसकी गर्दन पर दाढ़ी बनाने वाले ब्लेड से काटे जाने के नौ निशान थे और उसकी गर्दन में उसी की बेल्ट बंधी थी, जिसका दूसरा सिरा खिड़की से बंधा हुआ था। जेलों के अंदर ऐसे जानलेवा हमलों के मद्देनजर प्रदेश में कैदियों की सुरक्षा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खासकर कल बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद इसे और पुख्ता कर दिया गया है। जेल में हत्या की वारदात के मद्देनजर गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने यहां की जेलों का सघन निरीक्षण करने के निर्देश दिये हैं, ताकि वहां से अपना काम कर रहे अपराधियों की हरकतों पर रोक लग सके। प्रदेश की विभिन्न जेलों में इस वक्त माफिया सरगना बबलू श्रीवास्तव, मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह, मोनू पहाड़ी, चंदन सिंह, संजीव माहेश्वरी और श्यामबाबू पासी बंद हैं।

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